पंजाब में हर राजनीतिक दल नशे के खिलाफ है. कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में नशा मुक्ति के लिए प्रयासरत भी है. काम अच्छा हो रहा है, बुरा बस ये है कि अलग अलग स्तर पर हो रहा है. और, उसमें भी हर कोई एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है. अपना काम सबसे अच्छा होने का दावा कर रहा है - जो राजनीति राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के 'युद्ध नशियां विरुद्ध' मुहिम में देखी गई, मुख्यमंत्री भगवंत मान के मोगा में हुए कार्यक्रम में भी बिल्कुल वैसा ही देखने सुनने को मिला है.
राज्य सरकार की तरफ से नशा मुक्ति अभियान के तहत एक गांव में कार्यक्रम हुआ है, जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के साथ साथ पंजाब के डीजीपी गौरव यादव और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा भी शामिल हुए, और मंच से लोगों को संबोधित भी किया - विपक्षी दलों को इसी बात पर आपत्ति है, और सवाल उठा रहे हैं कि ये सरकारी कार्यक्रम था या आम आदमी पार्टी की राजनीतिक रैली?
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी और कांग्रेस पर पंजाब को नशे में डुबोने का आरोप लगाया है - और, लगे हाथ आगाह भी किया कि गलती से भी ऐसे राजनीतिक दलों को वोट न दें, वरना पंजाब फिर से नशे के दलदल में डूब जाएगा.
गांव में प्रोग्राम, नजर विधानसभा चुनाव पर
मौका था मोगा के किल्ली चहलां गांव में विलेज डिफेंस कमेटी के शपथग्रहण का. गांवों में लोगों के बीच जागरुकता फैलाने और ड्रग तस्करों के बारे में सरकार को सूचना देने के मकसद से पंजाब सरकार ने विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई हैं. ड्रग तस्करों के बारे में मिलने वाली सूचनाएं गोपनीय रखी जाती हैं. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने समारोह में मौजूद लोगों को नशा‑मुक्त पंजाब की शपथ भी दिलाई.
मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने डीजीपी, मुख्य सचिव और नेता अरविंद केजरीवाल के साथ मंच पर मौजूद थे. मंच से नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश तो दिया ही गया, लोगों को आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में सोच विचारकर ही वोट देने की अपील भी की गई, और चेताया गया, वरना लेने के देने पड़ सकते हैं.
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कार्यक्रम में शिरकत कर रहे लोगों से कहा, पंजाब पुलिस ने महज साल भर में 2000 किलो से अधिक हेरोइन बरामद की है. सरहद से लगा सूबा होने के नाते पंजाब ही नशे के खिलाफ देश की लड़ाई लड़ रहा है. डीजीपी के मुताबिक, NDPS से जुड़े मामलों में सजा दिलाए जाने की दर पंजाब में 90 फीसदी है, और यह सबसे ज्यादा सजा वाले मामलों में से एक है.
मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने बताया, पंजाब में नशा एक बीमारी की तरह शुरू हुआ... हमने युद्ध शुरू किया है, हमें जानकारी दें और तुरंत कार्रवाई की जाएगी... किसी भी राज्य के लिए सख्त कार्रवाई करने में राजनीतिक इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है, और पूरे नेतृत्व का एक साथ मंच पर होना दिखाता है कि यह सौ फीसदी है.
तबीयत खराब होने के बावजूद समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारें तस्करों के साथ मिली हुई थीं, और ड्रग्स सरकारी गाड़ियों में सप्लाई होता था. बोले, हमने न केवल सप्लाई चेन तोड़ी है, बल्कि 63 हजार सरकारी नौकरियां देकर युवाओं को नशे के बजाय रोजगार की तरफ मोड़ा है.
अरविंद केजरीवाल का कहना था, पंजाब के इतिहास में पहली बार ऐसी सरकार आई है जो तस्करों को जेल भेज रही है, और उनके आलीशान बंगलों पर बुलडोजर चला रही है. अरविंद केजरीवाल ने बताया कि 1 मार्च, 2025 को शुरू हुए ‘युद्ध नशियां विरुद्ध' अभियान के बाद, एक साल में 2,000 किलोग्राम से अधिक ड्रग्स पकड़ा गया. बड़े तस्करों को जेल भेजा गया, और कई बंगलों पर बुलडोजर चलाए गए. शुरुआती अविश्वास के बाद अब लोगों का भरोसा बढ़ा है और वे निडर होकर पुलिस‑प्रशासन की मदद कर रहे हैं.
