देश की सबसे बड़ी अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी. सबसे बड़े अस्पताल ने उसकी धीरे-धीरे सांसें कम की. फिर 24 अप्रैल को हरीश राणा की आंखें और दिल की धड़कनें बंद हो गई. लेकिन सिर्फ कुछ वक्त के लिए. अब हरीश की आंखें किसी और की अंधेरी ज़िंदगी में रोशनी ला चुकी हैं और हरीश का दिल किसी और के सीने में धड़क रहा है. हरीश कैसे मरकर भी ज़िंदा है? देखें वारदात.