आज के समय में अगर किसी से पूछा जाए कि सबसे ज्यादा समय मोबाइल पर किस काम में बीतता है, तो सोशल मीडिया के बाद एक जवाब अक्सर मिलता है- ऑनलाइन शॉपिंग. कई लोग जरूरत का सामान खरीदते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी खास जरूरत के भी रोज ई-कॉमर्स ऐप खोलकर नए-नए प्रोडक्ट देखते रहते हैं. सेल का नोटिफिकेशन आते ही कार्ट भर जाता है और बाई नाउ पर क्लिक करने से खुद को रोक नहीं पाते.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो लोग ऑनलाइन शॉपिंग के दीवाने होते हैं, उनके पर्सनैलिटी में क्या खास बात होती है? क्या वे सिर्फ खरीदारी पसंद करते हैं या इसके पीछे साइकोलॉजी भी काम करता है? कई रिसर्च बताती हैं कि हमारी शॉपिंग की आदतें हमारे सोचने के तरीके,फीलिंग और फैसले लेने के तरीके के बारे में काफी कुछ बताती हैं. साइकोलॉजी के अनुसार, जो लोग ऑनलाइन शॉपिंग ऐप पर घंटों नए गैजेट, कपड़े, ब्यूटी प्रोडक्ट या होम डेकोर की चीजें देखते रहते हैं. उन्हें हर नया ट्रेंड अट्रैक्ट करता है और वे सबसे पहले उसे अपनाना चाहते हैं.
खरीदारी से मिलता है खुशी का एहसास
साइकोलॉजिस्ट नवीन गौतम कहते हैं कि जब कोई इंसान अपनी पसंद की चीज खरीदता है, तो दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल रिलीज होता है. इसे फील गुड हार्मोन भी कहा जाता है. यही कारण है कि ऑर्डर प्लेस करने के बाद या पार्सल मिलने पर लोगों को खुशी महसूस होती है. इसी वजह से कुछ लोग तनाव, बोरियत या उदासी के समय भी ऑनलाइन शॉपिंग करने लगते हैं. इससे उन्हें कुछ समय के लिए अच्छा महसूस होता है. हालांकि अगर यह आदत जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो बाद में पछतावा और आर्थिक नुकसान भी हो सकता है.
ऑफर और डिस्काउंट जल्दी करते हैं अट्रैक्ट
'70% छूट', 'लिमिटेड टाइम डील' या 'ओनली टू लेफ्ट' जैसे मैसेज लोगों के फैसलों को तेजी से प्रभावित करते हैं. ऐसे में इंसान को लगता है कि अगर उसने अभी शॉपिंग नहीं की, तो वह कोई बड़ा मौका खो देगा. इसे फोमो कहा जाता है. यही वजह है कि कई लोग जरूरत न होने के बावजूद सिर्फ डिस्काउंट देखकर सामान खरीद लेते हैं.
फैसले जल्दी लेते हैं ये लोग
साइकोलॉजिस्ट नवीन गौतम कहते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग पसंद करने वाले कई लोग तुरंत फैसला लेने वाले होते हैं. अगर उन्हें कोई प्रोडक्ट पसंद आ जाए, तो ज्यादा सोचने के बजाय तुरंत ऑर्डर कर देते हैं. हालांकि हर व्यक्ति ऐसा नहीं होता. कुछ लोग घंटों तक रिव्यू पढ़ते हैं, कीमतों की तुलना करते हैं और फिर खरीदारी करते हैं. ऐसे लोग समय बचाने में विश्वास रखते हैं. उन्हें बाजार की भीड़, ट्रैफिक और लंबी लाइन में लगना पसंद नहीं होता. घर बैठे कुछ ही मिनटों में सामान ऑर्डर करना उन्हें ज्यादा आसान और सुविधाजनक लगता है. यानी कई बार ऑनलाइन शॉपिंग का शौक सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि सुविधाजनक लाइफस्टाइल का हिस्सा भी होता है.
सोशल मीडिया का भी पड़ता है असर
आज इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब और फेसबुक पर हर दिन हजारों प्रोडक्ट दिखाई देते हैं. इन्फ्लुएंसर्स नए-नए सामान इस्तेमाल करते हुए नजर आते हैं. बार-बार किसी चीज को देखने के बाद लोगों के मन में उसे खरीदने की इच्छा बढ़ने लगती है. साइकोलॉजी में इसे मेयर एक्सपोजर इफेक्ट कहा जाता है. यानी जितनी बार कोई चीज नजर आती है, उतनी ही ज्यादा पसंद आने लगती है.
क्या ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग करना चिंता की बात है?
हर दिन ऑनलाइन शॉपिंग करना जरूरी नहीं कि गलत हो. अगर खरीदारी आपकी जरूरत, बजट और योजना के अनुसार है, तो इसमें कोई समस्या नहीं है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति बिना जरूरत के बार-बार सामान खरीद रहा है, हर सेल में पैसे खर्च कर देता है, बाद में पछताता है या कर्ज लेकर शॉपिंग करने लगता है, तो यह कम्पलशिप बाइंग बिहेवियर यानी अनियंत्रित खरीदारी की आदत का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर माना जाता है.
क्या कहती है रिसर्च?
अमेरिका की बेलोर यूनिवर्सिटी की रिसर्च और जर्नल ऑफ कंज्यूमर साइकोलॉजी में प्रकाशित कई स्टडीज के अनुसार, कुछ लोगों के लिए खरीदारी सिर्फ जरूरत पूरी करने का तरीका नहीं होती, बल्कि यह भावनाओं को संभालने का भी एक माध्यम बन जाती है. वहीं ऑनलाइन शॉपिंग को आसान बनाने वाले फीचर्स, जैसे वन-क्लिक पेमेंट, फ्री डिलीवरी और लगातार मिलने वाले ऑफर, खरीदारी की इच्छा को और बढ़ा सकते हैं.
ऑनलाइन शॉपिंग पसंद करना कोई बुरी बात नहीं है. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आप नई चीजें पसंद करते हैं, सुविधा को महत्व देते हैं और ट्रेंड के साथ चलना चाहते हैं. लेकिन अगर शॉपिंग जरूरत से ज्यादा होने लगे और उसका असर आपकी सेविंग, बजट या मेंटल हेल्थ पर पड़ने लगे, तो यह आदत चिंता का कारण बन सकती है.
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