और, फिर मुद्दे पर आकर बोले, अकाली दल, बीजेपी और कांग्रेस ने दशकों तक पंजाब की जवानी को नशे की आग में झोंका है. अरविंद केजरीवाल ने जनता को अपनी तरफ से आगाह करते हुए कहा कि अगर गलती से भी इन पार्टियों को वोट दिया, तो पंजाब दोबारा नशे के दलदल में डूब जाएगा.
सरकारी इवेंट या राजनीतिक रैली?
बीजेपी ने समारोह में अरविंद केजरीवाल और नौकरशाहों की मौजूदगी पर सवाल उठाया है. पंजाब बीजेपी के महासचिव अनिल सरीन का सवाल है, सबसे पहले मैं पूछना चाहता हूं... अगर कार्यक्रम पंजाब सरकार का था, तो अरविंद केजरीवाल की क्या भूमिका है? अरविंद केजरीवाल को पंजाब के लोगों को स्पष्ट करना चाहिए... क्या वह पंजाब के डि-फैक्टो मुख्यमंत्री हैं?
अनिल सरीन कहते हैं, वह आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं, लेकिन वह सरकार के आधिकारिक कार्यक्रमों में क्या कर रहे हैं? मोगा कार्यक्रम में केजरीवाल किस हैसियत से भाग ले रहे हैं, उन्हें इसका जवाब देना चाहिए.
और वैसे ही पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया फोरम X पर पोस्ट किया है, AAP की रैली में मुख्य सचिव और DGP को देखकर कोई सोचता है कि क्या भारत के ‘स्टील फ्रेम’ नौकरशाह अब राजनीतिक इच्छाओं के आगे झुक रहे हैं? क्या यह अखिल भारतीय सेवा नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है? AAP सरकार नौकरशाही का राजनीतिकरण कर रही है... लोकतंत्र में नौकरशाही से निष्पक्ष काम करने की उम्मीद की जाती है, लेकिन लगता है कि नौकरशाह अब आम आदमी पार्टी के आगे समर्पण कर चुके हैं.
एक 'राजनीतिक' युद्ध, नशे के विरुद्ध
हफ्ता भर पहले ही, 9 फरवरी को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने तरनतारन से अबोहर तक नशे के खिलाफ यात्रा की थी. यात्रा के दौरान जगह जगह मार्च और पदयात्रा हुई थी. राज्यपाल की यात्रा में शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के नेता भी शामिल हुए थे, लेकिन पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बहिष्कार किया था - नशा मुक्ति अभियान को लेकर एक बार फिर बयानबाजी हो रही है, फर्क बस यह है कि आक्रमण अब दूसरी छोर से हो रहा है.
अरविंद केजरीवाल के निशाने पर आए अकाली दल ने पंजाब के राज्यपाल और चुनाव आयोग से गुजारिश की है कि जिस तरीके से आम आदमी पार्टी की रैली आयोजित करने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल हुआ, उस पर ध्यान दिया जाए.
SAD के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री डॉ दलजीत सिंह चीमा की राज्यपाल और चुनाव आयोग से मांग है, मोगा रैली में सरकारी धन के दुरुपयोग का संज्ञान लें, और पूरी राशि आम आदमी पार्टी से वसूली जाए. दलजीत सिंह चीमा का कहना है, रैली का पूरा खर्च सरकार ने उठाया और लोगों को रैली तक लाने के लिए सरकारी बसों का इस्तेमाल किया गया... अरविंद केजरीवाल के पास पंजाब सरकार में कोई पद नहीं है... जिस तरीके से डीजीपी और मुख्य सचिव को राजनीतिक रैली संबोधित करने के लिए मजबूर किया गया, वह बेहद निंदनीय है. कल आम आदमी पार्टी की सरकार जिला स्तर के अधिकारियों को राजनीतिक रैलियों को संबोधित करने और पार्टी का हिस्सा बनने के लिए मजबूर करेगी.
जिस तरह अकाली दल अरविंद केजरीवाल के कार्यक्रम को लेकर आक्रामक है, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की यात्रा पर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी वैसे ही तीखा हमला बोला था. राज्यपाल की यात्रा में शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी नेताओं की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए राजा वड़िंग ने पूछा था, क्या नशे के खिलाफ यह मार्च वास्तव में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 'समझौता एक्सप्रेस' चलाने और नए SAD-बीजेपी गठबंधन की जमीन तैयार करने की कोशिश है, जो 2020-21 के किसान के आंदोलन के दौरान टूट गया था?
मृगांक शेखर