ब्रिक्स: चीन की राह पर रूस, पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों पर साधी चुप्पी

चीन पहले से ही जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम गोवा डिक्लेरेशन में लाने का रास्ता बंद कर चुका था. लेकिन रूस ने भी पाकिस्तान के इन दोनों आतंकवादी संगठनों को लेकर भारत के प्रस्ताव पर चुप्पी साधे रखी.

Advertisement
पीएम मोदी-व्लादिमीर पुतिन पीएम मोदी-व्लादिमीर पुतिन

प्रियंका झा

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के बाद भले ही यह कहा हो कि एक पुराना दोस्त नए दोस्तों से बेहतर है लेकिन रूस भी अब चीन की राह चल पड़ा है. ब्रिक्स सम्मेलन में पाकिस्तान को आतंकवाद की वजह से अलग-थलग करने के मुद्दे पर रूस ने भारत का समर्थन करने की बजाय चुप्पी साधे रखी.

Advertisement

'टाइम्स ऑफ इंडिया' में छपी खबर के मुताबिक चीन पहले से ही जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम गोवा डिक्लेरेशन में लाने का रास्ता बंद कर चुका था. लेकिन रूस ने भी पाकिस्तान के इन दोनों आतंकवादी संगठनों को लेकर भारत के प्रस्ताव पर चुप्पी साधे रखी. जबकि ब्रिक्स में शामिल देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा घोषित आतंकवादी संगठनों की सूची को स्वीकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

रूस की चुप्पी के परिणामस्वरुप पाकिस्तान को उस तरह से घेर नहीं सका जैसा वह चाहता था. रूस के इस बदले रवैये की वजह उसके हाल ही में पाकिस्तान के साथ बढ़ी नजदीकी भी है. पाकिस्तान के साथ रूस ने एंटी- टेरर एक्सरसाइज बताकर कई सैन्य अभ्यास किए हैं.

अल-नुसरा का नाम घोषणापत्र में शामिल
भले ही रूस ने जैश-ए-मोहम्मद का नाम गोवा डिक्लेरेशन में शामिल करने में भारत की मदद न की हो लेकिन उसने सीरिया के जभात-अल-नुसरा संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित करने का समर्थन किया है. यह इसलिए क्योंकि रूस सीरिया में लगातार अल-नुसरा को अपना निशाना बना रहा है. अल-नुसरा संगठन सीरिया में बशर-अस असद की सरकार को गिराने के लिए लगातार विद्रोह छेड़े हुए है. अल-नुसरा की ही तरह संयुक्त राष्ट्र ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए तैयबा को भी प्रतिबंधित घोषित किया हुआ है. बता दें कि उरी और पठानकोट में हुए आतंकी हमलों के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने ही जिम्मेदारी ली थी.

Advertisement

गोवा डिक्लेरेशन के आने से ठीक एक दिन पहले व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी को यह आश्वासन दिया था कि वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे भारत के हितों को नुकसान हो. लेकिन विदेश मंत्रालय के सचिव अमर सिन्हा ने यह स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों को डिक्लेकेशन में शामिल करने को लेकर कोई एकमत नहीं था. क्योंकि इन संगठनों से दूसरे देशों को कोई नुकसान नहीं होता.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »