शिवसेना ने कहा, तीन तलाक की तरह राम मंदिर निर्माण पर भी लाया जाए अध्यादेश

शिवसेना ने कहा कि तीन तलाक की तरह सरकार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भी ऐसा ही अध्यादेश लाना चाहिए. शिवसेना ने कहा कि अब केंद्र और उत्तर प्रदेश में आपकी पूर्ण बहुमत की सरकारें हैं, फिर भी प्रभु श्रीराम का वनवास क्यों खत्म नहीं हो रहा?

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उद्धव ठाकरे (फोटो- Getty Images) उद्धव ठाकरे (फोटो- Getty Images)

सना जैदी

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 7:33 PM IST

शिवसेना ने एक बार में तीन तलाक देने पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार के अध्यादेश लाने के फैसले का स्वागत किया है. शिवसेना ने गुरुवार को सरकार से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भी यही मार्ग अपनाने और अध्यादेश लाने के लिए कहा.

उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी ने कहा कि सरकार को देश के हिंदुओं की भावनाओं का ध्यान रखते हुए उनसे किए गए वादों में से कम से कम एक वादे को पूरा करने के लिए कदम उठाना चाहिए. गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एक बार में तीन तलाक देने की प्रथा को प्रतिबंधित करने के लिए एक अध्यादेश को मंजूरी दी है. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अध्यादेश लाने की जरूरत थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के तलाक-ए-बिद्दत को अवैध ठहराने के बावजूद यह जारी थी.

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शिवसेना ने अपने में कहा, सरकार ने एक बार में तीन तलाक देने को अपराध बनाकर मुस्लिम महिलाओं के जीवन में आजादी की सुबह सुनिश्चित की है. अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शंखनाद कर सत्ताधीशों को देखना चाहिए कि देश के हिंदुओं की जनभावना का भी सूर्योदय हो. केंद्र और महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी पार्टी ने कहा, राम मंदिर पर अध्यादेश लाएं और हिंदुओं से किया गया कम से कम एक वचन पूरा करें.

पहले गठबंधन की राजनीति की मजबूरियों के कारण समान नागरिक कानून, जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने और राम मंदिर निर्माण जैसे वायदे पूरे नहीं किए जा सके थे. पार्टी ने कहा, लेकिन अब केंद्र और उत्तर प्रदेश में आपकी पूर्ण बहुमत की सरकारें हैं, फिर भी प्रभु श्रीराम का वनवास क्यों खत्म नहीं हो रहा?

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राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का मसला अदालत में लंबित होने का ध्यान दिलाते हुए ने कहा कि अदालत जब फैसला देगी तब देगी लेकिन सरकार को हिंदुओं की भावनाओं से जुड़े मामले का हल निकाला चाहिए.

एक तरफ पार्टी ने जहां एक साथ देने पर लाए गए अध्यादेश का स्वागत किया वहीं आश्चर्य भी जताया कि उन मुसलमानों में इस कदम को कितना स्वीकार किया जाएगा जिनकी आंखों पर धर्म की पट्टी पड़ी हुई है और वे कट्टर हैं. किसी भी पार्टी और सरकार का नाम लिए बिना शिवसेना ने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति की वजह से भारत में इस मध्ययुग की कुरीति से मुस्लिम महिलाओं को मुक्त कराने की कोई ईमानदार कोशिश नहीं की गई.

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