बीजेपी के लिए वोट जुटाने में कुछ यूं लगी है चुनाव मशीन

मिशन 2024 के लिए कनाडा, पाकिस्तान, मंदिर और महिला बिल बीजेपी के मिक्स्ड वेज के मसाले साबित होने वाले हैं. केंद्रीय नेताओं को विधानसभा चुनावों में उतार कर लोगों के बीच पैठ बनाये रखने की कोशिश है - और उनकी जगह नये चेहरे लाये जाने हैं. मध्य प्रदेश और राजस्थान ऐसे प्रयोगों की नर्सरी बन रहे हैं.

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आत्मविश्वास तो इंडिया शाइनिंग वाला ही है, लेकिन बीजेपी का ज्यादा जोर बूथ जीतने पर है आत्मविश्वास तो इंडिया शाइनिंग वाला ही है, लेकिन बीजेपी का ज्यादा जोर बूथ जीतने पर है

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:34 PM IST

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची आ जाने के बाद बहुत सारी चीजें साफ होती जा रही हैं. ये भी समझ लेना चाहिये कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का मामला भी महिला आरक्षण से पहले लागू नहीं होने वाला है. 

मध्य प्रदेश के बाद जल्द ही राजस्थान विधानसभा के लिए बीजेपी की पहली लिस्ट आने वाली है. खबर है कि राजस्थान चुनाव को लेकर बनी बीजेपी की स्क्रीनिंग कमेटी बीजेपी की सूची को अंतिम रूप देने के करीब है. 

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विधानसभा चुनाव 2024 की प्रयोगशाला बनेंगे

एक बात और साफ हो चुकी है कि बीजेपी नेतृत्व राज्य विधानसभा चुनावों को 2024 के आम चुनाव के लिए प्रयोगशाला मान कर चल रहा है. जैसे फिल्म शोले में ठाकुर बलदेव सिंह नये मिशन के लिए जय और वीरू को आजमाये थे, बीजेपी नेतृत्व भी भी जानना और समझना चाहता है कि पार्टी के भरोसेमंद नेताओं के दमखम में कहीं जंग तो नहीं लग गयी है. 

मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए उम्मीदवार बनाये गये बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की बातों से तो लगता है कि बीजेपी ने जो कदम उठाया है, बड़े काम का है. अब तो ये भी बताया जा रहा है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची मध्य प्रदेश जैसी ही होगी. 

हाल फिलहाल जो समझ में आ रहा है, ऐसा लगता है जैसे बीजेपी नेताओं के भाषण में भले ही इंडिया शाइनिंग वाले भाव की झलक मिलती हो, लेकिन मौजूदा बीजेपी नेतृत्व वाजपेयी काल की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने के बिलकुल खिलाफ है. 

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बीजेपी नेता अमित शाह का बूथ मैनेजमेंट पर तो शुरू से ही जोर रहा है, इस बार कुछ ज्यादा ही जोर लगता है. 2019 के चुनाव की याद करें तो अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से बीजेपी कार्यकर्ताओं के संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बूथ जीतने की ही सलाह दी थी. बूथ जीत लिये, समझो जग जीत लिये. 

केंद्रीय नेताओं को ग्राउंड पर तैनात करने के पीछे भी मकसद बूथ मजबूत करने का ही है, मकसद बूथ जीतने का ही है. बूथ जीत लिये तो 2024 की जंग भी जीत ही लेंगे, असल में बीजेपी आलाकमान का पन्ना प्रमुखों के लिए फिर से यही मैसेज है - लेकिन इस बार जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी रहेगी. 

बस ये समझ लीजिये कि कैलाश विजयवर्गीय जैसे बड़े नेताओं को दिल्ली से बूथों की निगरानी के लिए ही भेजा गया है - क्योंकि दिल्ली के लिए अब नये तेज तर्रार और जोश से भरपूर फ्रेश युवा चेहरों की जरूरत है. 

जिस रास्ते में कैलाश विजयवर्गीय की तरह मध्य प्रदेश के सात सांसदों को चलने को कहा गया है, राजस्थान में भी ठीक वैसा ही होने वाला है. अब तो जिन नामों की चर्चा है उनमें एक नाम केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का भी चल रहा है, जिन्होंने संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया था. 

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संसद के बाद अब अर्जुन राम मेघवाल को भी सड़क की जिम्मेदारी दी जा सकती है. ताकि वो लोगों के बीच जायें और समझायें कि कैसे 27 साल से लटके पड़े महिला आरक्षण बिल को मोदी सरकार ने संसद से एक झटके में पास करा दिया. और जैसे यूपी चुनाव में अमित शाह लोगों को समझाते थे कि नरेंद्र मोदी को 2024 में फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार बनवाइये, अर्जुन राम मेघवाल जैसे नेताओं को भी अपने अपने इलाके में लोगों को वैसे ही समझाना है. 

