क्यों घंटों तक दांतों में सिगरेट दबाकर खड़ी रहती हैं चीन की एयर होस्टेस?

चीन की एयर होस्टेस मुंह में चॉपस्टिक दबाकर किसी अजीब परंपरा का पालन नहीं करतीं, बल्कि यह उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग का हिस्सा होता है. इसका मकसद चेहरे के मसल को ट्रेन करना, सही तरीके से स्माइल करना और यात्रियों के पॉजिटिव व्यवहार करना है.

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चीन में एयर होस्टेस और कस्टमर से जुड़े कई नौकरियों में स्माइल के तरीके पर खास ध्यान दिया जाता है. ( Photo: ITG) चीन में एयर होस्टेस और कस्टमर से जुड़े कई नौकरियों में स्माइल के तरीके पर खास ध्यान दिया जाता है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST

एयर होस्टेस की नौकरी काफी प्रतिष्ठित और मुश्किल नौकरियों में गिनी जाती है. यात्रियों की सुरक्षा से लेकर उनकी सुविधा का ध्यान रखना, हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहना और प्रोफेशनल बिहेवियर बनाए रखना इस काम का अहम हिस्सा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीन में एयर होस्टेस बनने की ट्रेनिंग के दौरान कुछ ट्रेनी को घंटों तक अपने दांतों के बीच पेन, पेंसिल, सिगरेट और चॉपस्टिक दबाकर खड़ा रहना पड़ता है? यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे एक मकसद छिपा होता है.

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आखिर सिगरेट का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
दरअसल, यहां सिगरेट पीने की बात नहीं हो रही है. चीन के कुछ एविएशन ट्रेनिंग संस्थानों में ट्रेनी एयर होस्टेस को चेहरे पर सही मुस्कान बनाए रखने की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके लिए उन्हें दांतों के बीच एक सिगरेट या सिगरेट जैसी पतली वस्तु दबाकर खड़ा किया जाता है. इस ट्रेनिंग का मकसद यह होता है कि ट्रेनी के होंठ और चेहरे के मसल एक फिक्स पोजीशन में रहें. इससे उन्हें लंबे समय तक स्वाभाविक और अच्छी स्माइल बनाए रखने की आदत पड़ती है.

दरअसल, एयर होस्टेस को अक्सर कई घंटों की फ्लाइट में यात्रियों से लगातार बातचीत करनी पड़ती है. ऐसे में उनका बिहेवियर और फेशियल एक्सप्रेशन यात्रियों के एक्सपीरियंस को प्रभावित करते हैं. यही कारण है कि एयरलाइंस ट्रेनिंग के दौरान स्माइल, बॉडी लैंग्वेज और प्रोफेशनल रिप्रेजेंशन पर काफी ध्यान देती है. सिगरेट को दांतों के बीच रखने से होंठों की शेप अच्छी बनी रहती है, जिससे ट्रेनी को सही स्माइल पोजीशन की ट्रेनिंग मिलती है. कई बार इसके साथ शीशे के सामने खड़े होकर चेहरे के हावभाव पर भी काम कराया जाता है.

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सिर्फ स्माइल ही नहीं, कई और कठिन ट्रेनिंग भी
चीन की एयर होस्टेस ट्रेनिंग केवल स्माइल तक सीमित नहीं होती. ट्रेनी को चलने, बैठने, खड़े होने और यात्रियों से बातचीत करने के तरीके की भी विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. कुछ संस्थानों में सिर पर किताब रखकर चलने की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि बॉडी बैलेंस और सही पोस्चर में रहे. वहीं, कई बार घुटनों के बीच कागज या अन्य वस्तु रखकर बैठने की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि बैठने का तरीका प्रोफेशनल दिखाई दे. 

ट्रेन अटेंडेंट्स भी करती हैं यह ट्रेनिंग
चीन में यह अभ्यास केवल एयर होस्टेस तक सीमित नहीं है. हाई-स्पीड ट्रेनों में काम करने वाले कई अटेंडेंट्स को भी इसी तरह की ट्रेनिंग दी जाती है. उनका मकसद भी यात्रियों के साथ अच्छा बिहेवियर और पॉजिटिव माहौल बनाए रखना होता है.

क्यों जरूरी मानी जाती है 'आठ दांतों वाली मुस्कान'?
चीन में एयर होस्टेस और कस्टमर से जुड़े कई नौकरियों में स्माइल के तरीके पर खास ध्यान दिया जाता है. वहां एक ऐसी स्माइल को सबसे बेहतर माना जाता है, जिसमें मुस्कुराते समय सामने के करीब आठ दांत साफ दिखाई दें. इसे ही एट-टीथ स्माइल या आठ दांतों वाली मुस्कान कहा जाता है.

माना जाता है कि ऐसी स्माइल सामने वाले व्यक्ति को अपनापन, सम्मान और पॉजिटिव एनर्जी का एहसास कराती है. जब कोई एयर होस्टेस इस तरह स्माइल करती हैं, तो यात्री खुद को ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करते हैं. इस स्माइल को  डेवलप करने के लिए ट्रेनी को चॉपस्टिक दांतों के बीच दबाकर ट्रेन कराया जाता है. इससे चेहरे के मसल सही तरीके से काम करना सीखती हैं और मुस्कुराते समय होंठों का आकार भी संतुलित रहता है. लगातार ट्रेनिंग के बाद यह मुस्कान उनकी आदत बन जाती है, जिससे वे लंबे समय तक भी बिना थके चेहरे पर एक गर्मजोशी भरी मुस्कान बनाए रख पाती हैं.

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सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं तस्वीर
समय-समय पर चीन की एयर होस्टेस ट्रेनिंग की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. इनमें ट्रेनी एयर होस्टेस को दांतों में सिगरेट दबाए, सिर पर किताब रखे या एक जैसी पोजिशन में खड़े देखा जा सकता है. इन तस्वीरों को देखकर कई लोग हैरान हो जाते हैं, क्योंकि पहली नजर में यह समझना मुश्किल होता है कि ऐसा क्यों कराया जा रहा है. हालांकि ट्रेनी का कहना है कि यह ट्रेनिंग केवल चेहरे के मसल और स्माइल को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है.

समय के साथ बदल रही हैं ट्रेनिंग तकनीक
हाल के वर्षों में कई एयरलाइन ट्रेनिंग संस्थानों ने सिगरेट की जगह प्लास्टिक की छड़, चॉपस्टिक या अन्य सुरक्षित वस्तुओं का उपयोग शुरू कर दिया है. इसका उद्देश्य वही है. चेहरे के मसल को सही पोजिशन में रखने का अभ्यास कराना. इसके बावजूद सिगरेट वाली तस्वीर आज भी इंटरनेट पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनती हैं और लोगों को हैरान कर देते हैं.
 

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