NCP के दोनों पक्षों के विलय का मामला भले ही होल्ड पर चला गया हो, लेकिन सुनेत्रा पवार के आसपास की राजनीतिक गतिविधियां नहीं थमी हैं. कुछ बातें तो सीनियर नेताओं के तात्कालिक फैसलों की बदौलत सामने आई हैं, लेकिन कई चीजें ऐसी भी हैं जिनका इंतजाम अजित पवार ने पहले से ही कर दिया है - जिला परिषद चुनावों के बाद वे चीजें भी धीरे धीरे सामने आ जाएंगी.
एक तस्वीर तो पहले ही साफ हो गई थी, और सुनेत्रा पवार उसके मुताबिक महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम बन भी गईं, लेकिन प्रफुल्ल पटेल के एनसीपी का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा अब खत्म हो चुकी है. अब सुनेत्रा पवार को ही सारा पावर देने की तैयारी चल रही है.
आगे जो कुछ भी होने वाला है, आने वाले दिनों में ये सब सुनेत्रा पवार ही सुपर पावर बनती नजर आ रही हैं - ज्यादा क्रेडिट तो अजित पवार को ही जाता है, थोड़ा बहुत सुनेत्रा पवार के साथी सीनियर नेताओं और बीजेपी को श्रेय दिया जा सकता है.
सुनेत्रा पवार का सुपर पावर बनना
महाराष्ट्र की राजनीति में पवार का पावर लंबे समय तक देखा जा चुका है. खत्म तो अब भी नहीं हुआ है, लेकिन अब वो बात नहीं रही. क्योंकि, अब सुनेत्रा पवार ही बारामती से मुंबई तक सुपर पावर बनने जा रही हैं. और, ये इंतजाम अजित पवार पहले से ही कर चुके हैं. हां, एक ही कंडीशन है, ये सब बीजेपी को भी मंजूर हो.
महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को एनसीपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. महाराष्ट्र में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव 5 फरवरी को होंगे. मतगणना 7 फरवरी को होगी - और उसके बाद ही एनसीपी (अजित पवार) की कार्यसमिति की मीटिंग बुलाई जाएगी. बताते हैं, बैठक में एनसीपी के अगले अध्यक्ष के तौर पर सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा जाएगा, और मंजूरी मिलते ही वो औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लेंगी.
हाल फिलहाल एनसीपी के अंदर ताबड़तोड़ फैसले ले रहे सीनियर नेताओं ने भविष्य की रणनीति तय करने के लिए हुई बैठकों में सुनेत्रा पवार को नेतृत्व सौंपे जाने के मुद्दे पर सहमति बना ली है. इस बीच, महाराष्ट्र भर के पार्टी पदाधिकारियों और करीब 30 विधायकों ने लिखित तौर पर सुनेत्रा पवार के नाम का समर्थन कर दिया है. ऐसे नेताओं का मानना है कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत और उनकी विचारधारा को बेहतर तरीके से सुनेत्रा पवार ही आगे ले जा सकती हैं.
ताजातरीन रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल मौजूदा रूप में ही अपनी सेवाएं आगे भी जारी रखेंगे. पहले चर्चा थी कि प्रफुल्ल पटेल को ही एनसीपी का अध्यक्ष बनाया जाएगा. और, प्रफुल्ल पटेल की ही तरह मौजूदा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे आगे भी इसी भूमिका में काम करते रहेंगे. सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष बन जाने के बाद कुछ और पदाधिकारियों के नाम भी तय किए जा चुके हैं. मसलन, वाईपी त्रिवेदी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, एसआर कोहली राष्ट्रीय महासचिव और प्रशासन प्रमुख और बृजमोहन श्रीवास्तव राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे. सुबोध मोहिते राष्ट्रीय महासचिव और सैयद जलालुद्दीन अल्पसंख्यक मामलों के अध्यक्ष बने रहेंगे.
अंदरूनी संगठनात्मक गतिविधियों के चलते शरद पवार वाले गुट के साथ एनसीपी के विलय का मामला टल गया है. पहले सुनेत्रा पवार को औपचारिक पावर सेंटर बनाने के बाद ही बाकी फैसले लिए जाएंगे, ऐसा मोर्चा संभाल रहे नेताओं का मानना है.
अगर कभी NCP का विलय हुआ, तो...
आजतक संवाददाता ऋत्विक भालेकर की रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपी का विलय होने पर कुछ चीजें पहले ही तय कर दी गई थीं. ये सब शरद पवार और अजित पवार के प्रतिनिधियों की कई मुलाकातों में व्यापक विमर्श के बाद फाइनल हुआ था. अजीत पवार ने खुद प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल सहित बाकी सीनियर नेताओं प्रस्तावित प्लान को लेकर आम सहमति बनाने की जिम्मेदारी ली थी.
1. अजीत पवार को ही एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद दिया जाना था, जिसे हर फैसले पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार हो.
2. महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष का पद शरद पवार वाले गुट के किसी नेता को देने का प्रस्ताव था. हालांकि, इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई थी.
3. महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में दो कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री पद का शरद पवार गुट को दिए जाने का प्रस्ताव था. और उसके लिए जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे और रोहित पवार को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था.
4. केंद्र सरकार में भी एक मंत्री पद की मांग प्रस्तावित थी, जो शरद पवार गुट के हिस्से में हो सकती थी. बीच बीच में ये खबर तो आई ही है कि शरद पवार केंद्र में बारामती सांसद सुप्रिया सुले के लिए एक मंत्री पद चाहते हैं.
एनसीपी के अंदर की बात और है, बाहर तो बीजेपी भी है
सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर तकरीबन सभी राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया एक जैसी थी. यह उनका आंतरिक मामला है. कहा तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ऐसा ही था, लेकिन एनसीपी नेताओं की मुलाकात की बात भी बताई थी.
लेकिन एनसीपी के विलय हो जाने की सूरत में बीजेपी के साथ मोलभाव का मामला आसान नहीं था. शरद पवार गुट के पास 8 सांसद और 10 विधायक होने के बावजूद केंद्रीय मंत्रिमंडल पर दावेदारी पर पेच फंस गया. महाराष्ट्र बीजेपी ने यह मामला प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया था.
बात एक मोड़ पर अटकी तो अटकी ही रह गई. क्योंकि, आपसी तौर पर सब कुछ तय होने के बाद की चीजें गठबंधन की शर्तों और बीजेपी के रुख पर निर्भर करती हैं - और स्पष्ट स्थिति की संभावना तभी बन सकती है जब सुनेत्रा पवार सुपर पावर के रूप में सामने आती हैं.
मृगांक शेखर