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ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन का ट्रायल रुकने पर WHO ने कहा- अच्छा हुआ

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ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन का ट्रायल रोके जाने से लोग निराश होने लगे हैं. पूरी दुनिया के लोगों ने ऑक्सफोर्ड की इस वैक्सीन से बहुत उम्मीदें लगा रखी हैं. ऐसे में ट्रायल रोके जाने की खबर सुनकर हर कोई परेशान हो गया है. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि लोगों को हतोत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि ट्रायल के दौरान इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं.

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WHO की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि एस्ट्राजेनेका का ट्रायल रुकने से लोगों को निराश होने की जरूरत नहीं है और लोगों को हौसला नहीं खोना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना हमें बताती हैं कि वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया आसान नहीं है और ये हमेशा तेज और सीधी दिशा में नहीं चल सकती है.  

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स्वामीनाथन ने कहा, 'मुझे लगता है कि जो हुआ वो अच्छा हुआ...शायद ये हर किसी के लिए एक वेकअप कॉल या सबक है, जो यह बताता है कि रिसर्च और क्लिनिकल डेवलेपमेंट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और हमें इसके लिए तैयार रहना चाहिए. हमें निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं.'  

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स्वामीनाथन ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि चीजें आगे की तरफ बढ़ेंगी लेकिन इस बात को ध्यान में रखना होगा कि ये सब परिस्थितियों पर निर्भर करता है. हमें ट्रायल के विवरण का इंतजार करना चाहिए.  

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आपको बता दें कि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के ट्रायल के दौरान एक महिला पर इसके गंभीर रिएक्शन दिखने के बाद दुनिया भर में इसके ट्रायल को रोक दिया गया है. एक्सपर्ट्स की एक टीम इस बात की जांच कर रही है कि इस वॉलंटियर की हालत वैक्सीन लेने के बाद बिगड़ी है या उसे पहले से कोई तकलीफ थी.  

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वहीं एस्ट्राजेनेका के सीईओ ने एक बयान जारी कर बताया कि जिस महिला वॉलंटियर की वजह से ट्रायल रोका गया है उसे असली वैक्सीन दी गई थी. तीसरे चरण के ट्रायल में कुछ लोगों को डमी और कुछ लोगों को असली वैक्सीन दी जा रही है. महिला के रीढ़ की हड्डी में गंभीर सूजन आई है और ये जानने की कोशिश की जा रही है कि इसका वैक्सीन से कोई संबंध है या नहीं.

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भारत में इस वैक्सीन को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रहा है. पूरी दुनिया में ट्रायल रोके जाने के बावजूद भारत में ये जारी था जिसकी वजह से इसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. नोटिस मिलने के बाद इंस्टीट्यूट ने वैक्सीन का ट्रायल रोक दिया है.  

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भारत में अब तक 100 वॉलंटियर्स को वैक्सीन दी जा चुकी है. यहां पहले और दूसरे का ट्रायल एक साथ किया जा रहा है. पूरे ट्रायल के लिए लगभग 1,600 वॉलंटियर्स का नामांकन करने की योजना है.  

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इस समय कुल 180 वैक्सीन का प्री क्लिनिकल या क्लिनिकल ट्रायल जारी है. इनमें से 35 वैक्सीन अपने क्लिनिकल ट्रायल में पहुंच चुकी हैं. इन 35 में से 8 वैक्सीन फाइनल स्टेज यानी तीसरे चरण के ट्रायल में हैं.   

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भारत में कम से कम आठ वैक्सीन बनाई जा रहीं हैं. इनमें से दो वैक्सीन पहले चरण का ट्रायल पूरा कर दूसरे चरण में पहुंच चुकी हैं. पूरी दुनिया में वैक्सीन की दौड़ में ऑक्सफोर्ड वैक्सीन, मॉडर्ना,  फाइजर/बायोएनटेक, जॉनसन एंड जॉनसन, सनोफी/ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन, नोवैक्स और रूस की वैक्सीन हैं.  

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