Pscychological Facts: कल कर लेंगे यार... आखिर बार-बार काम टालने वाले लोग कैसे होते हैं?

काम टालना हमेशा आलस की निशानी नहीं होता. कई बार लोग डर, चिंता, असफल होने के डर या हर काम को बिल्कुल सही करने की चाह में भी काम टाल देते हैं. इसके अलावा मोबाइल, सोशल मीडिया और दूसरी मनोरंजन वाली चीजें भी लोगों का ध्यान भटका देती हैं. 

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अगर कोई इंसान रोज थोड़ा-थोड़ा काम टालता है, तो यह धीरे-धीरे उसकी आदत बन जाती है. ( Photo: ITG) अगर कोई इंसान रोज थोड़ा-थोड़ा काम टालता है, तो यह धीरे-धीरे उसकी आदत बन जाती है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:04 AM IST

अरे, अभी बहुत समय है... कल कर लेंगे. अगर यह बात आपने खुद से कभी कही है, तो घबराइए मत. आप अकेले नहीं हैं. दुनिया में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो जरूरी काम को भी बार-बार टाल देते हैं. चाहे पढ़ाई हो, ऑफिस का प्रोजेक्ट हो, घर का कोई काम हो या फिर अपनी सेहत का ध्यान रखना हो, कई लोग हर बार यही सोचते हैं कि अभी नहीं... बाद में कर लेंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग ऐसा बार-बार क्यों करते हैं? क्या वे आलसी होते हैं, या इसके पीछे कोई और वजह होती है?

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काम टालना हमेशा आलस नहीं होता
ज्यादातर लोग मानते हैं कि जो इंसान काम टालता है, वह आलसी होता है. लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. कई बार इंसान काम इसलिए नहीं टालता क्योंकि उसे मेहनत नहीं करनी, बल्कि इसलिए क्योंकि वह उस काम को लेकर तनाव महसूस करता है. उसे डर होता है कि कहीं वह गलती न कर दे, काम सही से न हो पाए या फिर लोग उसकी आलोचना न करें. ऐसे में वह उस काम से बचने की कोशिश करता है और खुद को समझा देता है कि अभी नहीं, बाद में कर लेंगे.

कुछ लोगों को जब कोई बड़ा या मुश्किल काम मिलता है, तो उन्हें समझ ही नहीं आता कि शुरुआत कहां से करें. यही सोचते-सोचते उनका काफी समय निकल जाता है. फिर वे खुद से कहते हैं कि आज नहीं, कल शुरू करेंगे. लेकिन यह कल कई बार हफ्तों और महीनों तक नहीं आता. मान लीजिए आपको दो विकल्प दिए जाएं. पहला, एक घंटे बैठकर जरूरी काम करना. दूसरा, मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया देखना या वेब सीरीज देखना. ज्यादातर लोगों का मन दूसरी तरफ ज्यादा जाता है, क्योंकि उससे तुरंत खुशी मिलती है. जबकि काम पूरा करने का फायदा बाद में मिलता है. यही वजह है कि लोग जरूरी काम छोड़कर छोटी-छोटी मिलने वाली खुशी में समय बिता देते हैं.

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परफेक्ट बनने की कोशिश भी बनती है वजह
कुछ लोग चाहते हैं कि उनका हर काम बिल्कुल बेहतरीन हो. वे तब तक शुरुआत नहीं करते, जब तक उन्हें सही समय, सही माहौल या पूरी तैयारी न मिल जाए. लेकिन जिंदगी में हर बार सब कुछ परफेक्ट नहीं होता. इसी इंतजार में वे काम शुरू ही नहीं कर पाते और समय निकल जाता है. कुछ लोगों को लगता है कि वे दबाव में बेहतर काम करते हैं. इसलिए वे जानबूझकर काम को आखिरी समय तक टालते रहते हैं. कभी-कभी वे समय पर काम पूरा भी कर लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा करना तनाव बढ़ाता है. इससे काम की क्वालिटी भी प्रभावित हो सकती है और मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है.

धीरे-धीरे बन जाती है आदत
अगर कोई इंसान रोज थोड़ा-थोड़ा काम टालता है, तो यह धीरे-धीरे उसकी आदत बन जाती है. फिर वह सिर्फ बड़े काम ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे जरूरी काम भी टालने लगता है. जैसे किसी को फोन करना, बिल भरना, डॉक्टर के पास जाना या जरूरी ईमेल भेजना. धीरे-धीरे ऐसे कामों का ढेर लग जाता है और तनाव भी बढ़ने लगता है.

इस आदत से कैसे बचा जा सकता है?
काम टालने की आदत को बदला जा सकता है. सबसे आसान तरीका है कि बड़े काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें. खुद से यह न कहें कि पूरा काम करना है, बल्कि सिर्फ पहला छोटा कदम उठाइए. साथ ही, मोबाइल और सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाकर रखें. एक समय तय करें और उसी समय काम शुरू करें. शुरुआत हो जाने के बाद अक्सर काम करना पहले से आसान लगने लगता है.

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हर इंसान कभी न कभी काम टालता है. यह एक सामान्य आदत है, लेकिन अगर यह रोज की बात बन जाए, तो यह पढ़ाई, नौकरी, पैसे और रिश्तों पर भी असर डाल सकती है. इसलिए अगली बार जब आपके मन में आए कि कल कर लेंगे यार...", तो एक बार खुद से पूछिए कि क्या सच में कल करेंगे, या फिर यह सिर्फ मन का बहाना है? क्योंकि कई बार सफलता सिर्फ इस बात पर निर्भर करती है कि आपने काम शुरू कब किया, न कि खत्म कब किया.

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