कई बार टिकट करवाते वक्त वेटिंग बहुत कम होती है तो लगता है कि टिकट कंफर्म हो जाएगी, लेकिन वेटिंग 1 या दो पर आकर अटक जाती है. क्या आप जानते हैं ऐसा होने के पीछे वजह कई बार इमरजेंसी कोटा भी होता है. इमरजेंसी कोटा की वजह से 1-2 वेटिंग वाली टिकट भी कंफर्म नहीं हो पाती है. तो आज समझते हैं कि आखिर ये इमरजेंसी कोटा है क्या, जो कई बार टिकट कंफर्म न होने की वजह बनती है. साथ ही जानते हैं कि आखिर वेटिंग लिस्ट कंफर्म ना होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं...
होता क्या है इमरजेंसी कोटा?
इमरजेंसी कोटे को 'तत्काल वीआईपी कोटा' भी कहा जा सकता है. इसके तहत कुछ वीआईपी लोगों को मौका मिलता है. इसके जरिए वीआईपी या वीवीआईपी यात्रियों के रिजर्व बर्थ दी जाती है, जिनकी यात्रा का प्लान जर्नी से कुछ देर पहले बनता है. इस कोटे में सांसद, विधायक या फिर कोई शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिश पर सीटें दी जाती हैं. जब वीआईपी हस्तियां अचानक से ट्रेन से जाने का प्लान बनाते हैं तो चार्ट बनने से पहले उन्हें कुछ अलग से रिजर्व सीटों में सीट दी जाती है.
जब ट्रेन का चार्ट तैयार होता है, तो रेलवे का कंप्यूटर सिस्टम सबसे पहले इन कोटा की सीटों को ब्लॉक करता है. अगर ये सीटें खाली रह जाती हैं, तभी ये वेटिंग लिस्ट वाले सामान्य यात्रियों को अलॉट की जाती हैं. यही वजह है कि चार्ट बनने के बाद भी अक्सर वेटिंग लिस्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. इस वजह से लास्ट की वेटिंग लिस्ट वालों की सीट कंफर्म नहीं हो पाती है.
किन वजहों से अटक जाती है वेटिंग सीट?
रेलवे का जो 'सीक्रेट एल्गोरिदम' है, उसमें डेस्टिनेशन के आधार पर भी सीट को कंफर्म किया जाता है. अगर कोई यात्री लंबी दूरी की यात्रा कर रहा होता है, तो सिस्टम उसे प्राथमिकता देने की कोशिश करता है. ऐसे में कई बार कम दूरी वाली टिकट रह जाती है.
इसके साथ ही HO कोटा की वजह से भी टिकट वेटिंग में रह जाती है. ये रेलवे का सबसे पावरफुल कोटा है. रेलवे के बड़े-बड़े अफसर लोगों और वीवीआई टाइप यात्रियों के लिए ये रिजर्व होता है.
वहीं, ज्यादा डिमांड, कंफर्म टिकट न रद्द होने, अलग-अलग कोटा डिमांड की वजह से कई बार वेटिंग टिकट कंफर्म नहीं हो पाती है.
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