अगर आपने कभी अपने घर की छत या आसपास की इमारतों पर नजर डाली होगी, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी. लगभग हर जगह पानी की टंकी काले रंग की ही दिखाई देती है. सफेद, नीली या हरी टंकियां भी बाजार में मिलती हैं, लेकिन सबसे ज्यादा काली टंकियां ही क्यों लगाई जाती हैं? क्या यह सिर्फ फैशन है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण छिपा है? दिलचस्प बात यह है कि काला रंग सिर्फ दिखने के लिए नहीं चुना जाता, बल्कि इसके पीछे कई ऐसे फायदे हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता.
सबसे बड़ी वजह- सूरज की रोशनी को रोकना
पानी की टंकी पूरे दिन धूप और खुले आसमान के नीचे रहती है. अगर टंकी का रंग हल्का हो, तो सूरज की रोशनी अंदर तक आसानी से पहुंच सकती है. इससे पानी में शैवाल (Algae) और छोटे-छोटे जीव पनपने लगते हैं, जिससे पानी जल्दी गंदा हो सकता है. वहीं, काले रंग की टंकी सूरज की रोशनी को अंदर जाने से काफी हद तक रोक देती है. जब रोशनी कम पहुंचेगी, तो शैवाल बनने की संभावना भी कम होगी. यही वजह है कि पानी लंबे समय तक साफ रहने में मदद मिलती है. अगर टंकी का रंग हल्का हो और उसमें रोशनी आसानी से पहुंच जाए, तो पानी के अंदर शैवाल (Algae) और दूसरे सूक्ष्म जीव तेजी से बढ़ सकते हैं.
बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा भी कम
पानी में कई तरह के माइक्रोऑर्गेनिस्म मौजूद हो सकते हैं. जब उन्हें नमी और रोशनी दोनों मिल जाती हैं, तो उनकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है. काली टंकी के अंदर अंधेरा बना रहता है. ऐसे माहौल में कई तरह माइक्रोऑर्गेनिस्म आसानी से नहीं पनप पाते. यही वजह है कि पानी को सुरक्षित रखने के लिए भी काले रंग की टंकी को बेहतर माना जाता है.
प्लास्टिक की उम्र भी बढ़ती है
आज ज्यादातर पानी की टंकियां प्लास्टिक से बनती हैं. सूरज से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें धीरे-धीरे प्लास्टिक को कमजोर कर सकती हैं. काली टंकी बनाने में ऐसे पदार्थ मिलाए जाते हैं जो अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा देने में मदद करते हैं. इससे टंकी जल्दी खराब नहीं होती और ये ज्यादा दिन तक चलती है. यही कारण है कि कंपनियां भी काले रंग की टंकियों पर ज्यादा भरोसा करती हैं.
क्या काली टंकी का पानी ज्यादा गर्म हो जाता है?
यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है. विज्ञान के अनुसार काला रंग गर्मी ज्यादा सोखता है. इसलिए धूप में काली टंकी का बाहरी हिस्सा जल्दी गर्म हो सकता है. लेकिन आजकल ज्यादातर अच्छी क्वालिटी की टंकियां कई परतों में बनाई जाती हैं. इन परतों की वजह से बाहर की गर्मी सीधे पानी तक नहीं पहुंचती. इसलिए पानी जरूरत से ज्यादा गर्म नहीं होता.
फिर सफेद या नीली टंकियां क्यों बिकती हैं?
बाजार में अलग-अलग रंगों की टंकियां इसलिए मिलती हैं क्योंकि हर कंपनी अपनी डिजाइन और जरूरत के हिसाब से उन्हें बनाती है. कुछ टंकियों में अंदर की परत काली होती है और बाहर का रंग सफेद, नीला या हरा रखा जाता है. बाहर का हल्का रंग धूप को कुछ हद तक वापस रिफ्लेक्ट करता है, जबकि अंदर की काली परत रोशनी को पानी तक पहुंचने से रोकती है.
क्या सिर्फ भारत में ही काली टंकियां होती हैं?
नहीं, दुनिया के कई देशों में भी काले या गहरे रंग की पानी की टंकियों का इस्तेमाल किया जाता है. खासकर उन जगहों पर जहां तेज धूप पड़ती ह. हालांकि कुछ देशों में मौसम और जरूरत के हिसाब से हल्के रंग की मल्टी-लेयर टंकियां भी इस्तेमाल की जाती हैं.
क्या टंकी का रंग ही सब कुछ तय करता है?
बिल्कुल नहीं, अगर टंकी की सफाई समय पर नहीं होगी, ढक्कन खुला रहेगा या पाइपलाइन गंदी होगी, तो किसी भी रंग की टंकी का पानी दूषित हो सकता है. इसलिए रंग के साथ-साथ टंकी की नियमित सफाई भी उतनी ही जरूरी है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पानी की टंकी की सफाई कम से कम हर 6 महीने में एक बार जरूर करानी चाहिए.
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