Eyeglass Lens Safty Tips: आग उगलते इस गर्मी के मौसम में कई शहरों का तापमान 45 डिग्री से भी अधिक हो गया है. बाहर निकलना तो दूर, घर में उमस से लोगों का बुरा हाल हो रहा है. लेकिन हर किसी को काम के सिलसिले में घर से बाहर जाना होता है इसलिए वो लोग आंखों को तेज धूप से बचाने के लिए सनग्लासेस या अपने रेगुलर चश्मे का इस्तेमाल बढ़ा देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मौसम की चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी आपके महंगे चश्मे को मिनटों में बर्बाद कर सकती है?
दरअसल, चश्मा लगाने वाले ज्यादातर लोग अनजाने में एक ऐसी गलती कर बैठते हैं, जिससे उनके लेंस पर मौजूद महंगी कोटिंग पूरी तरह नष्ट हो जाती है. आइए वो गलती कौन सी है जिससे सुधारकर आप अपने हजारों के महंगे चश्मे और लेंस को बचा सकते हैं, इस बारे में जान लीजिए.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब बाहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार होता है तो धूप में खड़ी बंद कार के अंदर का तापमान महज कुछ ही मिनटों में 60 से 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. लेंस एक्सपर्ट वेबसाइट के मुताबिक, इस अत्यधिक गर्मी के कारण चश्मे के लेंस पर एक खास तरह का डैमेज होता है जिसे क्रेजिंग (Crazing) कहा जाता है.
लेंस पर क्रेजिंग के कारण उसके ऊपर लगी हुई एंटी-रिफ्लेक्टिव (AR) या एंटी-ग्लेयर कोटिंग में मकड़ी के जाले जैसी बारीक दरारें पड़ जाती हैं. यह कोटिंग डैमेज इतने शांत तरीके से होता है कि आपको देखकर लगेगा कि चश्मा सिर्फ गंदा हुआ है लेकिन जब आप उसे साफ करेंगे तो आप देखेंगे कि आपका लेंस बर्बाद हो चुका है.
मार्केट में मिलने वाले अधिकतर आईग्लासेस हाई-क्वालिटी प्लास्टिक या पॉलीकार्बोनेट मटेरियल से बनाए जाते हैं. इनके लेंसों के ऊपर विजन को साफ रखने और चमक कम करने के लिए कई तरह की प्रोटेक्टिव कोटिंग्स चढ़ाई जाती हैं.
रिसर्च का कहना है, जब चश्मा अत्यधिक गर्मी की चपेट में आता है तो मूल लेंस का मटेरियल (प्लास्टिक) तेजी से फैलता है. हालांकि लेंस के ऊपर चढ़ी एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग उस स्पीड से फैल नहीं पाती. इस थर्मल स्ट्रेस के कारण कोटिंग का बॉन्ड कमजोर हो जाता है और वह टूटने लगती है या पिघलने लगती है.
गर्मी का असर सिर्फ लेंस तक ही सीमित नहीं रहता. तेज हीट के कारण प्लास्टिक और एसीटेट से बने डेलिकेट फ्रेम्स भी ढीले होने लगते हैं या पूरी तरह मुड़ जाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक बार लेंस में क्रेजिंग आ जाए या कोटिंग डैमेज हो जाए तो इसे घर पर किसी भी नुस्खे से ठीक नहीं किया जा सकता. इसका एकमात्र इलाज लेंस को बदलवाना ही होता है.
हमेशा ध्यान रखें आप गर्मियों में जब भी कार से निकलें उस समय अपना चश्मा कभी भी अंदर न छोड़ें. उसे हमेशा उसके हार्ड केस में रखकर अपने साथ ले जाएं ताकि हजारों का नुकसान होने से बच सके.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क