आज के समय में अधिकतर पैरेन्ट्स बच्चों को धूल-मिट्टी में खेलने से रोकते हैं. उन्हें डर रहता है कि कहीं बच्चा बीमार न पड़ जाए या किसी तरह का इंफेक्शन न हो जाए. लेकिन क्या हर तरह की मिट्टी नुकसान पहुंचाती है? या फिर सीमित और सुरक्षित माहौल में मिट्टी से संपर्क बच्चों के शरीर के लिए फायदेमंद भी हो सकता है? वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका जवाब इतना आसान नहीं है. कुछ रिसर्च बताती हैं कि प्रकृति के संपर्क में रहने से बच्चों की इम्यूनिटी और माइक्रोबायोम को फायदा मिल सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ जरूरी सावधानियां भी जुड़ी हैं.
क्या मिट्टी में खेलने से इम्यूनिटी मजबूत होती है?
अमेरिकल अकेडमी ऑफ एलर्जी का कहना है, बच्चे जब पार्क, बगीचे या खुले मैदान में खेलते हैं तो उनका संपर्क मिट्टी, पेड़-पौधों और प्राकृतिक वातावरण में मौजूद लाखों सूक्ष्मजीवों से होता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे सामान्य माइक्रोब्स से शरीर का शुरुआती संपर्क इम्यून सिस्टम को यह समझने में मदद करता है कि किन चीजों से लड़ना है और किन्हें सामान्य मानकर छोड़ देना है.
इसे कई वैज्ञानिक हाइजीन हाइपोथीसिस और बायोडायवर्सिटी हाइपोथीसिस से जोड़कर देखते हैं. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चों को गंदी या दूषित जगहों पर खेलने दिया जाए.
माइक्रोबायोम भी निभाते हैं अहम भूमिका
हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, हमारा शरीर खासकर आंत में खरबों अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं जिन्हें मिलाकर माइक्रोबायोम कहा जाता है. ये पाचन के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी प्रभावित करते हैं. लाइफ के शुरुआती सालों में पर्यावरण से मिलने वाले सूक्ष्मजीव माइक्रोबायोम के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ बच्चों को पूरी तरह स्टेराइल माहौल में रखने की सलाह नहीं देते.
हर मिट्टी सुरक्षित नहीं होती
क्लीवलैंड क्लीनिक विशेषज्ञों के मुताबिक, प्राकृतिक और साफ वातावरण की मिट्टी से कुछ फायदे हो सकते हैं. लेकिन सड़क किनारे, औद्योगिक क्षेत्रों, कूड़े के ढेर, नालों या जानवरों के मल से दूषित मिट्टी में बैक्टीरिया, परजीवी और हानिकारक रसायन हो सकते हैं. बच्चों को सुरक्षित पार्क, गार्डन या साफ खुले मैदान में खेलने देना बेहतर है. लेकिन खेलने के बाद साबुन और पानी से हाथ जरूर धुलवाने चाहिए ताकि संक्रमण का खतरा कम हो.
किन बातों का रखें ध्यान?
यदि बच्चा मिट्टी में खेल रहा है तो कुछ आसान सावधानियां अपनानी चाहिए. साफ पार्क या गार्डन चुनें. जहां कूड़ा, गंदा पानी या जानवरों का मल हो, वहां खेलने से बचाएं. खेल खत्म होने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं. अगर बच्चे के शरीर पर खुला घाव है या उसकी इम्यूनिटी किसी बीमारी के कारण कमजोर है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा.
क्या कहती है साइंस?
अब तक की वैज्ञानिक जानकारी यही बताती है कि सामान्य, प्राकृतिक और सुरक्षित वातावरण में मिट्टी से संपर्क बच्चों के इम्यून सिस्टम और माइक्रोबायोम के विकास में मददगार हो सकता है. लेकिन इसे इम्यूनिटी बढ़ाने का तरीका मान लेना सही नहीं होगा. अच्छी डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित टीकाकरण, शारीरिक गतिविधि और साफ-सफाई आज भी मजबूत इम्यूनिटी की सबसे जरूरी नींव हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क