हफ्ते में कितनी बार खाएं मटन, बैड कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर रहेगा दूर, डॉक्टर ने बताया खाने का सही तरीका

साल 2026 की नई अमेरिकी डाइटरी गाइडलाइन्स ने घी, मक्खन और रेड मीट को 'हाई-क्वालिटी प्रोटीन' बताकर सबको चौंका दिया है. जहां नई रिपोर्ट सैचुरेटेड फैट को क्लीन चिट दे रही है, वहीं हार्वर्ड के विशेषज्ञ इसे दिल के लिए खतरनाक मान रहे हैं. जानें रेड मीट और डेयरी की सही मात्रा क्या होनी चाहिए.

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प्रोसेस्ड मीट खाने से बचना चाहिए. (PHOTO:ITG) प्रोसेस्ड मीट खाने से बचना चाहिए. (PHOTO:ITG)

प्रियंका

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST

How much red meat should you eat: दशकों से हमें सिखाया गया कि घी, मक्खन और लाल मांस सेहत के दुश्मन हैं, लेकिन साल 2026 की शुरुआत डाइट की दुनिया में एक बहुत बड़े बदलाव के साथ हुई है. अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग (HHS) ने '2025-2030 डाइटरी गाइडलाइन्स' जारी कर सबको चौंका दिया, उन्होंने पूरी दुनिया के डॉक्टरों और डाइटिशियंस के बीच भी एक नई बहस छेड़ दी है. 

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यूएस की नई डाइटरी गाइडलाइंस

व्हाइट हाउस में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी हेल्थ सेक्रेटरी रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर ने घोषणा की कि अब सैचुरेटेड फैट जैसे घी, मक्खन और फुल-फैट दूध के खिलाफ जंग खत्म हो गई है. नई डाइटरी गाइडलाइंस के मुताबिक, असली खतरा प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा चीनी है, जबकि अंडे, रेड मीट और फुल-फैट डेयरी को हाई-क्वालिटी प्रोटीन का अच्छा सोर्स माना गया है.

यह बदलाव भारतीय लोगों के लिए भी अहम है, क्योंकि यहां दाल, दूध, दही, घी, पनीर, अंडा और रेड मीट पहले से डाइट का हिस्सा रहे हैं. रिपोर्ट उन पुराने दावों को चुनौती देती है, जिनमें रेड मीट को दिल की बीमारियों से जोड़ा जाता था.

हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स अब भी सलाह देते हैं कि बीफ, पोर्क और मटन जैसे फैटी रेड मीट सीमित मात्रा में ही खाएं, क्योंकि इनमें मौजूद सैचुरेटेड फैट बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है.

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क्या फैटी लिवर के मरीज रेड मीट खा सकते हैं?

भारत में भी रेड मीट लोग खाते हैं, लेकिन इंडिया में कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर के मरीजों की संख्या भी काफी ज्यादा है. ऐसे में क्या लाल मांस सभी के लिए खाना सही है. इस बारे में मुंबई के कल्याण में स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. राकेश पटेल ने Aajtak.in को बताया, 'सार्कोपीनिया और कार्डियोवस्कुलर लिवर डिजीज के मरीजों के लिए बहुत कम मात्रा में रेड मीट नुकसानदायक नहीं है. लेकिन प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज और सलामी... उनके लिए खतरनाक है, क्योंकि दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं.' 

क्या भारतीय डाइट में रेड मीट जरूरी है?

मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन-डायरेक्टर और वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. (प्रोफ.) पुरुषोत्तम लाल, जिन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है, ने Aajtak.in से रेड मीट के सेवन पर बात की. उन्होंने कहा, 'भारतीय डाइट में रेड मीट को जरूरी नहीं माना जाता है, सीमित मात्रा में रेड मीट लेने से नुकसान नहीं होता. लेकिन ज्यादा सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए भारतीय परिस्थितियों में संतुलित, मौसमी और घर का बना खाना ही सबसे बेहतर माना जाता है.'

कितनी मात्रा में रेड मीट खाना चाहिए? 

डॉ. पुरुषोत्तम लाल ने बताया कि भारतीयों के लिए मटन जैसे रेड मीट का बार-बार सेवन जरूरी नहीं है. अगर कोई व्यक्ति रेड मीट खाता भी है, तो इसे हफ्ते में एक बार या फिर 10–15 दिन में एक बार सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है. डेली या अधिक मात्रा में रेड मीट खाना सेहत के लिए सही नहीं है, इसमें सैचुरेटेड फैट अधिक होता है, जो समय के साथ कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर हार्ट डिजीज और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है. 

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डॉ. राकेश पटेल के अनुसार, पश्चिमी देशों के लोगों के लिए हफ्ते में 500 ग्राम रेड मीट खाना साइंटिफिकली सही है. मगर भारतीयों को उनके मुकाबले कम मात्रा में  सैचुरेटेड फैट लेना चाहिए, क्योंकि भारत पहले से ही अधिक कार्बोहाइड्रेट लेने वाला देश है. इसलिए ज्यादा फैट लेने से हम लोगों में मोटापा, डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है.  

क्या रेड मीट से कैंसर का खतरा बढ़ता है?

डॉ. पटेल का कहना है कि वो पूरी तरह से रेड मीट खाना पूरी तरह बंद करने की सलाह नहीं देते हैं, खासतौर पर जो लोग बीमार हैं और उनको प्रोटीन इनटेक बढ़ाने की जरूरत है. मगर हफ्ते में 1 से 2 या ज्यादा से ज्यादा 4 सर्विंग काफी है. रेड मीट को ज्यादा खाने से कोलोरेक्टल कैंसर और हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. 

टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दारिउश मोजाफरियन ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि समस्या सिर्फ फैट नहीं, बल्कि रेड मीट में मौजूद कुछ कैंसर बढ़ाने वाले और सूजन पैदा करने वाले कंपाउंड्स हैं, जो कैंसर, टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकते हैं.

डॉ. दारिउश मोजाफरियन सलाह देते हैं कि हफ्ते में 1 बार से ज्यादा रेड मीट न खाएं. प्रोसेस्ड मीट जैसे बेकन, सॉसेज, हॉट डॉग, सलामी, डेली मीट या तो बिल्कुल न खाएं, या बहुत कम खाएं. 

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हार्वर्ड प्रोफेसर का क्या है कहना?

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर वाल्टर विलेट का मानना ​​है कि रेड मीट और ज्यादा डेयरी फैट की सलाह से अमेरिकियों की सेहत को खतरा हो सकता है.लेकिन कम चीनी और रिफाइंड ग्रेन्स खाने की सलाह अच्छी है. 

विलेट के अनुसार, 2024 की एक फेडरल रिपोर्ट में लोगों को कम मांस और ज्यादा प्लांट-बेस्ड फूड्स जैसे बीन्स, दालें, मटर, नट्स और सोया खाने की सलाह दी गई थी. उनका कहना है कि कई साइंटफिक स्टडी से यह साबित हुआ है कि प्लांट प्रोटीन दिल और शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं, जबकि रेड मीट से LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. 

क्या प्रोसेस्ड मीट से पूरी तरह बचना चाहिए?

प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज, सलामी और बेकन से जितना हो सके बचना चाहिए. इनमें नमक, प्रिजर्वेटिव्स और सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है, जो हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे का खतरा बढ़ा सकती है. कभी-कभार बहुत कम मात्रा में लेने से तुरंत नुकसान नहीं होता, लेकिन इसे रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाना सेहत के लिए सही नहीं है.

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