Ketu Gochar: मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में केतु, 30 जून से बदलेगी 4 राशियों की तकदीर

Ketu Gochar:केतु 30 जून 2026 को मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे हैं. इस ज्योतिषीय गोचर से मेष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों के जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है. जानें इस परिवर्तन का महत्व, शुभ प्रभाव और केतु के दोषों को दूर करने के कुछ सरल और प्रभावी उपाय.

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जब भी केतु अपनी स्थिति या नक्षत्र में परिवर्तन करते हैं, तो उसका प्रभाव संपूर्ण राशि चक्र पर पड़ता है. (Photo: ITG) जब भी केतु अपनी स्थिति या नक्षत्र में परिवर्तन करते हैं, तो उसका प्रभाव संपूर्ण राशि चक्र पर पड़ता है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

Ketu Gochar: ज्योतिष शास्त्र में केतु को एक रहस्यमयी और आकस्मिक घटनाओं का ग्रह माना गया है, जो अपनी उल्टी चाल के लिए जाना जाता है. अपनी विशेष ऊर्जा के कारण, जब भी केतु अपनी स्थिति या नक्षत्र में परिवर्तन करते हैं, तो उसका प्रभाव संपूर्ण राशि चक्र पर पड़ता है. इसी क्रम में, 30 जून 2026 को केतु मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश करने वाले हैं. यह नक्षत्र गोचर न केवल ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कुछ खास राशियों के जीवन में अनपेक्षित सफलता और उन्नति के नए द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है.

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मेष राशि (Aries): इस दौरान धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं.  यदि आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था, तो उसके वापस मिलने की पूरी संभावना है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. 

सिंह राशि (Leo): मघा नक्षत्र का स्वामी सिंह राशि से गहरा संबंध रखता है, इसलिए यह समय आपके मान-सम्मान में वृद्धि करेगा. व्यापार में नए समझौतों से बड़े मुनाफे के संकेत हैं. 

वृश्चिक राशि (Scorpio): इस राशि के जातकों के लिए यह गोचर भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है. जमीन या शेयर बाजार में किया गया पुराना निवेश अब लाभ देना शुरू करेगा. 

 कुंभ राशि (Aquarius): व्यापारिक दृष्टिकोण से यह समय बेहद शानदार है. पार्टनरशिप में काम करने वालों को उम्मीद से अधिक मुनाफा मिल सकता है. आपकी योजनाएं सफल होंगी.

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केतु को शुभ बनाने के उपाय

केतु के इस शक्तिशाली गोचर का पूर्ण लाभ उठाने के लिए आप कुछ सरल उपाय अपना सकते हैं.  प्रतिदिन भगवान गणेश की उपासना करें, क्योंकि केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में उनकी पूजा अत्यंत प्रभावी मानी गई है. जरूरतमंदों को काले तिल, कंबल या जूते-चप्पल का दान करना भी इस दौरान शुभ फलदायी होता है. पितरों के निमित्त तर्पण या जल अर्पण करना इस समय विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है. 

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