कांग्रेस से 'पंजा' छीनने के लिए चुनाव आयोग पहुंचे BJP नेता, दिया ये तर्क

बीजेपी नेता ने कहा है कि अगर कांग्रेस के चुनाव निशान- हाथ के पंजे को नहीं बदला जाता है तो इससे संविधान के अनुच्छेद 324 और रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट 1951 की धारा 130 के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का उल्लंघन होता रहेगा.

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कांग्रेस का चुनाव चिन्ह (फाइल फोटो) कांग्रेस का चुनाव चिन्ह (फाइल फोटो)

अनिंद्य बनर्जी

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 10:26 PM IST

दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता और पेशे से वकील अश्विनी उपाध्याय ने चुनाव आयोग से कांग्रेस का चुनाव चिह्न 'हाथ का पंजा' रद किए जाने की मांग की है. उपाध्याय के मुताबिक चुनाव के दिन मतदान केंद्र पर 100 मीटर की दूरी तक चुनाव चिह्न का प्रदर्शन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की दारा 130 और चुनाव आचार संहिता के नियम 4 का उल्लंघन है.

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इसी का हवाला देते हुए उपाध्याय ने चुनाव आयोग को लिखित याचिका देकर कांग्रेस का चुनाव चिह्न 'हाथ का पंजा' रद किए जाने की मांग की है. उनका कहना है कि इंसान के किसी भी अंग के चित्र को चुनाव चिह्न के तौर पर किसी भी राजनीतिक दल को अलॉट नहीं किया जाना चाहिए.  

उपाध्याय ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत से इस संबंध में मुलाकात की. उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने याचिका को देखने की बात कही है. उपाध्याय के मुताबिक उन्हें इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट भी जाना पड़ा तो वहां भी जाएंगे.

उपाध्याय का कहना है कि 'हाथ का पंजा' मानव अंग है और इसका प्रदर्शन मतदान के दिन वोटिंग से पहले और बाद में, मतदान केंद्र से 100 मीटर के अंदर और बाहर अक्सर किया जाता है. इससे किसी खास पार्टी के चुनाव चिह्न का प्रदर्शन होता है.

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उपाध्याय का तर्क है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 130 और चुनाव आचार संहिता के नियम के मुताबिक मानव शरीर का कोई भी अंग चुनाव चिह्न नहीं हो सकता, इसके बावजूद 1977 से कांग्रेस का चुनाव चिह्न 'हाथ का पंजा' बना हुआ है.

देश को आजादी मिलने के बाद कांग्रेस का चुनाव चिह्न कई बार बदल चुका है. 1950 में चुनाव आयोग ने कांग्रेस को दो बैलों की जोड़ी चुनाव चिह्न दिया था. 1969 में पार्टी के दो फाड़ होने के बाद चुनाव आयोग ने इस चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया. एक धड़े (ओल्ड कांग्रेस) को तिरंगे में चरखा चुनाव चिह्न दिया गया. वहीं इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस को गाय और बछड़ा चुनाव चिह्न आवंटित किया गया.

1977 में चुनाव आयोग ने गाय और बछड़े की जगह कांग्रेस को 'हाथ का पंजा' चुनाव चिह्न आवंटित किया.

उन्होंने कहा है कि छह राष्ट्रीय पार्टियों में से केवल एक को ही इंसानी शरीर के अंग का निशान दिया गया है. उन्होंने कहा है कि 75 राज्य स्तरीय दलों में से भी किसी को इंसानी शरीर का कोई अंग चुनावी निशान के तौर पर नहीं दिया गया है.

उन्होंने कहा है कि आचार संहिता साफ तौर पर कहती है कि मतदान की तारीख से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा. चुनाव के दिन भी मतदान स्थल के 100 मीटर के पास चुनाव निशान नहीं दिखाया जा सकता है, लेकिन कांग्रेसी उम्मीदवार अपनी हथेली दिखाकर अपने चुनाव निशान का प्रचार करते हैं.

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उन्होंने ऐसी घटनाओं का भी हवाला दिया है, जब चुनाव अधिकारी से कांग्रेसी उम्मीवारों और एजेंटों की इस हरकत की शिकायत की गई थी. अश्विनी का कहना है कि चुनाव अधिकारी ने असमर्थता जताई थी कि वह किसी को अपना हाथ दिखाने से नहीं रोक सकते हैं. उन्होंने कहा है कि 2007 में एमसीडी के चुनाव में दिल्ली के तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष रामबाबू शर्मा को इसी आधार पर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया था और बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया था.

अश्विनी का कहना है कि चुनाव के दिन भी कांग्रेसी उम्मीदवार और एजेंट हाथ हिलाकर अपने चुनाव निशान का प्रदर्शन करते हैं और वोट की अपील करते हैं. उन्होंने कहा है कि ऐसा कांग्रेस को विशिष्ट चुनाव निशान मिलने की वजह से हुआ है. उन्होंने कहा है कि इसे रोकने के लिए चुनाव आयोग को कांग्रेस का निशान बदलना चाहिए और हाथ के पंजे या हथेली को चुनाव निशानों की अपनी सूची से भी हटा लेना चाहिए.

बीजेपी नेता ने कहा है कि अगर - हाथ के पंजे को नहीं बदला जाता है तो इससे संविधान के अनुच्छेद 324 और रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट 1951 की धारा 130 के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का उल्लंघन होता रहेगा.

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