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रूस ने लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाना किया शुरू, 26 वैज्ञानिकों ने खड़े किए सवाल

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दुनिया की पहली वैक्सीन बनाने का दावा करने के बाद से ही रूस कई देशों के निशाने पर था. रूस ने अपनी वैक्सीन Sputnik V के शुरूआती नतीजे साझा किए बिना ही इसे लॉन्च कर दिया था जिसके बाद से ही सवाल उठ रहे थे. इन तमाम आरोपों के बीच रूस ने मास्को में अब अपने वॉलंटियर्स को वैक्सीन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मॉस्को की सरकारी वेबसाइट का कहना है कि राजधानी के करीब 40,000 लोगों को वैक्सीन दी जा सकती है. ये वैक्सीन दो खुराक में 21 दिनों के अंतराल पर दी जाएगी.

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मास्को के डिप्टी मेयर अनास्तासिया राकोवा ने कहा कि राजधानी में कुछ वॉलंटियर्स का पहले ही वैक्सीनेशन हो चुका है. ये वैक्सीनेशन 26 वैज्ञानिकों के 'द लैंसेट' को एक ओपन लेटर लिखने के बाद शुरू किया गया. इस पत्र में वैक्सीन के शुरुआती चरण के ट्रायल के डेटा पर सवाल उठाया गया था. पत्र में डेटा पर संदेह जताया गया है.

 

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इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल के डेटा से पता चलता है कि कई वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी का स्तर एक जैसा ही था. जबकि डेटा के मूल्यांकन से पता चलता है कि ऐसी संभावना बहुत कम है. ये पत्र एनरिको बूकी नाम के वैज्ञानिक ने फेसबुक पर पोस्ट किया है.  

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पत्र लिखने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका निष्कर्ष मेडिकल जर्नल में छपी एक स्टडी पर आधारित है ना कि वैक्सीन के वास्तविक डेटा पर. उन्होंने कहा, 'वास्तविक डेटा ना होने की वजह से फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता है.'   

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वैज्ञानिकों की ओर से जताई गई चिंता को वैक्सीन बनाने वाले गामेलिया इंस्टिट्यूट ने खारिज कर दिया है. इंस्टिट्यूट के उप-निदेशक डेनिस लॉगनोव ने कहा, प्रकाशित हुए नतीजे प्रामाणिक और बिल्कुल सटीक हैं और इसकी समीक्षा मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' के पांच मेडिकल एक्सपर्ट्स ने की है.

 

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रूस की न्यूज एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, लैंसेट ने रूस की वैक्सीन पर स्टडी के लेखकों को वैक्सीन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए कहा है. मेडिकल जर्नल लैंसेट ने कहा है, स्टडी करने वाले शोधकर्ताओं को फिलाडेल्फिया की टेंपल यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञानी एनरिको बूकी की ओर से खुली चिठ्ठी में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए आमंत्रित किया गया है. जर्नल ने कहा है कि स्थिति पर बारीकी से नजर बनी हुई है.  

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लैंसेट की ओर से जारी बयान में कहा गया है, हम जो भी स्टडी प्रकाशित करते हैं, उन पर वैज्ञानिक बहस को प्रोत्साहित करते हैं और हम रूस की वैक्सीन के ट्रायल को लेकर लिखे गए पत्र के बारे में जानते हैं. हमने स्टडी के लेखकों के साथ सीधे इस पत्र को साझा किया है और उनसे वैज्ञानिक चर्चा में शामिल होने के लिए कहा है.

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रूस ने मंगलवार को आम लोगों के लिए वैक्सीन की पहली खेप जारी कर दी है. लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुई स्टडी के मुताबिक, शुरुआती ट्रायल में वैक्सीन प्रतिभागियों में एंटीबॉडी का रिस्पांस पैदा करने में कामयाब रही.  

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आपको बता दें वैक्सीन के फेज 3 का ट्रायल पूरा किए बिना ही रूस वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है और लोगों को टीका लगा रहा है. तीसरे चरण के ट्रायल में ही बड़े पैमाने पर लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण होता है और इसके साइड इफेक्ट्स का पता चलता है. कई बार अंतिम फेज के ट्रायल में जाकर कई वैक्सीन सुरक्षित साबित नहीं होती हैं. यही वजह है कि सारे ट्रायल पूरे होने के बाद ही किसी वैक्सीन को बाजार में उतारा जाता है. रूस की कोरोना वैक्सीन का एडवांस स्टेज का ट्रायल 26 अगस्त से शुरू हो रहा है. रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने बुधवार को कहा कि क्लीनिकल ट्रायल के लिए करीब 31,000 वॉलंटियर्स चुन लिए गए हैं.

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