पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद फिर से परिवर्तन की बयार बह रही है. पहले ममता बनर्जी ने वाम मोर्चा के करीब तीन दशक के शासन के खिलाफ परिवर्तन का नारा दिया था, फिर बीजेपी ने ममता बनर्जी की डेढ़ दशक की सरकार के खिलाफ - चुनाव नतीजे आने के बाद अब बंगाल में परिवर्तन के रुझान आने लगे हैं.
बंगाल में बीजेपी की शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में कहा था, 'बंगाल में बदला नहीं बदलाव की जीत है'. और बंगाल में धीरे धीरे बदलाव की झलक भी दिखाई देने लगी है. शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी की जीत के बाद राज्य सेक्रेटेरिएट में केंद्रीय फोर्स तैनात कर दी गई है, ताकि जो भी चीजें जहां हैं, सुरक्षित रहें.
बंगाल के पावर सेंटर में भी बदलाव के संकेत मिल गए हैं. आगे से, रायटर्स बिल्डिंग ही फिर से सत्ता का शक्ति केंद्र बनने जा रहा है. पहले चर्चा थी कि नए मुख्यमंत्री भी नबन्ना से कामकाज देख सकते हैं, और हो सकता है इमारत के सफेद और नीले रंग को भगवा से पेंट कर दिया जाए. लेकिन, अपडेट है कि नबन्ना का भी अब वही हाल होने जा रहा है जो ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद रायटर्स बिल्डिंग का हुआ था.
बंगाल में सचिवालय पर ममता VS बीजेपी
बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का कहना है, हमने 2021 में ही कहा था कि हमारी पार्टी के सत्ता में आते ही हम राइटर्स बिल्डिंग से सरकार चलाएंगे. समिक भट्टाचार्य ने कार्यवाहक मुख्य सचिव दुश्यंत नारियाला से नबन्ना में मुलाकात भी की है. बताते हैं कि मीटिंग में नई सरकार के गठन के बाद सचिवालय को वापस कोलकाता ले जाने पर बातचीत हुई. नबन्ना, असल में, हावड़ा के शिवपुर में है.
मुश्किल यह है कि रायटर्स बिल्डिंग अभी कामकाज के लायक नहीं है. लोक निर्माण विभाग के मुताबिक, रायटर्स बिल्डिंग की मुख्य इमारत के जीर्णोद्धार का केवल 25 फीसदी काम ही पूरा हुआ है. पूरे जीर्णोद्धार में कम से कम 6 से 8 महीने लग सकते हैं. सुरक्षा के हिसाब से मुख्यमंत्री और मंत्री फिलहाल रायटर्स बिल्डिंग में स्थायी रूप से नहीं बैठ सकेंगे.
रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी की तरफ से जो कार्यक्रम बना है, उसमें नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हो सकता है. शपथ के तुरंत बाद नए मुख्यमंत्री कोलकाता रायटर्स बिल्डिंग में जाकर अपना कामकाज संभालेंगे.
पश्चिम बंगाल के एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि नए मुख्यमंत्री के पश्चिम बंगाल विधानसभा के विस्तार भवन से काम करने की संभावना है. अधिकारी ने बताया, रायटर्स बिल्डिंग में काम पूरा होने से पहले, नए मुख्यमंत्री को विधानसभा के विस्तार भवन से अस्थायी रूप से काम करने देने का प्रस्ताव है. हालांकि, सब कुछ फाइनल होना बाकी है.
रायटर्स बिल्डिंग VS नबन्ना
1. वाम मोर्चा की सरकार (1977-2011) रायटर्स बिल्डिंग से ही संचालित होती थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेब भट्टाचार्य रायटर्स बिल्डिंग से ही सरकार चलाते थे. 34 साल की उस अवधि में रायटर्स बिल्डिंग को सिर्फ सचिवालय नहीं, बल्कि लेफ्ट का पावर सेंटर भी माना जाता था. बातचीत में अक्सर मिसाल दी जाती थी, 'अगर बंगाल की राजनीति समझनी हो, तो रायटर्स के गलियारों की हवा समझनी चाहिए'.
