'भक्त के पीछे चल पड़े थे ठाकुर जी...'तब से इस मंदिर में रुक-रुककर कराए जाते हैं दर्शन

कोटा स्थित वृंदावन धाम बांके बिहारी मंदिर में दर्शन की अनोखी परंपरा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. मान्यता है कि एक बार ठाकुर जी अपने भक्त के प्रेम में उसके पीछे चल पड़े थे, जिसके बाद से यहां रुक-रुक कर पर्दा लगाकर दर्शन कराए जाते हैं. जानिए इस मंदिर की विशेष मान्यता, इतिहास और धार्मिक महत्व.

Advertisement
इस मंदिर में संभलकर कराए जाते हैं बांके बिहारी के दर्शन (Photo: itg) इस मंदिर में संभलकर कराए जाते हैं बांके बिहारी के दर्शन (Photo: itg)

चेतन गुर्जर

  • कोटा,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST

वृंदावन की भक्ति, बांके बिहारी की दिव्यता और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम अगर कहीं देखने को मिलता है तो वह है राजस्थान के रंगबाड़ी स्थित वृंदावन धाम बांके बिहारी मंदिर. उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर बना यह धाम आज हाड़ौती सहित राजस्थान भर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां पहुंचते ही भक्त खुद को मानो वृंदावन की गलियों में महसूस करते हैं.

Advertisement

मंदिर के सेवक गिरधरलाल जी बताते हैं कि 15 फरवरी 2010 को यहां ठाकुर बांके बिहारी जी की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी. यह भूमि पहले बाबा राधे जी की थी, जिन्होंने इसे धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया. बाद में श्रद्धालुओं के सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया.

पर्दे के पीछे छिपी है अनोखी कथा

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां ठाकुर जी के दर्शन लगातार नहीं होते, बल्कि बीच-बीच में पर्दा लगाया जाता है. इसके पीछे एक अत्यंत रोचक और भावुक लोक मान्यता जुड़ी है. कहा जाता है कि एक बार एक परम भक्त ठाकुर बांके बिहारी जी की मनमोहक छवि को एकटक निहार रहा था. भक्त की अटूट श्रद्धा और प्रेम से ठाकुर जी इतने मोहित हो गए कि वे स्वयं उसके साथ चल पड़े. तब से यह परंपरा शुरू हुई कि ठाकुर जी के सामने समय-समय पर पर्दा लगाया जाए, ताकि कोई भी भक्त उन्हें लगातार एकटक न देख सके और ठाकुर जी किसी भक्त के प्रेम में फिर से साथ न चल पड़ें.

Advertisement

हर दिन चार आरतियां, हर माह विशेष उत्सव

मंदिर में प्रतिदिन सुबह 8 बजे मंगला आरती, दोपहर 12 बजे राजभोग आरती, शाम 7 बजे संध्या आरती और रात 9:30 बजे शयन आरती होती है. आरती से पहले होने वाला भजन-कीर्तन पूरे परिसर को भक्तिमय बना देता है. हर एकादशी पर विशेष दर्शन और पूर्णिमा पर भव्य भजन-कीर्तन व शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है. इन अवसरों पर हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर ठाकुर जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

पुरुषोत्तम मास में सजते हैं दिव्य बंगले

पुरुषोत्तम मास के दौरान मंदिर की सजावट देखते ही बनती है. ठाकुर जी के लिए प्रतिदिन अलग-अलग थीम पर बंगले सजाए जाते हैं. मोरपंखी बंगला, झूला बंगला, मोगरे के फूलों से सजे बंगले और केले के तनों से बनने वाला विशेष बंगला श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. गर्मियों में ठाकुर जी को ठंडाई, आमरस, शरबत और लस्सी का विशेष भोग लगाया जाता है, ताकि उन्हें शीतलता प्रदान की जा सके.

वृंदावन की अखंड ज्योति और मिनी निधिवन

मंदिर परिसर के सामने वृंदावन से लाई गई अखंड ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है. मंदिर स्थापना के करीब पांच वर्ष बाद यहां एक छोटा 'निधिवन' भी विकसित किया गया. वहीं, पास स्थित प्राचीन तालाब को 'राधाकुंड' के रूप में विकसित करने का कार्य जारी है.

Advertisement

 बांके बिहारी धाम का अनुभव

मंदिर प्रबंधन के अनुसार सामान्य दिनों में भी प्रतिदिन 4 से 5 हजार श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. जन्माष्टमी, राधाष्टमी, शरद पूर्णिमा, हरियाली तीज और होली जैसे उत्सवों पर यहां का नजारा किसी बड़े धार्मिक मेले से कम नहीं होता. यही वजह है कि कोटा का यह वृंदावन धाम आज उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन चुका है, जो बिना वृंदावन गए भी ठाकुर बांके बिहारी जी की उसी दिव्यता और कृपा का अनुभव करना चाहते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »