कहीं आपके बच्चे में भी तो नहीं विटामिन डी की कमी...?

विटामिन डी जहां बहुत से विटामिन के अवशोषण के लिए जरूरी है वहीं इसकी कमी से हड्ड‍ियों का विकास भी रुक जाता है. यूं तो सूरज की रोशनी विटामिन डी का अच्छा स्त्रोत हैं लेकिन अगर आप चाहें तो अपनी डाइट से भी इस कमी को पूरा कर सकते हैं.

विटामिन डी की कमी होने पर पजर आते हैं ये लक्षण
भूमिका राय
  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST

अगर आपको लगता है कि विटामिन डी की कमी सिर्फ बड़ों को हो सकती है तो आपका ये सोचना गलत है. विटामिन डी की कमी नवजात बच्चों को भी हो सकती है. हम बड़ों की तरह बच्चों को भी एक निश्चि‍त मात्रा में विटामिन डी की जरूरत होती है.

पुराने समय में इसीलिए बच्चों की मालिश हल्की धूप में की जाती थी. इसी वजह से पहले के समय में लोगों को विटामिन डी की कमी तुलनात्मक रूप से कम होती थी लेकिन अब ये एक सामान्य समस्या बन चुकी है.

विटामिन डी जहां बहुत से विटामिन के अवशोषण के लिए जरूरी है वहीं इसकी कमी से हड्ड‍ियों का विकास भी रुक जाता है. यूं तो सूरज की रोशनी विटामिन डी का अच्छा स्त्रोत हैं लेकिन अगर आप चाहें तो अपनी डाइट से भी इस कमी को पूरा कर सकते हैं. इसके अलावा डॉक्टर की सलाह से विटामिन डी के सप्लीमेंट भी ले सकते हैं.

सामान्य तौर पर विटामिन डी की कमी शुरुआती समय में नजर नहीं आती लेकिन इसके कुछ खास लक्षण होते हैं. अगर आपके बच्चे में भी ये लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत उसे डॉक्टर के पास लेकर जाएं और परामर्श लें.

ये हैं विटामिन डी की कमी के लक्षण:

1. विटामिन डी की कमी के चलते बच्चे थोड़ा झुक जाते हैं. उनकी रीढ़ की हड्डी पर इसका असर साफ नजर आता है. विटामिन डी की कमी से हड्ड‍ियों का विकास रुक जाता है.

2. अगर आपके बच्चे की खोपड़ी बहुत कोमल है तो इसका मतलब साफ है कि आपके बच्चे के शरीर में विटामिन डी की कमी है.

3. अगर आपका बच्चा अपना ही वजन नहीं संभाल पाता या फिर उसे चलने-बैठने में दिक्कत है तो सकता है कि उसे विटामिन डी की कमी हो.

4. अगर आपके बच्चे की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी हैं और उसका पैर सीधा नहीं है तो एकबार उसे डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं. हो सकता है कि उसके शरीर में विटामिन डी कमी हो.

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