रेलमंत्री सुरेश प्रभु के सुस्त काम से चिंतित पीएमओ, काम तेज करने को कहा

प्रधानमंत्री कार्यालय ने रेल मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर रेलवे में विकास कार्यों की सुस्त चाल को लेकर आगाह किया है. पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्र ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल को लिखे पत्र में रेल लाइन दोहरीकरण और इलेक्ट्रिफिकेशन की सुस्त रफ्तार पर चिंता जाहिर की है. पीएमओ ने रेलवे से पूछा है कि पिछले 2 साल से रेलवे को मिल रहे फंड में भारी इजाफा हुआ है, तो भी काम में तेजी क्यों नहीं आई.

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इस चिट्ठी के बाद सुरेश प्रभु लगातार रेलवे बोर्ड के अफसरों के साथ बैठक कर रहे हैं. इस चिट्ठी के बाद सुरेश प्रभु लगातार रेलवे बोर्ड के अफसरों के साथ बैठक कर रहे हैं.

सिद्धार्थ तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 8:06 AM IST

प्रधानमंत्री कार्यालय ने रेल मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर रेलवे में विकास कार्यों की सुस्त चाल को लेकर आगाह किया है. पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्र ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल को लिखे पत्र में रेल लाइन दोहरीकरण और इलेक्ट्रिफिकेशन की सुस्त रफ्तार पर चिंता जाहिर की है. पीएमओ ने रेलवे से पूछा है कि पिछले 2 साल से रेलवे को मिल रहे फंड में भारी इजाफा हुआ है, तो भी काम में तेजी क्यों नहीं आई.

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पीएमओ की तरफ से को 31 जनवरी को यह पत्र भेजा गया था. इस पत्र में इस बात पर चिंता जाहिर की गई है कि सन 2016 के लिए रेल लाइन दोहरीकरण का लक्ष्य 1600 किलोमीटर का रखा गया था. लेकिन इस लक्ष्य के उलट रेलवे ने दिसंबर तक महज 531 किलोमीटर की रेल लाइन का दोहरीकरण किया है. इसके अलावा इस पत्र में कहा गया है कि रेल लाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम का लक्ष्य 2016 के लिए 2000 किलोमीटर तय किया गया था, लेकिन इसके विपरीत अभी तक 1210 किलोमीटर रेल लाइन का ही इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया है.

नृपेंद्र मिश्र के इस पत्र में से कहा गया है कि उनको उम्मीद है कि रेलवे अपने लक्ष्य से ज्यादा का काम करेगा. ऐसा करके रेलवे इस बात को सही साबित करेगा कि अगले साल के बजट में उसको विकास कार्यों के लिए जो रकम दी गई है, वह तर्कसंगत है. रेल मंत्रालय से कहा गया है कि वह काम में तेजी लाए और चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही के अंतिम दिनों में फंड को खत्म करने के लिए पहले की तरह काम ना किया जाए. अगर ऐसा किया जाता है तो इससे अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में काम की रफ्तार धीमी पड़ जाती है. लिहाजा रेलवे को अपने काम की समीक्षा करनी चाहिए और अपनी क्रियान्वयन क्षमता को बढ़ाना चाहिए.

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पीएमओ से आई इस चिट्ठी के बाद रेलवे बोर्ड के आला अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है. रेलमंत्री सुरेश प्रभु लगातार रेलवे बोर्ड के अफसरों और अलग-अलग रेलवे जोन के महाप्रबंधकों से लगातार मीटिंग कर रहे हैं. रेलवे के हर एक डिपार्टमेंट के काम की समीक्षा की जा रही है.

हालांकि रेलवे के कुछ अधिकारी के मुताबिक, पीएमओ से मिली इस चिट्ठी में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे रेलवे को घबराने की जरूरत है. उनके मुताबिक रेलवे का ज्यादातर काम अक्टूबर से लेकर मार्च के दौरान फुल स्पीड पर चलता है, लिहाजा मार्च के आंकड़े आने पर सारी चिंताएं दूर हो जाएंगी.

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