डॉक्टरों की हड़ताल... मरीज बेहाल, राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल को लेकर क्यों मचा बवाल?

राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल को लेकर बवाल जारी है. डॉक्टर पिछले कई दिनों से स्ट्राइक पर हैं. सरकार झुकने को तैयार नहीं है. लेकिन ये बिल किस बारे में है, इसको लेकर विवाद क्यों चल रहा है, इससे फायदा है या नुकसान?

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RTH बिल को लेकर बवाल (पीटीआई) RTH बिल को लेकर बवाल (पीटीआई)

देव अंकुर

  • जयपुर,
  • 22 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल को लेकर बवाल जारी है. प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल है, इमरजेंसी सर्विस बंद चल रही हैं और मरीज बेहाल अवस्था में सिर्फ इलाज का इंतजार कर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से राजस्थान के कई अस्पतालों से ये तस्वीर सामने आ रही है. उस तस्वीर की ग्राउंड रियलिटी आजतक ने अपने कैमरे में कैद की है. सिर्फ जगह बदली हैं, अस्पताल दूसरे हैं, लेकिन मरीजों की पीड़ा समान है, इलाज का वो लंबा इंतजार समान है.

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मरीजों के दर्द की ग्राउंड रियलिटी

जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में ओपीडी के बाहर मरीजों की एक लंबी कतार है. घंटों से वे अपने इलाज का इंतजार कर रहे हैं. ऐसी ही एक मरीज हैं ममता शर्मा जो अलवर की रहने वाली हैं. सांस की बीमारी है, कफ की भी समस्या है. अपने पति के साथ जयपुर आई हैं, इस उम्मीद में कि सही इलाज मिलेगा. लेकिन अस्पताल में आलम ये है कि दो दिन हो चुके हैं और ममता को अभी तक इलाज नहीं मिला है. मरीज के साथ आए प्रदीप शर्मा बताते हैं कि हम अलवर से आए हैं. कल भी अस्पताल आए थे लेकिन डॉक्टर को नहीं दिखा पाए. स्ट्राइक चल रही है, उस वजह से कुछ भी क्लियर नहीं चल रहा है. नहीं पता कि लाइन में लगकर इलाज मिलेगा या नहीं. कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है.

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डॉक्टरों का प्रदर्शन (पीटीआई)

ममता जैसी कहानी एक और मरीज की भी है. उनको तो यहां तक कहा गया है कि मरीज ज्यादा हैं, इसलिए आपको बेड नहीं मिल पाएगा. मरीज का नाम आशा है. वे भी इलाज की आस में सवाई मान सिंह अस्पताल आई हैं. लेकिन उनके रिश्तेदारों को बताया गया है कि मरीज ज्यादा होने की वजह से बेड नहीं मिल पाएगा. अब इस स्थिति के बारे में सीनियर डॉक्टर एमके शर्मा बताते हैं कि डॉक्टरों की स्ट्राइक की वजह से जमीन पर स्थिति काफी गंभीर बन गई है. हम किसी तरह मैनेज कर रहे हैं. अब कितने दिनों तक ये स्थिति रहती है, स्पष्ट नहीं, लेकिन अभी डॉक्टर स्ट्राइक खत्म करने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार भी झुकने के मूड में नहीं है.

एक चुनावी वादा जो बना बवाल का कारण

राजस्थान सरकार में स्वास्थ्य मंत्री प्रसादी लाल मीना ने जोर देकर कहा है कि डॉक्टर बिना किसी कारण के स्ट्राइक पर चले गए हैं. सलेक्ट कमेटी ने सभी को शामिल किया था, सभी की चिंताओं का भी ध्यान रखा गया था. अब सरकार के अपने दावे हैं, लेकिन जमीन पर बिल को लेकर आक्रोश का माहौल है. इसका कारण क्या है, बिल किस बारे में है, किन बिंदुओं पर बवाल है? असल में कांग्रेस ने राइट टू हेल्थ बिल लाने का वादा 2018 में ही कर दिया था. ये उसका एक चुनावी वादा था. फिर इसे पिछले साल सितंबर में सदन में पेश भी किया गया, लेकिन तब अनिवार्य मुफ्त आपातकालीन उपचार के नियमों को लेकर विवाद रहा और बिल पास नहीं हो पाया. लेकिन अब चालू बजट के दौरान इस बिल को पारित करवा दिया गया. 

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डॉक्टरों का प्रदर्शन (पीटीआई)

इस बिल के जरिए सरकार का उदेश्य है कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए मना नहीं किया जाएगा. वहीं अगर इमरजेंसी स्थिति में कोई मरीज अपना खर्चा नहीं उठा पाएगा तो सरकार वो वहन करेगी. ये नियम प्राइवेट अस्पतालों पर भी लागू होने वाला है. अब बिल के इसी पहलू का प्राइवेट अस्पताल विरोध कर रहे हैं. कुछ तो इसे राइट टू डेथ बिल घोषित कर रहे हैं. जोर इस बात पर है कि सरकार ने बिल में इमजरेंसी स्थिति को कही भी स्पष्ट नहीं किया है. ये भी नहीं बताया गया है कि अस्पताल को सरकार द्वारा किस तरह पैसों का भुगतान किया जाएगा. इसी वजह से प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
 

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