अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के गार्ड्स पर 'ईयर-ब्लीड' सोनिक वेव्स (कान से खून बहाने वाली ध्वनि तरंगों) का इस्तेमाल किया गया. RT.com के मुताबिक एकयूएसएफ (यूएस एयर फोर्स) पायलट ने खुलासा किया कि C-130 विमान से 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स'का उपयोग हुआ, जिससे गार्ड्स उल्टी करने के बाद लकवाग्रस्त हो गए. अगर यह सच है तो क्या सोनिक हथियार भविष्य के युद्ध का हिस्सा हैं? और दुनिया में कौन-कौन से नए हथियार बन रहे हैं जो जंग के मायने बदल सकते हैं?
क्या है सोनिक वेपन और 'ईयर-ब्लीड' सोनिक वेव्स?
सोनिक वेपन ध्वनि तरंगों पर बेस्ड हथियार हैं, जो दुश्मन को बिना गोली चलाए नुकसान पहुंचाते हैं. ये हाई-फ्रीक्वेंसी या लो-फ्रीक्वेंसी ध्वनियां पैदा करते हैं, जो कान दर्द, सिरदर्द, चक्कर, उल्टी या यहां तक कि कान से खून बहाने का कारण बन सकती हैं. 'ईयर-ब्लीड' सोनिक वेव्स यह बहुत तेज ध्वनि तरंगें हैं जो कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
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उदाहरण... अमेरिका की सेना LRAD (लॉन्ग रेंज एकॉस्टिक डिवाइस) इस्तेमाल करती है, जो 150 डेसिबल तक की ध्वनि पैदा कर दुश्मन को भगाती है. सामान्य बातचीत 60 डेसिबल होती है, जबकि 140 से ऊपर कान को नुकसान होता है. C-130 विमान पर लगे डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स इसी तरह की तकनीक हैं – ये ध्वनि या माइक्रोवेव तरंगें निर्देशित कर लक्ष्य पर हमला करते हैं.
मादुरो मामले में... 2025 में मादुरो के सैनिकों पर अमेरिका ने यह हथियार आजमाया. गार्ड्स बीमार पड़े, लकवाग्रस्त हुए. हवाना सिंड्रोम (क्यूबा में अमेरिकी राजनयिकों पर कथित सोनिक हमला) जैसा है, जहां रूस या चीन को दोष दिया गया, लेकिन पुष्टि नहीं हुई. अमेरिका ऐसी तकनीक टेस्ट कर रहा है, लेकिन खुले में इस्तेमाल से अंतरराष्ट्रीय कानून टूटेगा.
क्या यह फ्यूचर वेपन है?
हां, सोनिक वेपन 'नॉन-लीथल' (गैर-मारक) हथियारों का हिस्सा हैं, जो भविष्य के युद्धों में महत्वपूर्ण होंगे. ये बिना खून बहाए दुश्मन को रोकते हैं – जैसे भीड़ नियंत्रण या गुप्त ऑपरेशन में. अमेरिका का पेंटागन Active Denial System (ADS) विकसित कर रहा है, जो माइक्रोवेव से त्वचा जलाती है, लेकिन सोनिक वर्जन भी हैं.
लेकिन खतरे... लंबे समय में सुनने की क्षमता खोना, मस्तिष्क क्षति या मौत भी हो सकती है. यह फ्यूचर वेपन है, लेकिन नैतिक रूप से गलत है. युद्ध में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर सकता है. संयुक्त राष्ट्र को ऐसे हथियारों पर बैन लगाना चाहिए, वरना आम लोग शिकार बनेंगे.
इसके अलावा दुनिया में कौन-कौन से फ्यूचर वेपन बन रहे हैं?
दुनिया की सेनाएं हथियारों में AI, लेजर और हाइपरसोनिक तकनीक ला रही हैं. यहां मुख्य उदाहरण...
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अमेरिका में...
डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (DEW): लेजर हथियार जो ड्रोन या मिसाइलों को जला देते हैं. US नेवी का LaWS (Laser Weapon System) जहाजों पर लगा है.
हाइपरसोनिक मिसाइल्स: 6000 km/hr से ज्यादा स्पीड वाली, जैसे AGM-183 ARRW. रूस या चीन से मुकाबला करने के लिए.
AI ड्रोन स्वॉर्म्स: हजारों छोटे ड्रोन जो खुद फैसले लेते हैं. DARPA का Gremlins प्रोजेक्ट.
साइबर वेपन्स: Stuxnet जैसा वायरस जो दुश्मन के कंप्यूटर सिस्टम को हैक करता है.
दुनिया में...
चीन: DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल, जो रडार से बचती है. J-20 स्टेल्थ फाइटर और AI रोबोट सैनिक.
रूस: Avangard हाइपरसोनिक ग्लाइडर, जो न्यूक्लियर वारहेड ले जाता है. Poseidon ड्रोन टॉरपीडो, जो समुद्र से हमला करता है.
इजरायल: Iron Dome का अपग्रेड, जो AI से मिसाइलों को ट्रैक करता है. Rafael का Spike मिसाइल.
भारत: BrahMos-II हाइपरसोनिक मिसाइल और स्वदेशी लेजर हथियार.
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क्या ये हथियार युद्ध के मायने बदल देंगे?
हां, पूरी तरह! पारंपरिक युद्ध (टैंक, बंदूक) से अब युद्ध साइबर, ड्रोन, एनर्जी वेपन्स की तरफ शिफ्ट हो रहा है.
फायदे: कम मौतें, सटीक हमले (जैसे AI ड्रोन सिर्फ दुश्मन को टारगेट करेंगे). दूर से युद्ध – सैनिक सुरक्षित रहेंगे.
खतरे: हथियारों की दौड़ बढ़ेगी. AI गलती कर सकता है (जैसे गलत लक्ष्य पर हमला). साइबर हमले से बिजली, पानी, बैंक सिस्टम ठप हो सकते हैं. न्यूक्लियर खतरा बढ़ेगा.
भविष्य के युद्ध छोटे, तेज और गुप्त होंगे – जैसे यूक्रेन में ड्रोन युद्ध. लेकिन इससे अमीर देश (अमेरिका, चीन) ज्यादा मजबूत होंगे, गरीब देश कमजोर. ये हथियार शांति के बजाय तनाव बढ़ाएंगे. दुनिया को हथियार नियंत्रण संधियों (जैसे न्यूक्लियर ट्रीटी) की जरूरत है. अगर नहीं, तो युद्ध 'साइलेंट' लेकिन घातक हो जाएगा – जहां सोनिक वेव्स जैसी चीजें आम होंगी.
ऋचीक मिश्रा