'क्या प्रसूता नाचती हुई आई थीं?' बीकानेर के सरकारी अस्पताल में 5 महिलाओं की किडनी फेल, सवाल पर झुंझला गए हेल्थ मिनिस्टर

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले पर पत्रकारों से उलझ पड़े. 'नाचती हुई आई थी' वाले बयान पर पूरी रिपोर्ट...

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स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की फिसली जुबान.(Photo:Screengrab) स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की फिसली जुबान.(Photo:Screengrab)

शरत कुमार

  • बीकानेर/जयपुर,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:00 PM IST

राजस्थान के बीकानेर स्थित KPBM अस्पताल में प्रसव के बाद 5 ग्रामीण महिलाओं की अचानक किडनी फेल होने का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. इस घटना को लेकर जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, तो राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पत्रकारों के सवालों का सामना करते हुए अपनी भाषा का संयम खो बैठे. प्रसूताओं को लेकर की गई एक अमर्यादित टिप्पणी के बाद पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारी हंगामा हो गया.

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने मंत्री से बेहद सीधा और तीखा सवाल पूछा कि आखिर बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में आई उन 5 पीड़ित महिलाओं में एक जैसे लक्षण क्यों दिखे? डिलीवरी के महज 2 से 4 घंटे के भीतर ही सभी महिलाओं की तबीयत अचानक एक जैसी कैसे बिगड़ गई? क्या यह अस्पताल प्रशासन की लापरवाही या फिर प्रसव के दौरान दी गई दवाओं की गलत डोज का नतीजा है?

इस सवाल पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर बुरी तरह झुंझला गए. उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि वे महिलाएं पहले से ही गंभीर हालत में अस्पताल आई थीं.

'क्या प्रसूता नाचती हुई आई थी?' 
सवालों के घेरे में आए मंत्री ने तकनीकी और मेडिकल जवाब देने के लिए मंच पर सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा को आगे किया. लेकिन डॉक्टर को आवाज लगाते समय मंत्री ने बेहद असंवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा, "प्रिंसिपल साहब कहां हैं? बताइए कैसी हालत में आयी थींं, दुरुस्त पैदल चलती नाचती आयी थीं या बीमार...''

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मंत्री के मुंह से एक गर्भवती और पीड़ित महिला के लिए 'नाचती हुई आई थीं' जैसे शब्दों को सुनकर हॉल में मौजूद मीडियाकर्मी बिफर गए. पत्रकारों ने तुरंत मंत्री को बीच में टोकते हुए कड़ा विरोध जताया और पूछा, "सर, नाचते हुए प्रेग्नेंट महिला कैसे आएगी? आप ऐसा स्टेटमेंट कैसे दे सकते हैं?" इसके बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया. देखें VIDEO:- 

डिहाइड्रेशन का तर्क
विवाद बढ़ता देख मंत्री और प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने मामले को संभालते हुए वैज्ञानिक कारण सामने रखने की कोशिश की. मंत्री खींवसर ने अपने बचाव में एक और अजीब तर्क देते हुए कहा, "आप स्ट्राइक रेट तो देखिए. अस्पताल में 1000 पेशेंट आते हैं, उसमें से 2 की डेथ हो जाती है, बाकी दुरुस्त होकर जाते हैं, वो आप लोग नहीं बोल रहे हो. भगवान से दुआ मांगो कि ये पांचों अभी जिंदा हैं."

48-50°C तापमान और डिहाइड्रेशन
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने साफ किया कि जब ग्रामीण इलाकों से महिलाएं 48°C से 50°C के भीषण गर्मी में आती हैं, तो वे बुरी तरह डिहाइड्रेटेड होती हैं. प्रेग्नेंसी के बाद 'पोस्टपार्टम हेमरेज' और भीषण गर्मी में पानी की कमी के चलते 'एक्यूट रेनल फेल्योर' (किडनी का अचानक काम बंद करना) होने के हजारों कारण होते हैं. गांव के लोग हाइड्रेशन का महत्व नहीं समझ पाते, जिससे यह जटिलता आई है और इसकी गहन जांच की जा रही है.

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104 एंबुलेंस सेवा बंद होने पर भी घिरी सरकार
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिरी पलों में पत्रकारों ने राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक और बड़ी खामी को उजागर किया. मीडिया ने मंत्री के सामने दावा किया कि पिछले 2 महीनों से पूरे राजस्थान में 104 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है, जो मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पतालों तक पहुंचाने का काम करती है. एंबुलेंस न मिलने के कारण भी महिलाएं समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रही हैं और उनकी हालत सीरियस हो रही है. इस सवाल पर भी मंत्री और प्रशासन पूरी तरह असहज नजर आए.

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