राम मंदिर मामले में SC अपने पूर्व निर्णय पर विचार करेगा या नहीं, फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले यह तय होगा कि संविधान पीठ के साल 1994 के इस्माइली फारूकी मामले में दिए फैसले पर फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं? इसके बाद ही राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में टाइटल सूट पर विचार होगा.

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राम कृष्ण / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 10:25 AM IST

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में संविधान पीठ के साल 1994  के निर्णय पर फिर से विचार करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. शीर्ष अदालत जल्द ही इस मसले पर अपना फैसला सुनाएगी. इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बीच गरमागरम बहस देखने को मिली.

मामले में बहस के दौरान राजीव धवन ने विवादित टिप्पणी कर दी. उन्होंने कह दिया कि मस्जिद गिराने वाले हिन्दू तालिबानी थे. उनकी इस टिप्पणी पर हिन्दू पक्षकार भड़क गए. हिन्दू महासभा के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि अगर बर्बरता की निशानी और स्वाभिमान पर कलंक साफ करना तालिबानी कृत्य है, तो हां हम तालिबानी हैं. इस पर अदालत ने राजीव धवन और हरिशंकर जैन दोनों को ही कोर्ट का डेकोरम और शब्दों की अहमियत बताई.

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चीफ जस्टिस ने कहा कि शब्दों का प्रयोग सोच समझ कर करें. इस पर राजीव धवन ने कहा, 'मैं कोर्ट की टिप्पणी से असहमत हूं और मुझे असहमत होने का अधिकार है. इस बहस के दौरान एक और वकील भी उत्तेजित हो गए. लिहाजा अदालत ने धवन पर चिल्लाने वाले एक अन्य वकील को बाहर जाने को कह दिया.

दरअसल, में टाइटल सूट से पहले सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ इस पहलू पर सुनवाई कर रही है कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं? इससे पहले साल 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद में नमाज अदा करना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है. अदालत कहा कि पहले यह तय होगा कि संविधान पीठ के साल 1994 के इस्माइली फारूकी मामले में दिए फैसले पर फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं? इसके बाद ही टाइटल सूट पर विचार होगा.

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साल 1994 में पांच जजों की पीठ ने राम जन्मभूमि में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था, ताकि हिंदू पूजा कर सकें. पीठ ने यह भी कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में फैसला देते हुए विवादित भूमि का एक तिहाई हिस्सा हिंदू, एक तिहाई हिस्सा मुस्लिम और एक तिहाई हिस्सा राम लला विराजमान को दिया था.

मुस्लिम पक्ष की तरफ से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने तालिबान द्वारा बुद्ध की मूर्ति तोड़े जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि साल 1992 में मस्जिद गिराने वाले हिन्दू तालिबान थे.

मुस्लिम पक्ष की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि सरकार को इस मामले में निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने इसको तोड़ दिया. मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है. पिछली सुनवाई में शिया वक्फ बोर्ड ने कहा था कि हम इस महान देश में सौहार्द, एकता, शांति और अखंडता के लिए अयोध्या की विवादित ज़मीन पर मुसलमानों का हिस्सा राम मंदिर के लिए देने को राज़ी हैं.

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