हिंदू मैरिज एक्ट की तर्ज पर बने मुस्लिम मैरिज एक्ट: मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड

तीन तालाक की लड़ी गई लंबी लड़ाई पर आज फैसले की घड़ी है. कोर्ट तीन तालाक को खत्म करके शरियत के मद्दे नजर हो. जिसमें तालाक की जो तीन महीने की प्रक्रिया हो उसके मद्दे नजर हो.

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तीन तालाक के खिलाफ मुस्लिम महिलाएं सड़क पर तीन तालाक के खिलाफ मुस्लिम महिलाएं सड़क पर

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 8:32 AM IST

तीन तलाक पर आज फैसले का दिन है. सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच तीन तालाक के मामले में आज सुबह 10.30 अपना फैसला सुनाएगी. ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा कि तलाक शरियत के लिहाज से हो और तीन तलाक से मिले निजात. हिंदू मैरिज एक्ट की तर्ज पर बने मुस्लिम मैरिज एक्ट.

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शाइस्ता अंबर ने aajtak.in से बातचीत करते हुए कहा कि आज की लड़ी गई लंबी लड़ाई पर आज फैसले की घड़ी है. कोर्ट तीन तलाक को खत्म करके शरियत के मद्दे नजर हो. जिसमें तलाक की जो तीन महीने की प्रक्रिया हो उसके मद्दे नजर हो. शरियत और कुरान में भी तलाक के लोकर तीन महीने की प्रक्रिया का उल्लेख है. ऐसे में सरकार इस प्रक्रिया को अपनाती है तो हम स्वागत करते हैं लेकिन  सरकार अगरशरियत के खिलाफ कोई कानून लाते हैं, तो हमें कुबूल नहीं है.

सरकार से हमारी मांग है कि हिंदू मैरिज एक्ट के तर्ज पर मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाना चाहिए. ताकि मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी कके साथ किसी तरह खिलवाड़ न हो सके. अक्सर देखा गया है कि तलाक के बाद मामला फैमली कोर्ट में चलता रहता है और मर्द दूसरी शादी करके ऐश करता है. ऐसे में अगर हिंदू मैरिज एक्ट की तरह मुस्लिम मैरिज एक्ट बनेगा तो ये आसान नहीं होगा.

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गौरतलब है कि 11 मई से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई 18 मई को खत्म हुई थी और कोर्ट ने अपने आदेश को सुरक्षित रखा लिया था. 5 जजों की बेंच इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी. कोर्ट में यह सुनवाई 6 दिनों तक चली.

मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में साफ किया था कि वह तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं है. सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक को 'दुखदायी' प्रथा करार देते हुए न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में 'मौलिक अधिकारों के अभिभावक के रूप में कदम उठाए.

 

 

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