पुणे की फार्मा कंपनी का दावा- 2200 में से 3 दवाइयां कोरोना के इलाज में कारगर

इन तीन दवाइयों को ढूंढने का काम नोवलिड फार्मा के वैज्ञानिकों ने किया है. नोवलिड फार्मा के मुख्य साइंटिस्ट सुप्रीत देशपांडे ने आजतक को बताया कि उनकी कंपनी 2008 से गंभीर बीमारियों पर दवाइयां खोजने का काम करती आई है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 17 मई 2020,
  • अपडेटेड 8:24 AM IST

  • इन कारगर तीन दवाइयों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन शामिल नहीं
  • फार्मा कंपनी ने ह्यूमन ट्रायल के लिए DCGI से मांगी अनुमति

कोरोना वायरस के खिलाफ पूरी दुनिया युद्ध लड़ रही है, लेकिन अभी तक कोरोना को हराने में किसी भी देश को सफलता नहीं मिली है. कोरोना वायरस लगातार फैलता जा रहा है और लोगों को मौत की नींद सुलाता जा रहा है. ऐसे में सभी आस लगाए बैठे हैं कि कहीं से संजीवनी बूटी मिल जाए, जिससे कोरोना का संक्रमण रोक दिया जाए.

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अभी कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बनने में समय लगेगा. कोरोना वायरस पर कोई दवा खास असर नहीं कर रही है. लिहाजा सावधानी और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इस बीच तब उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी, जब पुणे की एक फार्मा रिसर्च कंपनी ने दावा किया कि उसने 2200 प्रकार की दवाइयों में से 42 दवाइयां ढूंढ निकालीं और फिर इन 42 दवाइयों में से ऐसी तीन दवाइयां खोजी हैं, जिनसे कोरोना वायरस का इलाज किया जा सकता है. हालांकि इन तीन दवाइयों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन शामिल नहीं है.

नोवलिड फार्मा कंपनी ने दावा किया कि दुनिया में कोरोना को मारने की दवा पहले से ही मौजूद है, लेकिन वो कौन-सी दवा है ये किसी को भी नहीं पता है. पुणे की फार्मा रिसर्च कंपनी की बात रामायण के उस प्रसंग की याद ताजा कराती है, जहां युद्धभूमि में रावण के बेटे मेघनाद के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे और उस तनाव के माहौल में हनुमान को द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहा गया था.

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इसके बाद जब हनुमान संजीवनी बूटी को लेने के लिए द्रोणागिरी पर्वत पहुंचे, तो वो पहचान नहीं पा रहे थे कि आखिर संजीवनी बूटी कौन सी है. लिहाजा वो पूरे द्रोणागिरि पर्वत को ही ले आए थे, जिसमें से वैद्य ने संजीवनी बूटी निकाली थी और लक्ष्मण होश में आए थे. इसी तरह आज कोरोना वायरस के इलाज में 2200 प्रकार की दवाइयां इस्तेमाल की जा सकती हैं, लेकिन इनमें से तीन दवाइयां सबसे ज्यादा कारगर साबित हो सकती हैं.

अब इन तीन दवाइयों को ढूंढने का काम नोवलिड फार्मा के वैज्ञानिकों ने किया है. नोवलिड फार्मा के मुख्य साइंटिस्ट सुप्रीत देशपांडे ने आजतक को बताया कि उनकी कंपनी 2008 से गंभीर बीमारियों पर दवाइयां खोजने का काम करती आई है.

25 मार्च से कोरोना की दवाई खोज रही कंपनी

साइंटिस्ट सुप्रीत देशपांडे के मुताबिक उनका काम यह पता लगाना है कि पहले से मान्यता प्राप्त कौन सी दवाई किस बीमारी के इलाज के लिए कारगर है. उनकी कंपनी 25 मार्च से कोरोना वायरस के इलाज में कारगर दवाएं ढूंढने में लगी है. इस दौरान यह पाया गया कि 2200 दवाइयां ऐसी हैं, जो किसी न किसी प्रकार से कोरोना जैसे वायरस का खात्मा करने में इस्तेमाल की जा सकती हैं, लेकिन इन 2200 दवाइयों में से सबसे कारगर और सटीक दवाई कौन-सी है, इसका पता लगाना बेहद मुश्किल काम था.

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इसके लिए नोवलिड फार्मा कंपनी के 20 साइंटिस्ट्स ने दिन-रात काम किया. इसके बाद तीन ऐसी दवाइयां पाई गईं, जो कोरोना के इलाज में सबसे ज्यादा कारगर हैं. अब इनका ह्यूमन ट्रायल होना है. इसके लिए कंपनी ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अनुमति मांगी है.

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