बीकानेर का कैमल फेस्ट‍िवल: जब रेगि‍स्तान में होता है ऊंट का डांस

बीकानेर में लगता है विश्व प्रसिद्ध ऊंट मेला. इस दौरान राजस्थान की संस्कृति से सजे यहां के नजारे देश-विदेश के सैलानियों को खूब लुभाते हैं.

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ऊंट नृत्य भी यहां का एक विशेष आकर्षण है ऊंट नृत्य भी यहां का एक विशेष आकर्षण है

वन्‍दना यादव

  • बीकानेर,
  • 08 जनवरी 2016,
  • अपडेटेड 10:42 PM IST

राजस्‍थान के बीकानेर में हर साल दो दिवसीय कैमल फेस्ट‍िवल आयोजित किया जाता है. 9-10 जनवरी के बीच मनाए जा रहे इस उत्सव की शान सजीले ऊंट होते हैं तो राजस्थान की संस्कृति इसकी आन. इस उत्सव के दौरान अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनको देखने देश-विदेश से सैलानी उमड़ते हैं.

क्‍या है अंतर्राष्ट्रीय ऊंट उत्सव
से बहुत पुराना रिश्‍ता है. कहते हैं कि बीकानेर शहर की खोज करने वाले राव बीका जी ने बीकानेर में ऊंटों की प्रजाति का पालन पोषण करना शुरू किया था. यहां के ऊंटों को बाकायदा सेना के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है.
इस तरह के ऊंटों को 'गंगा रिसला' कहा जाता है और आज भी भारतीय थल सेना में एक ऐसी टुकड़ी है जो ऊंट के साथ बॉर्डर की सुरक्षा का काम करती है. राज्य सरकार ने ऊंट को राज्य पशु का दर्जा देकर इसकी गरिमा व उपयोगिता को अधिक बढ़ा दिया है.

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दो दिवसीय महोत्सव के आकर्षण
इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राजस्थानी कला व संस्कृति के साथ देश के विभिन्न इलाकों के सांस्कृतिक वैभव से भी पर्यटक रूबरू होंगे. जसनाथजी सम्प्रदाय की स्तुति वंदना और धधकते अंगारों पर अग्नि नृत्य की प्रस्तुति मालासर गांव के रघुनाथ सिद्ध व पार्टी पेश करेंगी. इनके अलावा दोनों दिन आतिशबाजी के नजारे भी पर्यटकों को देखने को मिलेंगे.
उत्सव के पहले दिन बीकानेर से 15 किलोमीटर दूर रायसर गांव में पर्यटकों के लिए निशुल्क कैमल सफारी व कैमल राइड की व्यवस्था रहेगी. इसके बाद ऊंट नृत्य, मिस मरवण व मिस्टर बीकाणा आदि प्रतियोगिताएं होंगी.

ये आयोजन भी होंगेे
उत्सव के दूसरे दिन कार्यक्रमों की शुरुआत देशी-विदेशी पुरुष व महिलाओं की खो-खो प्रतियोगिताओं से होगी. इसके बाद रस्सा कश्शी, ग्रामीण कुश्ती, कबड्डी की प्रतियोगिताएं होंगी. साफा बांध प्रतियोगिता, ऊंट नृत्य प्रतियोगिता, महिला मटका दौड़, महिला म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता का आयोजन भी होगा. कार्यक्रम के बाद अग्नि नृत्य की पेशकश भी रखी गई है.

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बीकानेर महोत्सव के टिकट
बीकानेर के इस रंगीले और मनमोहक महोत्‍सव में हर कोई हिस्‍सा ले सकता है. यहां किसी भी तरह के पास या टिकट की आवश्‍यकता नहीं होती.

गर्म कपड़े जरूर रखें
जनवरी में आयोजित होने वाले इस उत्सव में शामिल होने के लिए गर्म कपड़े अच्छी तरह पैक करके ले जाएं. इस दौरान बीकानेर में काफी ठंड रहती है और शाम के समय यह बढ़ जाती है. वहीं त्वचा की सुरक्षा के लिए सनस्‍क्रीन लोशन रखना भी न भूलें.

जाएं तो ये भी देख आएं
बीकानेर आए हैं और जूनागढ़ का किला नहीं देखा तो क्‍या देखा. कैमल सफारी का आंनद जरूर लें. इतनी दूर आ ही गए हैं तो करणी माता मंदिर जाना न भूलें. इस मंदिर की बहुत मान्‍यता है. यहां चूहों को माता का प्रिय माना जाता है और इनकी भी पूजा की जाती है.

खूब करें खरीदारी
को समेटे हुए है इसीलिए सालभर यहां पर पयर्टाकों का जमावाड़ा देखा जा सकता है. बीकानेर की कढ़ाई वाली जूती हो या फिर लेदर का सामान, सभी की अपनी अलग बात है. यहां की रांगी चुनरी, एंटीक पीस, कॉटन के कपड़े, लाख की चूडि़यां और लोक कलाकृतियां बहुत मशहूर हैं.

कैसे पहुंचेंगे
अगर आप हवाई यात्रा कर रहे हैं तो बीकानेर का सबसे पास का एयरपोर्ट है जोधपुर. दोनों जगहों के बीच दूरी 235 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां से राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फ्लाइट से यह शहर पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है. एयरपोर्ट पहुंचने के बाद आप आराम से सड़क परिवहन के जरिए बीकानेर पहुंच सकते हैं. रेल मार्ग के जरिए भी बीकानेर पहुंचा जा सकता है. बीकानेर के लिए दिल्‍ली, कोलकाता, मु्ंबई, जोधुपर और देश के अन्‍य शहरों से ट्रेन उपलब्‍ध हैं.
अगर आप बाई रोड जाने का विचार कर रहे हैं तो राजस्‍थान के हर शहर से बीकानेर के लिए परिवहन की सुविधाएं हैं. दिल्‍ली और देश के सभी बड़े शहरों से भी बीकानेर के लिए सड़क परिवहन जुड़ा हुआ है.

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