राहुल गांधी की ताजपोशी पर क्या बोलीं सोनिया, पढ़ें, बड़ी बातें

सोनिया ने बताया जब वो अध्यक्ष के तौर पर पहली बार भाषण देने आई थीं, तब वो घबराई हुई थीं, यहां तक कि उनके हाथ कांप रहे थे.

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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 16 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

कांग्रेस में आज से राहुल गांधी युग की शुरुआत हो गई है. अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी के आखिरी भाषण के साथ ही कांग्रेस पार्टी की कमान राहुल गांधी के हाथों में आ गई. लेकिन बतौर अध्यक्ष अपने आखिरी भाषण में सोनिया गांधी ने जहां अपने अतीत के दर्द को उकेरा, वहीं राहुल को आशीर्वाद भी दिया.

सोनिया गांधी के भाषण की मुख्य बातें:

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-राहुल मेरा बेटा है, उसकी तारीफ करना उचित नहीं लगता. पहले उन्होंने परिवार में हिंसा देखी, फिर राजनीति में उसने व्यक्तिगत हमले झेले, जिसने उन्हें और मजबूत और निडर बनाया है. मुझे राहुल की सहनशीलता पर गर्व है.

-सोनिया गांधी ने इस दौरान राजनीतिक तौर पर कांग्रेस पार्टी में बदलाव पर जोर दिया. उन्होंने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस में सुधार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने अंतर्मन में देखकर आगे बढ़ना पड़ेगा और खुद को भी दुरुस्त करना पड़ेगा.

-सोनिया गांधी ने कहा कि देश में भय का माहौल है.  आज जितनी बड़ी चुनौती है, उतनी शायद पहले कभी नहीं थी. सोनिया ने कहा कि आज संवैधानिक मूल्यों पर हमला हो रहा है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं.

-सोनिया ने ये भी कहा कि कांग्रेस का मकसद सत्ता या शोहरत नहीं है, बल्कि देश है. उन्होंने कहा कि अगर हम अपने उसूलों पर खरे नहीं उतरेंगे, तो आम जनता का साथ नहीं पाएंगे. ये नैतिक लड़ाई है, इसलिए हर त्याग और बलिदान के लिए तैयार रहना होगा.

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-अपने भाषण में और राजीव गांधी को भी याद किया. उन्होंने बताया कि इंदिरा की हत्या के बाद मैं अपने पति और बच्चों को राजनीति से दूर रखना चाहती थी. उन्होंने कहा कि मैं खुद भी राजनीति में नहीं आना चाहती थी, लेकिन इंदिरा और राजीव के बलिदान के लिए राजनीति में आई.

उन्होंने बताया कि जब इंदिरा की हत्या हुई तो मुझे मां खोने का गम हुआ. इंदिरा जी ने मुझे बेटी के रूप में अपनाया.

-सोनिया गांधी ने ये भी बताया कि जब उन्होंने . जब मुझे अध्यक्ष चुना गया और मैंने पहला भाषण दिया तो मैं घबराई हुई थी, यहां तक कि मेरे हाथ कांप रहे थे.

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