कावेरी विवाद: थम गई है कर्नाटक की रफ्तार

तमिलनाडु को कावेरी नदी का जल छोड़ने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश के विरोध में शुक्रवार को कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कर्नाटक में बंद बुलाया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. एक सप्ताह से कम समय में यह दूसरी बार और इस साल चौथी बार है जब राज्य में बंद बुलाया गया है.

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कावेरी नदी कावेरी नदी

सबा नाज़ / रोहिणी स्‍वामी

  • बेंगलुरू,
  • 09 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST

तमिलनाडु को कावेरी नदी का जल छोड़ने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश के विरोध में शुक्रवार को कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कर्नाटक में बंद बुलाया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. एक सप्ताह से कम समय में यह दूसरी बार और इस साल चौथी बार है जब राज्य में बंद बुलाया गया है.

लेकिन मांड्या से शुरू हुआ विरोध राजधानी तक पहुंच चुका है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि लोगों का विरोध दर्ज करने का पूरा अधिकार है, अगर किसी ने हिंसा का सहारा लिया तो राज्य सरकार चुप नहीं बठैगी. हिंसा करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा.

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कर्नाटक के शहरों को खासतौर से आईटी कैपिटल बेंगलुरू पूरी तरह से किले में तब्दील कर दिया गया है. सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है. अतिरिक्त सुरक्षा के लिए आंध्र प्रदेश और केरल से को बुलाया गया है.

इन सेवाओं पर पड़ेगा असर
3800 पेट्रोल और डीजल पंपों ने भी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद का समर्थन करने का ऐलान किया है. इतना ही नहीं केबल ऑपरेटरों ने भी 53 तमिल चैनल ब्लॉक करके किया है. स्कूल और कॉलेज भी बंद रहेंगे. सभी तरह के व्यापारिक कॉम्प्लैक्स और दुकानें भी बंद रहेंगी. होटल और रेस्टोरेंट भी इस दौरान बंद रहेंगे. ऑटो, बसों को भी चलने नहीं दिया जाएगा. मेट्रो भी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद रहेगी.

100 साल पुराना विवाद
कावेरी नदी का 15,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को रोजाना दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में कर्नाटक के लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच काफी लंबे समय से जंग छिड़ी हुई है. ये विवाद करीब 100 साल पुराना है.

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