सरिस्का में गूंजी किलकारी, बाघिन ST-22 ने तीन शावकों को दिया जन्म, बाघों की संख्या हुई 55

सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघिन ST-22 ने तीन शावकों को जन्म दिया है. कैमरा ट्रैप में तीनों शावक अपनी मां के साथ दिखाई दिए हैं. पहले दो शावकों की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब तीन शावकों की मौजूदगी साफ हो गई है. नए शावकों के साथ सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़कर 55 हो गई है.

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बाघिन ST-22 ने तीन शावकों को दिया जन्म. (Photo: PTI/File) बाघिन ST-22 ने तीन शावकों को दिया जन्म. (Photo: PTI/File)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर ,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:03 PM IST

राजस्थान के अलवर में मौजूद सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. सरिस्का की बाघिन ST-22 ने दो नहीं बल्कि तीन शावकों को जन्म दिया है. हाल ही में कैमरा ट्रैप में तीनों शावक अपनी मां के साथ नजर आए हैं, जिसके बाद वन विभाग और सरिस्का प्रशासन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है.

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तीन दिन पहले सरिस्का प्रशासन ने बाघिन ST-22 के साथ केवल दो शावकों की मौजूदगी की जानकारी दी थी. लेकिन लगातार मॉनिटरिंग और कैमरा ट्रैप फुटेज की जांच के बाद यह साफ हो गया कि बाघिन के साथ तीन शावक मौजूद हैं. बाघिन ST-22 अपने तीनों शावकों के साथ तालवृक्ष रेंज क्षेत्र में दिखाई दी है. कैमरा ट्रैप में कैद वीडियो में तीनों शावक स्वस्थ नजर आ रहे हैं. वहीं बाघिन भी पूरी सतर्कता के साथ अपने बच्चों की देखभाल करती दिखाई दे रही है.

वन विभाग ने शावकों की सुरक्षा को देखते हुए इलाके में गश्त बढ़ा दी है. साथ ही पर्यटकों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि शावकों को किसी तरह की परेशानी न हो. राजस्थान सरकार के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने भी तीनों शावकों की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि सरिस्का में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या वन संरक्षण और बेहतर प्रबंधन का सकारात्मक परिणाम है.

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कैमरा ट्रैप में मां के साथ नजर आए तीनों नन्हें शावक

उन्होंने बताया कि शावकों और बाघिन की सुरक्षा के लिए संबंधित क्षेत्र में मॉनिटरिंग बढ़ा दी गई है और वनकर्मियों की विशेष टीमें लगातार नजर बनाए हुए हैं. सरिस्का में बाघों की बढ़ती संख्या को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. नए तीन शावकों के जन्म के बाद अब सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़कर 55 तक पहुंच गई है.

एक समय ऐसा भी था जब साल 2004 में सरिस्का से बाघ पूरी तरह खत्म हो चुके थे. लेकिन सालों की मेहनत, बेहतर प्रबंधन और बाघ पुनर्वास परियोजना की वजह से आज सरिस्का फिर से बाघों की दहाड़ से गुलजार हो रहा है. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि शावकों का जन्म इस बात का संकेत है कि सरिस्का का जंगल अब बाघों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है.

2004 में बाघ विहीन हुआ सरिस्का अब फिर दहाड़ों से गुलजार

वहीं पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने भी इस खबर पर खुशी जताई है. सरिस्का में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या के कारण यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. बताया जा रहा है कि पर्यटकों को प्रतिदिन बाघों की साइटिंग भी हो रही है.
 

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