नेपाल के नए PM प्रचंड आएंगे दिल्ली, भारत देगा सौगात

पूर्व माओवादी कमांडर प्रचंड ने पीएम बनने के बाद भारत को ही पहले विदेशी दौरे के लिए चुना है.

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नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड भारत आ रहे हैं नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड भारत आ रहे हैं

अभि‍षेक आनंद

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 8:05 AM IST

नेपाल के नए प्रधानमंत्री के पहले विदेशी दौर पर भारत उन्हें सौगात दे सकता है. नेपाल के नए पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड इसी हफ्ते 4 दिनों के लिए भारत आ रहे हैं. इस दौरान ईस्ट-वेस्ट रेलवे लाइन बनाने के लिए भारत से बातचीत होगी.

प्रचंड को भारत की ओर से अन्य सहायता भी दी जा सकती है, ताकि एक बार फिर से भारत नेपाल से अपने रिश्ते को बेहतर कर सके और नेपाल पर चीन की पकड़ को कम किया जा सके.

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ठंडे पड़ गए थे भारत-नेपाल के संबंध
पूर्व माओवादी कमांडर प्रचंड ने पीएम बनने के बाद भारत को ही पहले विदेशी दौरे के लिए चुना है. उनकी कोशिश भारत के साथ नेपाल के रिश्ते को बेहतर करने की होगी. उनसे पूर्व के नेपाली पीएम के दौरान भारत-नेपाल के संबंध ठंडे पड़ गए थे. नेपाल के पूर्व पीएम केपी ओली ने ऐसे समझौते भी किए थे, जिससे भारत के ऊपर नेपाल की निर्भरता कम हो सके.

प्रचंड ने मंगलवार को काठमांडू में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'कुछ समय के लिए भारत के साथ रिश्ता ठंडा पड़ गया था. मैं कड़वाहट को दूर करना चाहता हूं.' उन्होंने ये भी कहा कि भारत अब नेपाल की मदद करना चाहता है जो कि अभी मुश्किल हालात में है.

प्रोजेक्ट की फंडिंग पर होगी चर्चा
करीब 10 सालों तक चले बगावत और तमाम विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल में अब भी पूरी तरह से राजनीतिक स्थितरता आनी बाकी है. देश के नए संविधान से अब भी एक समूह को दिक्कत है जिसने 5 महीने तक बॉर्डर पर ब्लॉकेड कर रखा था. नेपाल की पिछली सरकार ने ब्लॉकेड के लिए भारत पर भी समर्थन करने का आरोप लगाया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था. प्रचंड ने कहा है कि दोनों पक्ष नेपाल के मेची से लेकर भारत के महाकाली तक बनने वाली रेलवे लाइन के बारे में चर्चा करेंगे. एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के बारे में पहले भी बातचीत हुई है, लेकिन अब दोनों देश इससे जुड़े वित्तीय पहलुओं पर चर्चा करेंगे.

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चीन भी नेपाल में कर रहा है काम
एक अधिकारी ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विकास प्रोजेक्ट है और इसे तुरंत आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी. नेपाल में इस वक्त सिर्फ एक ही रेलवे लाइन है जो जनकपुर से भारत के जयनगर के पास तक है. रेलवे लाइन के अलावा भारत और नेपाल के बीच हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पॉवर प्लांट को लेकर भी बात होगी. यह भारत की सहायता से शुरू किया जाएगा. भारत के अलावा नेपाल में चीन के सहयोग से भी काफी रोड और हॉस्पिटल्स बनाए जा रहे हैं. लेकिन भारत की कोशिश होगी कि वह अपने प्रोजेक्ट्स के जरिए नेपाल पर चीन का एकतरफा प्रभाव स्थापित न होने दे.

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