'हम बड़े संस्कारी हैं, बिहार के लोगों को ऐसे ही होना चाहिए', साहित्य आजतक में बोले मनोज तिवारी

देश की राजधानी दिल्ली में साहित्य आजतक 2025 का आज यानी कि रविवार को आखिरी दिन है. रविवार को इसमें मनोज तिवारी भी शामिल हुए और उन्होंने अपने गीतों को गाकर समां बांध दी. इस दौरान उन्होंने बिहार चुनाव से लेकर बिहारी अस्मिता पर भी बात की.

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साहित्य आजतक में मनोज तिवारी. (Photo: Chandradeep Kumar) साहित्य आजतक में मनोज तिवारी. (Photo: Chandradeep Kumar)

aajtak.in

  • दिल्ली,
  • 23 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST

देश की राजधानी दिल्ली में साहित्य के सितारों के महाकुंभ यानी साहित्य आजतक 2025 का आज आखिरी दिन है. तीन दिनों के इस कार्यक्रम में कला, साहित्य और संगीत के क्षेत्र की कई शख्सियतें शामिल हुईं. इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में हो रहा है. इसी के तहत रविवार को दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी भी शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने राजनीति और बिहारी अस्मिता को लेकर बात की. 

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हमें नहीं भूलना चाहिए संस्कृति

मनोज तिवारी ने कहा कि हम लोग बड़े संस्कारी हैं. बिहार के लोगों को ऐसे ही होना चाहिए और अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए. तिवारी ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि हम तो कई दिन गांव में रुके. इस दौरान हमने देखा कि लोग सरकार के कार्यों का समर्थन कर रहे हैं. जनता सरकार के काम से खुश थी. हम लोग 175 प्लस कहकर रुक जाते थे. लेकिन जनता ने 200 प्लस दिया.

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15 अक्टूबर को हम नॉमिनेशन के लिए चले गए. राजनीति के छात्रों को बिहार के इस रिजल्ट का एनालिसिस करना चाहिए. अगर कोई गाली दे तो उसे चुपचाप सुनना चाहिए. क्योंकि इसका जवाब समय के साथ खुद मिल जाता है. दिल्ली में टिकट दोहराए जाने पर भी उन्होंने अपना बात रखी. उन्होंने कहा कि लोग चाहते थे कि तीन तलाक जैसी कुप्रथा हट जाए... कश्मीर से 370 हट जाए.. राम मंदिर बन जाए. इस सरकार में सब काम हुआ.

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आप एक बार सोच कर देखिए खुद लगेगा कि आप डिसीजन मेकर हैं. राहुल गांधी को मैंने 6 बार संसद में नमस्ते किया. लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया. मैं जानता हूं कि आप राजा के बेटे हैं. लेकिन आपको अपने साथी का जवाब देना चाहिए. जीवन में मैं 5114 गाना गा चुका हूं. मेरा आखिरी गाना बलिया- मऊ के अतुल नामक युवक ने लिखा. उसने ऐसा लिखा जैसे कि अमृत लिख दिया. इस दौरान उन्होंने 'हां हम बिहारी हैं जी, थोड़े संस्कारी हैं जी... ' गाने को दर्शकों को गाकर भी सुनाया.  

मनोज तिवारी ने बिहार के विकास पर भी बात किया. उन्होंने कहा कि आप बिहार के किसी गांव में जाए तो आपकी गाड़ी गांव के अंदर तक जाएगी. आप जब वहां के पुल देखेंगे तो गर्व होगा. यही वजह है कि इस बार बिहार चुनाव में जातिवाद की बंदिशें टूटी. 

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जिसको राज्य पर नहीं गर्व, उसे देश पर भी नहीं होगा

अगर हमको राज्य पर गर्व नहीं होगा तो देश का भी नहीं होगा. हमें अपने संस्कृति पर भी गर्व होना चाहिए. हमारे यहां जब बेटी की विदाई होती है तो वह खुद ही गाती है. ए मेरे बाबुल सोना मत देना, चांदी मत देना, सहूर (गुण-स्किल) देना हो. उन्होंने कहा कि अगर मनोज तिवारी के पास स्किल नहीं होता तो मनोज तिवारी आज यहां कैसे होता? 

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रोज भोर होना अलग बात है. लेकिन जीवन में भोर होना अलग है. उदय होने के लिए कुछ अस्त भी जरूरी है. असफलताओं को पचाने के लिए मदमस्त भी जरूरी है. बीजेपी ने 2 सांसद से शुरुआत की थी. लेकिन इस बार गड़बड़ा गया. लोकसभा में हम लोगों ने 400 पार कहा था. यही वजह है कि बिहार में 200 पार नहीं कहा. लेकिन जनता ने दे दिया. 

मनोज तिवारी ने कहा कि मैं एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं. मेरा गांव अतरौलिया में है और मैंने एक गाना भी उस पर गाया है. जीवन में जितना कर सकते हैं वो थोड़ा ही तो है. इसलिए विनम्र होना चाहिए. आपको कोई कुछ भी कहे, आप हैं तो देश के ही पत्रकार. लेकिन जो देश ही नहीं मानता वो आपकी पत्रकारिता को क्या मानेगा. 

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