तमिलनाडु में जल्लीकट्टू से अब तक 4 लोगों की मौत

मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया जिसमें 1100 बैल और 1500 खिलाड़ी शामिल हुए. इस मौके पर मौजूद उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने कहा कि आलंगाल्लुर जल्लीकट्टू आयोजित करने के लिए एक स्थायी आयोजन स्थल बनाया जाएगा.

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जल्लीकट्टू का खेल जल्लीकट्टू का खेल

अनुग्रह मिश्रा

  • मदुरई,
  • 16 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 7:13 PM IST

तमिलनाडु के विभिन्न स्थानों पर बैलों को काबू में करने वाले पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू और मांजाविरट्टू के दौरान मंगलवार को तीन व्यक्तियों की मौत हो गई. अब तक कुल 4 लोगों की जान इस खेल की वजह से जा चुकी है. इन खेलों को आयोजन पोंगल त्योहार के हिस्से के तौर पर किया गया।

पुलिस ने बताया कि पड़ोस के शिवगंगा जिले के सिरावायल में मांजाविरट्टू (बुल को काबू में करने का खेल जो कि जल्लीकट्टू से थोड़ा अलग होता है) देख रहे 2 दर्शकों की मौत हो गई. तिरूचिरापल्ली जिले के आवरंगाडू में जल्लीकट्टू के दौरान एक भड़के हुए बैल ने सोलई पांडियन नाम के.

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इससे इस मौसम में बैल को काबू में करने वाले खेल में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. सोमवार को इसी जिले के पालामेडू में एक बैल ने 19 वर्षीय दर्शक को मार डाला था. यहां पास के आलंगाल्लुर में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध जल्लीकट्टू में आज कम से कम 25 व्यक्ति घायल हो गए.

मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया जिसमें 1100 बैल और 1500 खिलाड़ी शामिल हुए. इस मौके पर मौजूद उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने कहा कि आलंगाल्लुर जल्लीकट्टू आयोजित करने के लिए एक बनाया जाएगा.

आलंगाल्लुर में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे थे जिसमें विदेशी भी शामिल थे. विजेता को मिलने वाले इनाम में सोने के सिक्के से लेकर फर्नीचर शामिल था. पुलिस ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. चिकित्सकीय टीमें भी मौके पर मौजूद थीं.

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SC ने किया था बैन

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में पशुओं पर होने वाली क्रूरता के तर्क के आधार पर जल्लीकट्टू को बैन कर दिया था. इसके बाद राज्य सरकार ने एक अध्यादेश पारित कर बैलों को काबू करने से जुड़े इस पारंपरिक तमिल खेल की इजाजत दे दी थी, लेकिन ये प्रदर्शनकारी इस पर स्थायी समाधान की मांग को लेकर काफी दिनों तक प्रदर्शन करते रहे थे.

जल्लीकट्टू पर लगा बैन हटाने को लेकर पिछले साल की शुरुआत में राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ था. तमिलनाडु में इस कदम का व्यापक विरोध देखते हुए राज्य सरकार ने इसे जारी रखने के लिए एक कानून बनाया था.

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