संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं करती हैं अनोखा तप, भ्रामरी माता मंदिर में यह है मान्यता

उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित भ्रामरी माता मंदिर में नवरात्रि के दौरान संतान प्राप्ति की कामना लेकर दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से तप और पूजा करने पर निःसंतान दंपतियों की मनोकामना पूरी होती है. मंदिर परिसर में विशेष अनुष्ठान और पूजा जारी है. बड़ी संख्या में भक्त माता के दरबार में आस्था और विश्वास के साथ मत्था टेक रहे हैं.

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श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास.(Photo: Screengrab) श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास.(Photo: Screengrab)

जगदीश पाण्डेय

  • बागेश्वर,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:37 PM IST

उत्तराखंड के बागेश्वर में चैत्र नवरात्रि के दौरान संतान प्राप्ति की कामना को लेकर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. सप्तमी की रात निसंतान महिलाएं भ्रामरी माता मंदिर में विशेष तप करती हैं. इस परंपरा के तहत महिलाएं सूर्यास्त से सूर्योदय तक लगभग 14 घंटे हाथ में जलता हुआ दिया थामे खड़ी रहती हैं और माता से संतान सुख की प्रार्थना करती हैं.

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मंदिर परिसर में पूरी रात भजन-कीर्तन और जागरण का माहौल रहता है. श्रद्धालु महिलाएं संकल्प लेकर मंदिर पहुंचती हैं और पूरी रात दीप जलाकर खड़ी रहती हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से यह व्रत रखने वाली महिला को एक वर्ष के भीतर संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि माता की कृपा से कई परिवार इस परंपरा के चमत्कार के साक्षी बन चुके हैं. इसी विश्वास के साथ हर वर्ष बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पहुंचती हैं और पूरी श्रद्धा के साथ यह तप करती हैं.

पुजारी ने बताई परंपरा की मान्यता

मंदिर के प्रमुख पुजारी पूरन तिवारी ने बताया कि यह प्राचीन परंपरा चैत्र नवरात्रि की सप्तमी और अष्टमी को निभाई जाती है. महिलाएं सूर्यास्त के समय मंदिर पहुंचकर संकल्प लेती हैं और पूरी रात जागरण में दिया जलाए खड़ी रहती हैं.

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उन्होंने बताया कि यह तप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है. पूरी रात भक्ति और भजन के बीच महिलाएं माता से संतान प्राप्ति की कामना करती हैं.

श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास

श्रद्धालु धना देवी, रूचि और अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि हर वर्ष कई निसंतान महिलाएं सप्तमी की रात सूर्यास्त से अगले दिन सुबह तक हाथ में दिया थामे खड़ी रहती हैं.

स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, इस तप को करने से कई महिलाओं को संतान प्राप्ति हुई है. इसी विश्वास और आस्था के कारण यह परंपरा वर्षों से लगातार निभाई जा रही है.

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