2. ममता बनर्जी 2011 में सत्ता संभालने के दो साल बाद 2013 में रायटर्स बिल्डिंग छोड़कर नबन्ना शिफ्ट हो गई थीं. ममता बनर्जी ने इमारत पुरानी होने के कारण सुरक्षा का हवाला दिया था, और मरम्मत होने तक अस्थायी तौर पर नबन्ना से काम करने की बात कही थी, लेकिन एक बार वहां गईं तो स्थायी व्यवस्था बन गई.
अगस्त, 2013 में ममता बनर्जी ने अपना सचिवालय शिफ्ट करने की घोषणा की थी. तब ममता बनर्जी का कहना था, 'रायटर्स बिल्डिंग असुरक्षित हो गई है. यह अब बारूद के ढेर में बदल गई है... मैं अपने कर्मचारियों की सुरक्षा चाहती हूं.'
3. ममता बनर्जी रायटर्स बिल्डिंग को लेफ्ट आइडियोलॉजी से जोड़कर देख रही थीं, और उससे दूरी बनाने के लिए नबन्ना को नया पावर सेंटर बना दिया था. अब बीजेपी नबन्ना को ममता बनर्जी का प्रतीक मानकर सारा सत्ता प्रतिष्ठान फिर से रायटर्स बिल्डिंग ले जाना चाहती है - मतलब, बीजेपी भी वही सब कर रही है जो ममता बनर्जी ने अपनी सरकार बनाने के बाद किया था.
ममता बनर्जी ने जिस अंदाज में लेफ्ट फ्रंट के शासन के खात्मे का मैसेज दिया था, बीजेपी अब उसी लहजे में ममता बनर्जी के शासन के अंत होने का संदेश देने की कोशिश कर रही है. वैसे भी, रायटर्स बिल्डिंग महज एक आम इमारत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम, क्रांति और बंगाल की सत्ता का प्रतीक है.
4. नबन्ना की इमारत कोई नए सिरे से नहीं बनाई गई थी. असल में, HRBC बिल्डिंग (Hooghly River Bridge Commissioners) को ही राज्य सचिवालय में तब्दील कर दिया गया था. लाल रंग की रायटर्स बिल्डिंग तीन मंजिला है, जबकि नीले और सफेद रंगों वाली नबन्ना में 14 फ्लोर हैं. लाल रंग वाम मोर्चा को सूट करता था, नीला और सफेद ममता बनर्जी को पसंद था - संभव है, बीजेपी शासन में रंग-रोगन के बाद इमारत भगवा नजर आए.
5. रायटर्स बिल्डिंग करीब 250 साल पुरानी इमारत है. ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे साल 1777 में बनवाया था, और डिजाइन किया था थॉमस लियोन ने. कहा जाता है कि यह बिल्डिंग शुरू में जूनियर क्लर्कों के लिए बनी थी, जिन्हें 'राइटर्स' कहा जाता था. और, रायटर्स बिल्डिंग नाम पड़ने के पीछे भी यही वजह मानी जाती है.
एक दिलचस्प कहानी भी है
8 दिसंबर, 1930 को बंगाल वॉलंटियर्स के तीन क्रांतिकारियों ने रायटर्स बिल्डिंग पर धावा बोल दिया. बिनॉय बसु, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता. यूरोपियन पोशाक पहनकर हाथों में लोडेड पिस्टल लिए तीनों बिल्डिंग में घुस गए. निशाने पर थे ब्रिटिश अफसर (आईजी पुलिस) कर्नल एन एस सिम्पसन. जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों से अत्याचार के लिए कुख्यात सिम्पसन से क्रांतिकारियों का गुस्सा आसमान पर था. बिल्डिंग में घुसते ही क्रांतिकारियों ने सिम्पसन को गोली मार दी.
