JLF 2025: सुधा मूर्ति और अक्षता मूर्ति के संवाद में शामिल हुए, ऋषि सुनक और इंफोसिस के नारायण मूर्ति

JLF में अक्षता मूर्ति ने कहा कि मुझे एक किताब बहुत पसंद है, जिसमें एक प्रेमी जोड़े की कहानी है, जो कॉलेज में मिले थे. उन्होंने अपने पति ऋषि सुनक का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे ऋषि और मैं मिले थे, उन्होंने आगे कहा कि मुझे खुशहाल अंत वाली कहानियां पसंद हैं. वहीं सुधा मूर्ति ने कहा कि मैं 74 साल की उम्र में भी आदर्शवादी हूं.

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JLF में पहुंचे ऋषि सुनक JLF में पहुंचे ऋषि सुनक

देव अंकुर

  • जयपुर,
  • 01 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

जयपुर जिसे गुलाबी शहर के नाम से भी जाना जाता है, ये शहर एक बार फिर साहित्य, कला, और संस्कृति के महाकुंभ, जयपुर साहित्य महोत्सव (Jaipur Literature Festival) की मेजबानी कर रहा है. JLF में इस बार ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और इंफोसिस के नारायण मूर्ति जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सुधा मूर्ति के सत्र में शामिल हुए.  इस फेस्टिवल में विभिन्न क्षेत्रों योगदान देने वाली हस्तियां पहुंचती हैं और अपने अनुभव को साझा करती हैं. इस दौरान सुनक ऑडियंस के बीच में बैठे थे और पत्नी अक्षता तथा सास सुधा मूर्ति की बातचीत के दौरान मुस्कराते हुए नजर आए.

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अक्षता ने ऋषि सुनक का जिक्र किया

अक्षता मूर्ति ने कहा कि मुझे एक किताब बहुत पसंद है, जिसमें एक प्रेमी जोड़े की कहानी है, जो कॉलेज में मिले थे. उन्होंने अपने पति ऋषि सुनक का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे ऋषि और मैं मिले थे, उन्होंने आगे कहा कि मुझे खुशहाल अंत वाली कहानियां पसंद हैं. वहीं सुधा मूर्ति ने कहा कि मैं 74 साल की उम्र में भी आदर्शवादी हूं. मैंने बच्चों को सिखाया कि सबसे पहले आपको एक अच्छा इंसान बनना होगा. आपको अपना दिल साफ रखना होगा. साथ ही मैने बच्चों को सिखाया कि वहीं बोलना और करना चाहिए जो आप सोचते हैं.तभी आप एक अच्छी जिंदगी जी पाएंगे.

'कर्तव्य करो और परिणाम की चिंता मत करो'

JLF में विभिन्न क्षेत्रों योगदान देने वाली हस्तियां पहुंचती हैं और अपने अनुभव को साझा करती है. अक्षता मूर्ति और सुधा मूर्ति भी इस आयोजन में पहुंची थी. जहां इन्होंने आपस में संवाद किया और अपने अनुभव लोगों के साथ साझा किया. सुधा मूर्ति ने कहा कि हमें बच्चों को सिखाना होगा कि ये जिंदगी है 3 घंटे की फिल्म नहीं है. 

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अक्षता मूर्ति ने कहा कि आपने मुझे सिखाया कि जन्मदिन पर पार्टी के लिए जो पैसे मैंने बचाए थे, उन्हें दान में लगाना चाहिए. तब मुझे बुरा लगा था, लेकिन वही मेरी नींव बनी. ये वो दौर था जब कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) न तो अनिवार्य थी और न ही प्रचलन में थी, तब आपने इसे किया और हमें भी सिखाया. आपने मुझे सिखाया कि कर्तव्य करो और परिणाम की चिंता मत करो. मेरी सोच आपकी इस सीख ने बड़ा योगदान दिया. सुधा मूर्ति ने कहा कि लेकिन मैंने तुम्हें फ्रूटी और समोसे तो दिए थे.

अक्षता मूर्ति ने कहा कि हम सबने गीता में पढ़ा है कि कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, इसका मतलब है कि आप अपना काम करें. परिणाम की चिंता मत करो.

'छोटी उम्र से ही किताब पढ़ती हूं'

JLF में पहुंची प्राजक्ता माली ने कहा कि मैंने छोटी उम्र से ही बुक्स पढ़ना शुरू कर दिया था, लेकिन पहली रोमैन्स नॉवल 28 साल की उम्र में पढ़ी, यानी 3 साल पहले. उन्होंने कहा कि मेरी दिल्ली की फ्लाइट थी और मैं एयरपोर्ट पर काफी जल्दी पहुंच गई थी, तब मैंने जल्दी-जल्दी में ऑथर एमी ली की लिखी 'सेट ऑन यू' पढ़ी.  उन्होंने कहा कि तब से मुझे रोमैन्स नॉवल पढ़ने में इंटरेस्ट आने लगा और मैं अभी तक 227 बुक्स पढ़ चुकी हूं. मैं नॉवल पढ़ने से पहले भी रोमैन्स पर ही लिखना चाहती थी.

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'पर्दे के पीछे' का जिक्र

थिएटर ही मेरा मंदिर है, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन जब इला अरुण ने यह बात कही, तो उनकी आवाज में वही जुनून था, जो उनके अभिनय और गायन में झलकता है. उन्होंने अपनी किताब 'पर्दे के पीछे' के बारे में खुलकर बातें कीं, लेकिन इस सत्र में सिर्फ साहित्य ही नहीं, ड्रामा भी भरपूर रहा. 

कैलाश खेर ने पिता को याद किया
JLF में शिरकत करने पहुंचे  कैलाश खेर ने कहा कि जब मेरे पिता गाते थे, तो ऐसा था जैसे किसी स्वतंत्र आत्मा की आवाज सुन रहा हूं. मेरा बचपन से रुझान फिल्मी गानों से ज्यादा आध्यात्मिक गीतों की ओर था.  गानों के पीछे की कहानियों पर किताब लिखने का विचार लोगों के कहने पर 10 साल पहले आया था, अब वो बाहर आई है. यह कहना था पद्मश्री से सम्मानित सिंगर कैलाश खेर का. वहीं JLF के दूसरे दिन खेर ने अपनी किताब 'तेरी दीवानी' को लॉन्च किया और अपनी जीवन यात्रा के अनकहे पहलू साझा किए.

विभिन्न विषयों पर गहन चर्चाएं हुईं

जयपुर साहित्य महोत्सव 2025 में विभिन्न विषयों पर गहन चर्चाएं, पैनल डिस्कशन, और लेखकों के साथ साक्षात्कार आयोजित किए गए. इस वर्ष के महोत्सव में साहित्य, इतिहास, कविता, उपन्यास, नाटक, और समसामयिक मुद्दों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है. नोबेल पुरस्कार विजेता लेखकों से लेकर युवा और उभरते हुए साहित्यकारों तक, सभी इस मंच पर अपने विचारों और अनुभवों को साझा किया. श्रोताओं को अपने पसंदीदा लेखकों से सीधे संवाद करने और उनके साहित्यिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला.

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