सट्टेबाजी या जुआ जैसा है ये गेम, हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 'लूडो' के खिलाफ कार्रवाई की मांग

बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में लूडो सुप्रीम नामक गेम एप्लिकेशन के निर्माताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई. इस याचिका को महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) के केशव मुले ने दायर किया है.

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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

मुस्तफा शेख

  • नई दिल्ली ,
  • 06 जून 2021,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST
  • लूडो गेम के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका
  • महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के केशव मुले ने दायर की याचिका

बॉम्बे हाईकोर्ट में लूडो गेम (Ludo Supreme Game) को लेकर एक याचिका दायर की गई. याचिका में मांग की गई कि इस गेम को कौशल के बजाए किस्मत का खेल घोषित किया जाए. इसमें लोग दांव पर पैसे लगा रहे हैं, जो कि सट्टेबाजी या जुआ जैसा है. जिस पर अब हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है. 

दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में लूडो सुप्रीम नामक गेम एप्लिकेशन के निर्माताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई. इस याचिका को महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) के केशव मुले ने दायर किया है. याचिका में मोबाइल ऐप से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.  

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MNS नेता मुले का तर्क था कि महाराष्ट्र जुआ रोकथाम (एमपीजी) अधिनियम के प्रावधान इस गेम पर लागू होते हैं, यदि इसके जरिए दांव लगाया जा रहा है. उनकी याचिका में कहा गया है कि लूडो को केवल कौशल का खेल नहीं माना जा सकता है, बल्कि यह 'मौके का खेल' है. 

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बता दें कि मुले ने शुरुआत में कैशग्रेल (मोबाइल ऐप कंपनी) के खिलाफ एक पुलिस स्टेशन का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन तब पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था. जिसके बाद मुले ने मुंबई के गिरगांव में अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) के समक्ष धारा 156 (3) के तहत शिकायत दर्ज कराई और जांच की मांग की. हालांकि, एसीएमएम ने भी याचिका को खारिज कर दिया. 

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इसके बाद MNS नेता ने वकील निखिल मेंगड़े के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मुले ने तर्क दिया कि उन्होंने पाया है कि इस गेम में खिलाड़ी पैसे की शर्त लगाकर खेलते हैं. याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से पुलिस को कार्रवाई के आदेश देने की मांग की है. अब इस मामले पर सुनवाई 22 जून को होगी. फिलहाल हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 

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