महाराष्ट्र संकट: बागी विधायक...सुप्रीम कोर्ट में याचिका, लागू होगा दलबदल कानून?

मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जया ठाकुर ने SC में अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई है कि दलबदल करने वाले विधायकों को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से रोकने के निर्देश दिए जाएं.

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बागी विधायक एकनाथ शिंदे बागी विधायक एकनाथ शिंदे

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2022,
  • अपडेटेड 11:02 PM IST
  • एकनाथ शिंदे के बागी तेवर के बाद सियासी संकट
  • मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने दायर की याचिका

महाराष्ट्र का राजनीतिक और संवैधानिक संकट सुप्रीम कोर्ट पहुंचा गया है. मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष जया ठाकुर ने SC में अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई है कि दलबदल करने वाले विधायकों को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से रोकने के निर्देश दिए जाएं. अयोग्य घोषित होने या इस्तीफा देने वाले विधायकों के चुनाव लड़ने पर अगले 5 साल तक रोक लगाई जाए. ये रोक उनके इस्तीफे या अयोग्य ठहराए जाने की तारीख से पांच साल तक प्रभावी रहे. 

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महाराष्ट्र सरकार में महा विकास आघाड़ी के घटक शिवसेना से बागी हुए विधायकों की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए ये अर्जी दाखिल की गई है. जया की याचिका में कहा गया है कि  विधायकों का दलबदल असंवैधानिक है. क्योंकि ये दो तिहाई से कम है. 

ये अर्जी 2021 में उनकी पहले से लंबित याचिका के संदर्भ में दायर की गई है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2021 में केंद्र से जवाब मांगा था. जया ठाकुर की ताजा अर्जी में कहा गया है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद केंद्र ने दलबदल के मामलों को संभालने के लिए अभी तक कदम नहीं उठाए हैं. इसी का फायदा उठाकर राजनीतिक दल या बागी स्वार्थी विधायक हमारे देश के विभिन्न राज्यों में निर्वाचित सरकार को लगातार नष्ट कर रहे हैं. जबकि लोकतंत्र में दलगत राजनीति के महत्व और सुशासन के लिए सरकार की आंतरिक और बाह्य स्थिरता जरूरी है.

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लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक विचारों के बीच संतुलन बनाए रखने में स्पीकर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. इसी के जरिए याचिका में तीन साल पहले कर्नाटक में 2019 में दोषपूर्ण विधायकों के फिर से चुनाव का हवाला भी दिया गया है. पिछली सदी के छठे से सातवें दशक के बीच राजनीतिक क्षेत्र में  "आया राम गया राम" का जुमला मशहूर हुआ था. इसका श्रेय हरियाणा के विधायक गया लाल को दिया जाता है, जिन्होंने 1967 के एक साल के दौरान तीन बार पार्टी बदली. 

ऐसे संवैधानिक संकट के सिलसिले में पिछली याचिका पर सुनवाई के सिलसिले में दरअसल जनवरी 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संसद को उच्च न्यायपालिका के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र ट्रिब्यूनल का गठन करना चाहिए. इससे दलबदल के मामलों को तेज रफ्तार और निष्पक्ष रूप से तय किया जा सकेगा.
 

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