'पेशाब टपकने की बीमारी हो तो नमाज नहीं पढ़ाएं शहर काजी...', प्रोस्टेट बीमारी को लेकर फतवा जारी, ईद की नमाज से पहले विवाद

Bhopal Fatwa Controversy: भोपाल में ईद के त्यौहार से ठीक पहले शहर काजी की इमामत को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. 'दारुल इफ्ता' द्वारा जारी एक फतवे ने मुस्लिम समुदाय को दो पक्षों में बांट दिया है, जिससे एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार ताजुल मसाजिद में ईद की नमाज कौन पढ़ाएगा, इसे लेकर संशय की स्थिति बन गई है.

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फतवे को लेकर भोपाल में दो पक्षों में बंटा मुस्लिम समुदाय.(Photo:ITG) फतवे को लेकर भोपाल में दो पक्षों में बंटा मुस्लिम समुदाय.(Photo:ITG)

धर्मेंद्र साहू

  • भोपाल,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ईद-उल-फितर से महज कुछ दिन पहले एक नई बहस और विवाद ने जन्म ले लिया है. जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी के दारुल इफ्ता की ओर से जारी एक फतवे में कहा गया है कि प्रोस्टेट (पेशाब संबंधी) बीमारी से ग्रसित व्यक्ति इमामत यानी नमाज का नेतृत्व नहीं कर सकता.

9 मार्च 2026 को नायब मुफ्ती सैयद अहमद खान काश्मी की ओर से जारी इस फतवे में शरई नियमों का हवाला देते हुए लिखा गया है, ''यदि किसी को पेशाब टपकने जैसी बीमारी है, तो वह खुद नमाज पढ़ सकता है लेकिन दूसरों को नमाज नहीं पढ़ा सकता. हालांकि, इस फतवे में सीधे तौर पर शहर काजी का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन समय और हालात को देखते हुए इसे शहर काजी के खिलाफ माना जा रहा है.''

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साजिश का आरोप और भारी विरोध
इस फतवे के वायरल होते ही ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने कड़ा रुख अपनाया है. कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन बल्ली ने इसे एक गहरा षड्यंत्र करार दिया है. उन्होंने कहा, "ईद की नमाज में केवल 5 दिन बचे हैं. हमारे शहर काजी को हटाने के लिए यह षड्यंत्र रचा जा रहा है. मुफ्ती कौन होते हैं जो इस तरह का फतवा जारी करें? हम इसके खिलाफ शाहजानाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराएंगे."

दो धड़ों में बंटा समुदाय
इस विवाद के कारण मुस्लिम समुदाय में भारी संशय है. एक पक्ष का कहना है कि फतवा केवल शरई नियमों की स्पष्टता के लिए है और किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं है. वहीं दूसरा पक्ष इसे शहर काजी की छवि धूमिल करने और उन्हें पद से हटाने की कोशिश मान रहा है.

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ताजुल मसाजिद में कौन पढ़ाएगा नमाज?
भोपाल की ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में लाखों लोग ईद की नमाज अदा करते हैं. इस विवाद के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यदि शहर काजी नमाज नहीं पढ़ाते हैं, तो उनकी जगह इमामत कौन करेगा? स्थिति को देखते हुए तमाम मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों की बैठक बुलाई गई है ताकि इस्लाम के नियमों के तहत सर्वसम्मति से निर्णय लिया जा सके.

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