‘आजतक’ की खबर का असर: चार राज्यों में परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन... बस मालिकों में हड़कंप

देश के अलग-अलग राज्यों की सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर चलने वाली स्लीपर बसों के खिलाफ 'आजतक' के रियलिटी चेक का बड़ा असर हुआ है. खबर दिखाए जाने के महज कुछ ही घंटों के भीतर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली की सरकारों ने कड़ा संज्ञान लिया.

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आजतक के रियलटी चेक में खुली स्लीपर बसों की पोल (Photo- ITG) आजतक के रियलटी चेक में खुली स्लीपर बसों की पोल (Photo- ITG)

समर्थ श्रीवास्तव / अमन भारद्वाज / शरत कुमार / सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:16 PM IST

देशभर में स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर ‘आजतक’ द्वारा किए गए स्लीपर बस रियलिटी चेक का बड़ा असर देखने को मिला है. खबर दिखाए जाने के महज कुछ ही घंटों के भीतर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली में परिवहन विभाग हरकत में आ गया है. जगह-जगह छापेमारी, चालान, बसों को सीज करने और जांच के आदेश दिए गए हैं. वहीं मध्य प्रदेश से प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.

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उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने ‘आजतक’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पूरी रिपोर्ट देखी है और इस मामले में कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि विभाग पहले भी लगातार कार्रवाई करता रहा है, चाहे बसों को सीज करना हो या रायबरेली, लखनऊ जैसे जिलों में एआरटीओ को निलंबित करना हो.

परिवहन मंत्री ने कहा कि यदि कोई बस सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही है, तो कुछ ही दिनों में जांच कराई जाएगी और फिर मैदान में उतरकर ऐसी बसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने दो टूक कहा कि किसी को भी यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने का हक नहीं है. सरकार इस मामले में पूरी तरह एक्टिव है और ‘आजतक’ द्वारा उठाए गए मुद्दों का संज्ञान लिया गया है.

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पंजाब में नियम तोड़ने वाली बसों पर शिकंजा

पंजाब के परिवहन मंत्री ललजीत सिंह भुल्लर ने भी स्लीपर बस रियलिटी चेक पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हाल के हादसों के बाद केंद्र सरकार की ओर से स्लीपर बसों के लिए सख्त नियम तय किए गए थे, जिनमें चार इमरजेंसी एग्जिट, दो फायर एक्सटिंग्विशर, फायर सेफ्टी सिस्टम जैसे प्रावधान शामिल हैं. इसके बावजूद कई बसें नियमों का उल्लंघन कर रही हैं.

भुल्लर ने कहा कि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी बसों की जांच की जाए, चालान काटे जाएं और जरूरत पड़ी तो इन बसों को पूरी तरह बंद किया जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों की जान सबसे अहम है और इसके साथ कोई समझौता नहीं होगा.

राजस्थान में भी एक्शन, दर्जनों बसों पर छापेमारी

‘आजतक’ की रिपोर्ट के बाद राजस्थान के जयपुर में परिवहन विभाग ने भी बड़ी कार्रवाई की. स्लीपर बसों में सुरक्षा मानकों के खुले उल्लंघन की खबर सामने आने के बाद परिवहन विभाग की विजिलेंस टीम ने दिनभर छापेमारी की. इस दौरान दर्जनों बसों के चालान काटे गए और कई बसों को सीज किया गया.

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एक बस जो अहमदाबाद से जयपुर आ रही थी, उसे जब रोका गया तो अधिकारी भी हैरान रह गए. इमरजेंसी गेट पर सामान रखकर उसे पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया था और बस का गलियारा भी सामान से जाम था. दूसरे इमरजेंसी गेट पर भी सीट लगाकर रास्ता बंद किया गया था. यह बस पार्शवनाथ ट्रैवेल्स की थी, जिसके मालिक अहमदाबाद के यास्मीन खान बताए गए हैं. यात्रियों को उतारने के बाद बस को सीज कर परिवहन विभाग के यार्ड में ले जाया गया, जहां बस मालिक के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा.

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इसी तरह भुज से जयपुर आ रही एक अन्य बस में दोनों इमरजेंसी गेट के सामने सीटें लगी हुई थीं. इस बस पर भी चालान काटा गया. सिंधी कैंप से जब्त की गई एक बस में बाहर से तो इमरजेंसी गेट दिख रहे थे, लेकिन अंदर चार-चार स्लीपर सीटें लगाकर उन्हें पूरी तरह पैक किया गया था. इसके अलावा कई बसों की छत पर अवैध कैरियर बने हुए थे, जिन्हें तोड़कर हटाया गया.

दिल्ली में ‘ऑपरेशन डेडली परमिट’

दिल्ली में भी ‘आजतक’ की खबर के बाद परिवहन विभाग ने ऑपरेशन डेडली परमिट के तहत बड़ी कार्रवाई की. रात 12 बजे तक चली कार्रवाई में करीब डेढ़ दर्जन बसों को जब्त किया गया. मोरी गेट, राजौरी बॉर्डर, मयूर विहार और आईएसबीटी इलाके में छापेमारी की गई. परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

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मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है, जहां इसी तरह के बड़े स्तर पर उल्लंघन की खबरें सामने आई थीं.

रिपोर्ट का असर, लेकिन सवाल बरकरार

'आजतक' के रियलिटी चेक में यह उजागर हुआ कि कैसे बस मालिक अधिक मुनाफे के चक्कर में इमरजेंसी गेट की जगह सीटें लगा देते हैं और बस की छत पर अवैध कैरियर बनाकर सुरक्षा मानकों को ताक पर रख देते हैं. चार राज्यों की सरकारों द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई उन यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है जो हर रोज इन 'सफर' में अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करते हैं. लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या यह कार्रवाई स्थायी होगी या कुछ दिनों बाद फिर हालात जस के तस हो जाएंगे?

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