Buddha Purnima 2026: लाफिंग बुद्धा आखिर हैं कौन, घर में तो रखा होगा लेकिन नहीं जानते होंगे ये बात

Buddha Purnima 2026: लोग अक्सर बुद्ध की मूर्तियों और उनके अर्थ को लेकर भ्रमित हो जाते हैं, खासकर शाक्यमुनि बुद्ध और लाफिंग बुद्ध (बुदाई) के बीच. दोनों दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं, लेकिन फर्क यह है कि एक असली बुद्ध की मूर्ति है, जबकि दूसरी एक बौद्ध भिक्षु की.

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गौतम बुद्ध का जन्म 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में नेपाल के लुम्बिनी में राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में हुआ था. (Phtoto: ITG) गौतम बुद्ध का जन्म 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में नेपाल के लुम्बिनी में राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में हुआ था. (Phtoto: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:08 PM IST

Buddha Purnima 2026:  आज बुद्ध पूर्णिमा है एक ऐसा पावन दिन जो न केवल भारत, बल्कि पूरे दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. राजकुमार सिद्धार्थ गौतम, जिन्हें पूरी दुनिया गौतम बुद्ध के नाम से जानती है, उनके इस जन्मदिन को अलग-अलग देशों में अपनी अनूठी परंपराओं के साथ मनाया जाता है. दक्षिण-पूर्वी एशिया में इसे वेसाक (Vesak) के नाम से पुकारा जाता है. यह पावन तिथि न केवल भगवान बुद्ध के जन्म का उत्सव है, बल्कि उनके ज्ञान की प्राप्ति  और उनके महापरिनिर्वाण का भी प्रतीक है. अक्सर इस अवसर पर एक बड़ा ही दिलचस्प सवाल लोगों को उलझन में डाल देता है कि क्या लाफिंग बुद्धा और गौतम बुद्ध एक ही हैं? पहली नज़र में दोनों के स्वरूप और संदेश बिल्कुल अलग नजर आते हैं, फिर भी यह भ्रम बना रहता है. आइए, बुद्ध पूर्णिमा के इस शुभ दिन पर आपके इस कंफ्यूजन को पूरी तरह दूर करते हैं .

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मूल इतिहास
शाक्यमुनि बुद्ध: गौतम बुद्ध का जन्म 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में नेपाल के लुम्बिनी में राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में हुआ था.  इन्होंने सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने के लिए राजपाठ त्याग दिया और बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया. 

लाफिंग बुद्धा: इनका असल नाम बुदाई है और ये 10वीं शताब्दी के एक चीनी भिक्षु थे.  ये हमेशा एक झोला लेकर चलते थे और बच्चों व गरीबों में खुशियां बांटते थे. चीनी परंपरा में इन्हें मैत्रेय बुद्ध यानी भविष्य के बुद्ध का अवतार माना जाता है. 

शारीरिक दिखावट 
इन दोनों की मूर्तियों को देखते ही आप अंतर पहचान सकते हैं:

शाक्यमुनि बुद्ध: ये हमेशा एक ध्यानमग्न महापुरुष के रूप में दिखते हैं.  इनका शरीर छरहरा और सुडौल होता है.  इनके सिर पर घुंघराले बाल और एक ऊंचा उभार जिसे उष्णीष कहते हैं (जो ज्ञान का प्रतीक है), होता है. इनके कान लंबे होते हैं और चेहरे पर एक गहरी शांति होती है. 

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लाफिंग बुद्धा: इनकी पहचान इनके विशाल पेट, गंजे सिर और खिलखिलाती मुस्कान से होती है. ये थोड़े मोटे दिखाए जाते हैं, जो संतोष और खुशहाली का प्रतीक है. 

वस्त्र और मुद्राएं 
शाक्यमुनि बुद्ध: ये हमेशा एक साधारण भिक्षु के चोगे जिसे काषाय  कहते हैं, उसमें होते हैं. इनकी प्रतिमाएं अलग-अलग मुद्राओं में होती हैं, जैसे:

भूमिस्पर्श मुद्रा: हाथ जमीन को छूते हुए (धरती को साक्षी मानना)

ध्यान मुद्रा: दोनों हाथ गोद में. 

अभय मुद्रा: हाथ आशीर्वाद देने की स्थिति में. 

लाफिंग बुद्धा: ये अक्सर खुले हुए वस्त्रों में होते हैं जो उनके पेट को नहीं ढकते.  वे अक्सर अपने कंधे पर एक कपड़े की पोटली लिए होते हैं और कभी-कभी उनके हाथ में माला या वू लू यानी की अमृत का पात्र भी होता है. 

आध्यात्मिक अर्थ और प्रतीक
शाक्यमुनि बुद्ध: इनकी प्रतिमा आत्मज्ञान, करुणा और निर्वाण का प्रतीक है.  इनका उद्देश्य लोगों को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त करना और मन की शांति सिखाना है. 

लाफिंग बुद्धा: ये सौभाग्य, प्रचुरता और भौतिक सुख के प्रतीक हैं.  फेंगशुई में माना जाता है कि इनका बड़ा पेट दुनिया की सारी समस्याओं को सोख लेता है और बदले में आपको समृद्धि देता है.

घर में रखने का स्थान और उद्देश्य
शाक्यमुनि बुद्ध: यदि आप ध्यान करना चाहते हैं या मानसिक स्पष्टता और शांति चाहते हैं, तो इन्हें अपने मंदिर या मेडिटेशन कॉर्नर में रखें. इन्हें हमेशा आंखों के स्तर से ऊपर (Eye Level) रखना चाहिए. 

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लाफिंग बुद्धा: इन्हें लोग अक्सर अपने लिविंग रूम या ऑफिस की टेबल पर रखते हैं. माना जाता है कि इन्हें मुख्य द्वार के सामने रखने से घर में धन और सकारात्मक ऊर्जा 'ची' (Qi) का संचार होता है. 

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