रेप की कोशिश, 4 दिन में चार्जशीट, 20 दिन में आदेश, 10 साल के लिए सलाखों के पीछे आरोपी, जानिए क्या है हाईस्पीड फैसले का मामला

महराजगंज में रेप की कोशिश के एक मामले में अपर सत्र / विशेष न्यायाधीश ने 20 दिन में फैसला सुना दिया. कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई है. साथ ही उस पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है. इस मामले में जितनी तेजी कोर्ट ने दिखाई है, उतनी ही रफ्तार से पुलिस ने भी काम किया. उसने महज चार दिन में इस मामले में चार्जशीट पेश कर दी थी. 

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महराजगंज में 17 दिसंबर को पड़ोसी ने की थी रेप की कोशिश (सांकेतिक फोटो) महराजगंज में 17 दिसंबर को पड़ोसी ने की थी रेप की कोशिश (सांकेतिक फोटो)

अमितेश त्रिपाठी

  • महराजगंज,
  • 25 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 7:27 AM IST

यूपी के महराजगंज में एक मूक-बधिर बच्ची से रेप की कोशिश के मामले में कोर्ट ने 20 दिन में ही आरोपी के खिलाफ सजा सुना दी. महराजगंज में अपर सत्र / विशेष न्यायाधीश विनय कुमार सिंह ने इस मामले में 19 दिन तक सुनवाई कर 20वें दिन यानी मंगलवार को अभियुक्त को 10 साल का सश्रम कारावास की सजा सुना दी. इसके अलावा उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए मात्र चार दिनों में ही विवेचना पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी.

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मुकदमें के अनुसार सदर कोतवाली थाना क्षेत्र में 17 दिसंबर को एक पड़ोसी ने मूकबधिर बालिका से जबरन छेड़छाड़ और रेप का प्रयास किया था. बच्ची की मां के पहुंचने पर अभियुक्त मौके से भाग निकला था. इसके बाद परिवार की तहरीर पर पुलिस ने अभियुक्त रामभवन के विरुद्ध केस दर्ज किया. मामले में विवेचक और नगर चौकी प्रभारी अमित कुमार सिंह ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान आदि के आधार पर मात्र चार दिनों में ही विवेचना पूरी करते हुए न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दिया था.

इधर मामले में संयुक्त निदेशक अभियोजन राकेश श्रीवास्तव, सदर कोतवाल रवि कुमार राय और विवेचक अमित कुमार सिंह और लोक अभियोजक विजय नारायण सिंह ने मामले में लगातार पैरवी करते हुए सभी सबूत और गवाहों के बयान रिकॉर्ड किए, जिसके बाद मंगलवार को लोक अभियोजक विजय नारायण सिंह द्वारा दोषी के विरुद्ध उपयुर्क्त साक्ष्य होने के बाद दोषी को सजा सुनाए जाने की मांग की थी. इसके बाद अभियुक्त रामभवन को न्यायालय ने सजा सुनाई है. महराजगंज पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि ऑपरेशन शिकंजा के तहत हुए प्रभावी पैरवी से इस केस में सफलता मिली.


 

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