जब हमारा पसंदीदा छुप्पन छुपाई Ice Pice नहीं I Spy निकला...

हम सबने अपने बचपन में खूब छुप्पन छुपाई खेली है. हालांकि यह पता अब जाकर लगा कि अब तक हम इसे गलत ही जानते आ रहे थे...

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बचपन में सभी ने खूब खेला है यह खेल बचपन में सभी ने खूब खेला है यह खेल

विष्णु नारायण

  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

हम-आप सोशल मीडिया के चरम दौर में जी रहे हैं. जहां ट्विटर पर ट्रेंडिंग खबरें हैं. फेसबुक पर वायरल कंटेंट है और व्हाट्सएप पर चलने वाले चुटीले जोक्स हैं. माता के संदेश हैं. उन्हें अधिक-से-अधिक साझा करने पर बरसने वाली कृपा है. अभी बीते दिनों मेरे व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया. इस मैसेज को देख कर मेरी बांछें खिल गईं. हालांकि मुझे खुद भी नहीं पता कि बांछें कहां होती हैं. मन बचपन के दिनों में गुड़गुड़ गोते लगाने लगा. दरअसल, यह छुप्पन छुपाई से जु़ड़ा मैसेज था.

छुप्पन छुपाई जिसे हम जैसे हिंदी ओढ़ने-बिछाने वाले और अंग्रेजी में By God - By Mother करने वाले और बात-बात में अपने स्कूलों में पढ़ने की धौंस दिखाने वाले भी इस सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले खेल को ( Ice Pice) आइस पाइस कहा करते.
 
तो हुआ कुछ ऐसा कि बीते दिन जब एक कहीं-कहीं से होते हुए हमारे फोन पर आया तो हम सोचने पर मजबूर हो गए. उस मैसेज में लिखा था कि जिसे हम अब तक Ice Pice कहते रहे हैं दरअसल, वह I Spy है. इस मैसेज को पढ़ते ही चेहरे पर एक अनकही और विस्मयी मुस्कान आ गई. दिमाग में खुजली सी होने लगी. मन फिर से उन्हीं अंधेरी गलियों और बियाबान में भटकने लगा जहां मेरा बचपन बीता था.

हो सकता है कि ऐसा महसूस करने वाला मैं हूं या फिर मेरे जैसे हजारों-लाखों हों. उन दिनों की बात ही कुछ और थी. शाम होते ही बच्चे पुराने खंडहरनुमा फैक्ट्रियों या फिर खेत-डड़वार की ओर भागा करते. तब न फोन था और न फोन पर कटने वाली शामें थी. जो कुछ था वो जस्ट और रियल था. सौ फीसद खरा. बिना किसी मिलावट. हम पुवाल की ढेर में खुद को सांस रोककर कुछ ऐसे छिपा लिया करते कि अमेरिका की FBI भी न खोज पाए और दूसरों को ऐसे खोज लिया करते जैसे अपने मुजरिम को ब्योमकेश बख्शी.

चोर बने लड़के-लड़की का गिनती के दौरान आंखें खोल-खोल कर सबकी लोकेशन ट्रेस करना और गिनती पूरी करते ही अपने जानी दुश्मन को खोजना होता था. किसी के दिखते ही Ice Pice कहना और चोर पर धप्पा मारे जाने पर बच्चों का ऐसी-ऐसी जगहों से निकलना जिसकी कल्पना करके ही आज रोम-रोम रोमांचित हो उठता है. न कपड़ों के गंदे होने की परवाह और न ही अपनी जान जोखिम में डाल कर छत से कूद कर चोर को धप्पा मार देना. अगर इसी रफ्तार से जारी रखते तो ओलम्पिक्स में देश का तो एक मेडल पक्का था.

अपने पसंदीदा के चोर हो जाने पर सबसे पहले बाहर आ जाना कि उसे कोई दिक्कत न हो. उसकी एक मुस्कान पर अपना सब-कुछ न्योछावर करने को तैयार. बाकी बचे लोगों की लोकेशन को आंखों के इशारे से बता देना और फिर जल्दी से खुद चोर बन जाना ही खेल का सबसे इंटरेस्टिंग हिस्सा हुआ करता. कसम से बहुत याद आते हैं वे दिन. इस Ice Pice माफ कीजिएगा I Spy ने किन-किन मंजरों को फिर से आंखों के सामने लाकर खड़ा कर दिया.

वैसे शुक्रिया रहेगा टेक्नोलॉजी और व्हाट्सएप का कि उन्होंने फिर से हमें ये सब याद दिलाया और इनके माध्यम से हम एक बार फिर उनकी यादों के गलियारे से तरोताजा होकर वापस लौट आए हैं...

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