मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक को हाईकोर्ट (MP High Court) ने निलंबित करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने पुलिस महानिदेशक को दिए आदेश में कहा कि वह छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करें.
युगलपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक (SP) ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को लिखे गए पत्र में जमानती वारंट तामील नहीं होने का कारण स्थानातंरण होना बताया है. ऐसा प्रतीक होता है कि हमारे आदेश को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, पालन नहीं किया जा रहा है. युगलपीठ ने सुनवाई के बाद पुलिस महानिदेशक को ये आदेश दिए.
कोर्ट का कहना है कि एकमात्र कारण बताया गया है कि प्रतिवादी संख्या 3 का तबादला कर दिया गया है. उनका तबादला कहां हुआ और गैर जमानती वारंट क्यों नहीं हो सका, यह नहीं बताया गया है. यह स्वीकार्य नहीं है. इस बारे में सरकारी अधिवक्ता को भी कोई जानकारी नहीं है.
कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए कि अगले आदेशों तक छिंदवाड़ा एसपी को तत्काल निलंबित किया जाए. न्यायालय ने निर्णय लिया कि जब छिंदवाड़ा एसपी खुद इस न्यायालय के आदेश का पालन करने में असमर्थ हैं तो पुलिस महानिदेशक के माध्यम से गैर-जमानती वारंट तामील कराया जाए.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, एनएचएआई (NHAI) ने मंदिर की 1254 वर्गफीट भूमि का अधिग्रहण किया था, लेकिन इसका मुआवजा नहीं दिया था. इस मामले में छिंदवाड़ा स्थित तुलसी नारायण संकीर्तन मंडल की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इसी मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद मुआवजा दिए जाने के निर्देश दिए थे. इस पर सिर्फ 636 वर्ग फीट का मुआवजा दिया गया था. इसके बाद हाईकोर्ट ने अगस्त 2018 में बाकी जमीन का मुआवजा देने के निर्देश देकर याचिका का निराकरण कर दिया था.
कोर्ट के आदेश के बाद भी एनएचएआई ने नहीं दी थी मुआवजा राशि
कोर्ट के आदेश के बाद भी एनएचएआई ने मुआवजा राशि नहीं दी. इसी मामले में अवमानना याचिका दायर की गई थी. इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की युगलपीठ ने एनएचएआई के अधिकारी अनिल कुमार के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए छिंदवाड़ा एसपी को तामीली के निर्देश दिए थे, लेकिन जमानती वारंट तामील नहीं हो पाया. इसको लेकर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी को निलंबित करने के आदेश दिए हैं.
पवन शर्मा