सिम्पसन की हत्या के बाद पूरी बिल्डिंग में क्रांतिकारियों और पुलिस के बीच घंटों जोरदार झड़प हुई. कहते हैं, गिरफ्तारी से बचने के लिए बादल ने सायनाइड खा लिया, जबकि बिनॉय और दिनेश ने खुद को गोली मार ली. बिनॉय ने पांच दिन बाद ही अस्पताल में दम तोड़ दिया, लेकिन दिनेश को पकड़े जाने के बाद 7 जुलाई, 1931 को फांसी हुई.
रायटर्स बिल्डिंग के सामने बिनॉय, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता की आदमकद मूर्ति लगी हुई है. ग्रुप के लीडर बिनॉय को अपने टीम को लीड करते हुए दिखाया गया है. तीनों क्रांतिकारियों के नाम पर, उनके प्रथमाक्षरों को मिलाकर उस स्ट्रीट का नाम बीबीडी बाग रखा गया है - ये बंगाल के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे यादगार 'बैटल ऑफ रायटर्स बिल्डिंग' की स्मृतियों को संजोए हुए है.
कही सुनी बातों के जिक्र में रायटर्स बिल्डिंग को कोलकाता की हॉन्टेड बिल्डिंग में भी शुमार किया जाता है. ऐसे कुछ किस्से सुनाए जाते हैं जिसमें रायटर्स बिल्डिंग के लंबे गलियारों में रात के वक्त अजीब आवाजें सुनाई देने का दावा किया जाता है.
मीडियम साइट पर प्रकाशित एक ब्लॉग में लिखा है, 'एक गार्ड, मुंशीराम, ने दावा किया था कि उसने बंद पड़े एक कमरे से संगीत सुनी और पुराने जमाने के कपड़े पहने कुछ लोगों को देखा. उसकी चीख सुनकर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पहुंचे, लेकिन वहां अंधेरे में मुंशीराम अकेला मिला. एक अन्य नाइट गार्ड महबूब ने बताया कि उसने महंगे सूट पहने एक आदमी की लाश देखी थी. बेहद घबराए हुए गार्ड की चीख सुनकर दूसरे गार्ड दौड़े दौड़े पहुंचे, लेकिन अंधेरे गलियारे में महबूब अकेला ही मिला था. कहा जाता है कि आज भी इमारत के कुछ हिस्सों में जाने से सुरक्षा गार्ड कतराते हैं.'
लेफ्ट vs ममता विवाद
7 जनवरी, 1993 को ममता बनर्जी तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु से मिलने रायटर्स बिल्डिंग गई थीं. ममता बनर्जी के साथ एक मूक-बधिर बलात्कार पीड़िता भी थी. ममता बनर्जी ज्योति बसु के चेंबर के दरवाजे के सामने धरने पर बैठ गई्ं. ममता बनर्जी का आरोप था कि राजनीतिक संबंधों की वजह से आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है.
जब ज्योति बसु के आने का समय हुआ तो पुलिसवाले ममता बनर्जी से हट जाने को कहने लगे. काफी मान मनौव्वल के बाद भी जब ममता बनर्जी टस से मस नहीं हुईं, तो पुलिस वालों ने उनको घसीटते हुए सीढ़ियों से उतारा और पुलिस मुख्यालय लाल बाजार ले गए. गुत्थम गुत्थी के दौरान ममता बनर्जी के कपड़े भी फट गए.
ममता बनर्जी ने उसी दिन कसम खाई कि लेफ्ट शासन के खात्मे के बाद वो मुख्यमंत्री बनकर ही रायटर्स बिल्डिंग वापस जाएंगी. ममता बनर्जी ने पूरी निष्ठा के साथ कसम निभाई, और 18 साल बाद पूरा भी हुआ. आखिरकार, 20 मई, 2011 को बतौर मुख्यमंत्री ही ममता बनर्जी ने रायटर्स बिल्डिंग में दोबारा कदम रखा - लेकिन दो साल बाद ही 2013 में सचिवालय नबन्ना शिफ्ट कर लिया.
मृगांक शेखर