खेती पर महामंथन: किसान की आय 19 गुना बढ़ी, जबकि टीचर की कमाई 320 गुना- एक्सपर्ट

देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि हमारा आर्थिक डिजाइन ही ऐसा है कि सरकारें खेती को खत्म करना चाहती है. उन्होंने कहा कि ये ट्रेंड पूरी दुनिया में चल रहा है.

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देवेन्द्र शर्मा, कृषि मामलों के विशेषज्ञ देवेन्द्र शर्मा, कृषि मामलों के विशेषज्ञ

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST

कृषि मामलों के विशेषज्ञ देवेन्द्र शर्मा ने कहा है कि देश से न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म करने की साजिश हो रही है. यही नहीं उन्होंने कहा कि हमारा आर्थिक डिजाइन ही ऐसा ही ऐसा है कि सरकारें खेती को खत्म करना चाहती है, ताकि शहरों के विकास लिए सस्ते मजदूर मिल सके. ये बातें देश का सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क और सर्वाधिक देखे जाने वाला हिंदी न्यूज चैनल आजतक के कृषि इनोवेशन समिट में देवेन्द्र शर्मा ने कही. ये आयोजन दिल्ली में हुआ है.

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देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि देश से आज मिनिमम सपोर्ट प्राइस के सिस्टम को ही पूरी तरह से खत्म करने की वकालत की जा रही है. हालांकि जरूरत है कि इसका विस्तार किया जाए और ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसके दायरे में लाया जाए. उन्होंने कहा कि एमएसपी का कोई फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है, बिहार जैसे राज्य में एमएसपी की व्यवस्था नहीं है, वहीं पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में मुठ्ठीभर किसानों को ही एमएसपी मिल रहा है. देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि माहौल बनाया जा रहा है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की बजाय बाजार उनके उपज का अच्छा मूल्य देगा. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ऐसा होता तो वे 94 प्रतिशत किसान जिन्हें एमएसपी नहीं मिल रही है, वे बदहाल क्यों हैं?

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देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि अगर मूल वेतन और महंगाई भत्ता की बात की जाए तो 45 साल में किसान की आय मात्र 19 गुना बढ़ी है, जबकि टीचर की आय 280 से 320 गुना और प्रोफेसर की आय 150 से 170 गना बढ़ी है. देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि हमसे पूछा जाता है कि पैसा कहां से आएगा, लेकिन जब आप कॉरपोरेट को पैसा देते हैं तो ये सवाल नहीं पूछते हैं.

इसी चर्चा के दौरान राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि हमारे देश  में किसान भूखा सोता ही नहीं, सुसाइड भी करता है. उन्होंने कहा कि हम किसान का पेट नहीं भर सकते हैं, उसकी झोली क्या भरेंगे. वीएम सिंह ने कहा कि आज किसानों से कहा जा रहा है कि पराली नहीं जलाइए, नहीं तो जुर्माना देना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अगर किसान पराली नहीं जलाएंगे, तो कोई रास्ता तो निकालिए.

वीएम सिंह ने कहा कि आज किसान इतना मजबूर है कि वो जुर्माना देकर भी खेत में पराली जलाना चाहता है, क्योंकि ये उसके लिए सस्ता पड़ता है. उन्होंने कहा कि हम किसान की झोली क्या भरेंगे, उन्हें उनका हक भी नहीं दे पा रहे हैं. वीएम सिंह ने कहा कि आज हर किसान कर्जे की जिंदगी जी रहा है. वीएम सिंह ने बेहद दुखी होकर कहा कि किसान अपनी बेटी की शादी किसान से नहीं करना चाहता है, वो चपरासी के साथ उसकी शादी करने को तैयार है.

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