राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए बीजेपी अपने 40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारेगी, जिनमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया शामिल हैं.
बीजेपी का उपचुनाव को इतनी गंभीरता से लेना अनायास नहीं है. दरअसल, पिछले लगभग साढ़े तीन साल में लोकसभा में बीजेपी सांसदों की संख्या 282 से घटकर 276 पहुंच चुकी है. कुछ सांसदों के देहांत और कुछ के इस्तीफे की वजह से 8 लोकसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं. इनमें में दो-दो और महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया से बीजेपी के सांसद थे.
उपचुनाव को इसलिए गंभीरता से ले रही है बीजेपी
यदि बीजेपी इन पांचों सीटों पर जीत हासिल नहीं करती है, तो लोकसभा में उसके सदस्यों की संख्या बहुमत से एक कम हो जाएगी. हालांकि इससे को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि एनडीए को मिलाकर बहुमत कहीं ज्यादा है. लेकिन अगर बीजेपी इन पांचों सीटों को हार जाती है, तो बतौर पार्टी लोकसभा में वह बहुमत से चूक जाएगी.
माना जा रहा है कि इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही में संबंधित राज्य सरकार (भाजपा शासित) के जिम्मे ही नहीं छोड़ना चाहती है. पीएम की लोकप्रियता को देखते हुए उनकी कई रैलियां इन इलाकों में कराने का विचार चल रहा है. साथ ही केंद्रीय नेताओं के साथ ही बड़े पैमाने पर राज्य के बड़े नेताओं को स्टार प्रचारक के रूप में उतारने का फैसला किया गया है.
बीजेपी नेता भी परोक्ष रूप से यह मानकर चल रहे हैं कि एक-एक सीट महत्वपूर्ण है. इसलिए किसी भी हाल में पार्टी अपना पूरा प्रयास करेगी, जिससे सीट न सिर्फ जीत सकें बल्कि बड़े अंतर से जीत हासिल कर सकें.
गौरतलब है कि राजस्थान की दो लोकसभा और एक पर हो रहे उपचुनाव ने सियासी तापमान गर्म कर दिया है. अजमेर और अलवर लोकसभा सीट के साथ-साथ मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर 29 जनवरी को उपचुनाव होना है. बीजेपी नेता सांवरलाल जाट के निधन के चलते अजमेर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं.
सना जैदी