मंदिर जाते वक्त बद्रीनाथ के पुजारी को क्यों दी जाती है खास सिक्योरिटी?

बद्रीनाथ मंदिर के रावल का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके लिए कहा जा रहा है कि मंदिर जाते वक्त उन्हें खास सिक्योरिटी दी जाती है.

Advertisement
बद्रीनाथ के रावल को मंदिर जाते वक्त खास सुरक्षा दी जाती है. (Photo: Youtube/ukdevdarshan0 बद्रीनाथ के रावल को मंदिर जाते वक्त खास सुरक्षा दी जाती है. (Photo: Youtube/ukdevdarshan0

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:31 PM IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिख रहा है कि बद्रीनाथ के पुजारी को कड़ी सिक्योरिटी में मंदिर तक ले जाया जा रहा है. वीडियो को लेकर कहा जा रहा है कि उन्हें खास तरह की सिक्योरिटी दी जाती है और उत्तराखंड  सरकार की ओर से भी उन्हें विशेष दर्जा दिया जाता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर बद्रीनाथ के रावल को सरकार की ओर से कैसी सुरक्षा मिलती है, क्या उन्हें स्टेट गेस्ट का दर्जा हासिल है, उनकी सैलरी कितनी होती है और उनका चयन कैसे होता है?

Advertisement

कौन होते हैं बद्रीनाथ के रावल?

बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी को 'रावल' कहा जाता है. परंपरा के अनुसार रावल हमेशा केरल के नंबूदरी (Namboodiri) ब्राह्मण समुदाय से चुने जाते हैं. माना जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत आदि शंकराचार्य ने उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों को मजबूत करने के लिए की थी. रावल को संस्कृत और वैदिक कर्मकांड का गहरा ज्ञान होना चाहिए और वह वैष्णव परंपरा का अनुयायी और अविवाहित (ब्रह्मचारी) होना चाहिए. इसके लिए मंदिर समिति की ओर से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं, जिसके बाद उन्हें सेलेक्ट किया जाता है. 

क्यों मिलती है सिक्योरिटी?

कहा जाता है कि जब रावल पूजा के लिए मंदिर जाते हैं तो वो नहाकर और साफ कपड़े पहनकर ऐसा करने जाते हैं. उस वक्त वो किसी के भी संपर्क में ना आए, इसलिए उन्हें सुरक्षा दी जाती है.  इसके अलावा बद्रीनाथ धाम की यात्रा अवधि के दौरान स्थानीय प्रशासन और उत्तराखंड पुलिस उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है. मंदिर के गर्भगृह, विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और वीआईपी यात्राओं के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की जाती है. 

Advertisement

इस बारे में जब हमने बद्रीनाथ मंदिर के पुजारी बिपिन डिमरी से बात की तो उन्होंने बताया, 'बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी दिन में चार बार मंदिर में पूजा के लिए जाते हैं. वे भोग और आरती के लिए बार-बार मंदिर में जाते हैं. वे जितनी बार मंदिर में जाते हैं, उन्हें हर बार नहाना पड़ता है और वो धुले-हुए साफ कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश करते हैं. जब वे मंदिर में जाते हैं तो वो इस दौरान किसी भी चीज को छूने से बचते हैं और कोशिश की जाती है कि इस दौरान कोई भी उन्हें ना छुए. ये सिर्फ शुद्धीकरण के लिए होता है.'

साथ ही बिपिन डिमरी ने बताया कि जब रावल जी मंदिर में जाते हैं तो उन्हें प्रशासन के लोग मंदिर तक पहुंचाने में मदद करते हैं ताकि वो आसानी से मंदिर तक पहुंच जाएं और शुद्धिकरण का नियम भी फॉलो हो जाए. इसके अलावा उन्होंने बताया कि ये एक नॉर्मल प्रोसेस है और मुख्य पुजारी जी के साथ सोने की छड़ लेकर भी एक शख्स आगे चलता है और वो मंदिर प्रशासन की ही कोई व्यक्ति होता है.

सिक्योरिटी के अलावा उन्हें मंदिर में पूजा के लिए विशेष अधिकार मिलते हैं. 1939 से पहले मंदिर में आने वाले चढ़ावे और कई प्रशासनिक अधिकार रावल के पास थे. लेकिन बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम लागू होने के बाद मंदिर का प्रशासन मंदिर समिति के अधीन आ गया. अब वे सिर्फ धार्मिक कार्य ही करते हैं. 

Advertisement

रावल का चयन कैसे होता है?

यह पद वंशानुगत नहीं है. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और उत्तराखंड सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्ति होती है. जब पद खाली होता है तो योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे जाते हैं. पहले नायब रावल (Deputy Rawal) की नियुक्ति की जाती है और सामान्य परिस्थितियों में रिक्ति होने पर नायब रावल को ही मुख्य रावल बनाया जाता है. यह व्यवस्था बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम, 1939 में भी दर्ज है. 

क्या रावल को सैलरी मिलती है?

रावल मंदिर समिति के वेतनभोगी पदाधिकारी होते हैं. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम के अनुसार रावल और नायब रावल के वेतन एवं अन्य भत्ते मंदिर समिति राज्य सरकार की मंजूरी से तय करती है. 

क्या मिलता है स्टेट गेस्ट का दर्जा?

कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें उत्तराखंड सरकार की ओर से 'स्टेट गेस्ट' का दर्जा प्राप्त है. इस वजह से उन्हें काफी सुविधाएं सरकार की ओर से मिलती है. सरकार की ओर से मंदिर आने जाने के वक्त उन्हें सिक्योरिटी भी दी जाती है. रावल को किसी भी प्रकार की स्थायी Z, Z+ या Y श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त होने का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. लेकिन, मंदिर जाते वक्त उन्हें समिति और सरकार की ओर से सुरक्षा दी जाती है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »