Tips to Keep Your Home Cool in Summer: भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से हर कोई परेशान है. ऐसे में घरों को अंदर से ठंडा और सुरक्षित रखना सबसे जरूरी हो गया है. उत्तर प्रदेश नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने लोगों को इस चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए कुछ बेहद आसान और प्रैक्टिकल ऑपशंस बताएं हैं. हेल्थ मिशन का कहना है कि घर के स्ट्रक्चर में छोटे-छोटे बदलाव करके न सिर्फ अंदरूनी तापमान को कम किया जा सकता है बल्कि अपनी हेल्थ को भी सेफ रखा जा सकता है.
इंटरनेशनल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन US EPA के मुताबिक, पारंपरिक छतों के मुकाबले रिफ्लेक्टिव मटीरियल वाली कूल रूफ सूरज की किरणों को सोखने के बजाय वापस रिफ्लेक्ट कर देती हैं जिससे घर के अंदर कूलिंग बनी रहती है और एयर कंडीशनिंग (AC) की एनर्जी डिमांड करीब 11 प्रतिशत से 27 प्रतिशत तक कम हो जाती है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ स्मार्ट तरीकों के बारे में.
ग्रीन नेट शेडिंग और हीट इंसुलेशन टाइल्स
यदि आपकी छत पर सीधी धूप पड़ती है, तो ग्रीन नेट शेडिंग एक बेहतरीन और सस्ता ऑपशन है. यह सूरज की तेज किरणों को सीधे छत पर आने से रोकता है. इसके साथ ही, छत पर हीट इंसुलेशन टाइल्स लगवाना भी एक परमानेंट इलाज है.
यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी का कहना है, तेज गर्मी में जहां नॉर्मल छतों का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है वहीं इंसुलेशन और हाई थर्मल एमिटेंस वाली टाइल्स छत को लगभग 28 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा ठंडा रख सकती हैं.
रिफ्लेक्टिव मटीरियल और हॉलो कंक्रीट
आजकल मार्केट में रिफ्लेक्टिव रूफ कोटिंग्स और पेंट मौजूद हैं. इन्हें छत पर लगाने से छत हीट को बाहर ट्रांसफर कर देती है. इसके अलावा मकान बनाते समय या रेनोवेशन के दौरान हॉलो कंक्रीट या टेराकोटा टाइल्स का इस्तेमाल करना चाहिए. इनके बीच में मौजूद हवा की खाली जगह नेचुरल बैरियर की तरह काम करती है जिससे नीचे के कमरों तक गर्मी नहीं पहुंच पाती.
बांस, फूस और मिट्टी के घड़ों का पारंपरिक नुस्खा
नेचुरल और इको-फ्रेंडली तरीकों की बात करें तो बांस, फूस और पाम लीव्स से बनी सेकेंडरी रूफ स्क्रीन छत के ऊपर एक लेयर बना देती है, जिससे कंक्रीट गर्म नहीं होता. इसके अलावा, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में छत पर पारंपरिक मिट्टी के घड़ों का उपयोग (इन्वर्टर कुल्हड़ या पॉट इंसुलेशन) भी बेहद कारगर साबित होता है. ये सभी तरीके मिलकर अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट को कम करते हैं और आपके घर को एक सेफ और आरामदायक जोन में बदल देते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क