राजस्थान के लिए विधानसभा उम्मीदवारों की संभावित सूची में अर्जुन राम मेघवाल के साथ साथ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अलावा राज्यवर्धन राठौड़ और दीया कुमारी जैसे सांसदों के नाम भी हो सकते हैं. प्रधानमंत्री के हाल के राजस्थान दौरे में जिस तरीके से दीया कुमारी को सक्रिय देखा गया, ऐसा लगता है उन्हें और भी जिम्मेदारी मिलने वाली है.

अब ये तो समझ ही लेना चाहिये की केंद्रीय नेताओं को विधानसभा चुनावों में उतार कर लोगों के बीच पैठ बनाये रखने की बीजेपी की कोशिश तो है ही - उनकी जगह नये चेहरे लाकर सत्ता विरोधी लहर को काउंटर करने की कवायद लगती है. मध्य प्रदेश और राजस्थान ऐसे ही प्रयोगों की नर्सरी बन रहे हैं.

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ग्रामीण संवाद यात्रा वोट पाने की मशीन ही लगती है

बीजेपी नेतृत्व को एक बात अच्छी तरह समझ में आ चुकी है कि 2024 में न तो राम मंदिर बनने से वोट मिलने वाला है, न ही महिला बिल पास कराने की क्रेडिट लेने से - इसलिए वो मोदी सरकार के कामकाज को प्रचारित करने की कार्ययोजना पर काम कर रही है. ये कार्ययोजना भी जमीनी स्तर पर और हर वोटर तक पहुंचने के हिसाब से तैयार की गयी है.

रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी जो 'ग्रामीण संवाद यात्रा' शुरू करने जा रही है, वो प्रोग्राम तो संपर्क फॉर समर्थन जैसा ही है, लेकिन ये ऊपर ऊपर या समाज में प्रभाव रखने वालों तक सीमित नहीं है. बल्कि, इस यात्रा में गांव गांव और घर घर तक संपर्क करने का कार्यक्रम बनाया गया है. 

ग्रामीण संवाद यात्रा के लिए विशेष रथ बनाये गये हैं जिस पर सवार होकर केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत मिल सके ये सुनिश्चित करना है. रथ पर सवार होकर बीजेपी नेता लोगों के बीच पहुंच कर सरकार की योजनाओं का फायदा तो समझाएंगे ही, लोगों की समस्याएं भी सुलझाने की कोशिश रहेगी. ये रथ अगले महीने रवाना किये जा सकते हैं और ये यात्रा करीब दो महीने तक चल सकती है. 

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जीपीएस और ड्रोन से लैस करीब 1500 रथों पर नेताओं के अलावा सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी सवार होंगे. और साथ में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी भी जो प्रधानमंत्री किसान, मुद्रा योजाना, जन धन योजना, आवास योजना और विश्वकर्मा योजना से जुड़े हैं. सरकारी टीम ऐसी योजनाओं के उन लाभार्थियों की भी मदद की कोशिश करेंगे जो किसी कारण अब तक छूटे हुए हैं - और किसी की कोई शिकायत या समस्या है तो मौके पर निबटाने की भी कोशिश होगी. हर रथ के जरिये कोशिश होगी कि हर रोज कम से कम तीन ग्राम पंचायत को कवर किया जा सके. 

प्रचार का परंपरागत तरीका और पुराना एजेंडा तो रहेगा ही

आने वाली आम चुनाव में कनाडा, पाकिस्तान, राम मंदिर और महिला बिल मिक्स्ड वेज के मसालों की तरह इस्तेमाल किये जाएंगे, इसलिए बीजेपी उन चीजों पर फोकस कर रही है जो पार्टी के लिए वोट सुनिश्चित कर सकें.

राम मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख तो आ ही चुकी है, मान कर चलना होगा कि 2024 में 2029 की तरह मंदिर मुद्दे से परहेज नहीं किया जाना है. जिस तरह से प्रधानमंत्री की जयपुर रैली में महिलाओं को ही कर्ताधर्ता बनाया गया था, आगे भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम की थीम पर कार्यक्रम होंगे ही.

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पुलवामा आतंकवादी हमले के चलते 2019 के चुनाव में ट्रेंडिंग कीवर्ड पाकिस्तान था, मुमकिन है 2024 में पाकिस्तान की जगह कनाडा ले ले. 

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