'आजतक' के रियलिटी चेक में स्लीपर बस ऑपरेटरों द्वारा सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का खुलासा हुआ है. जहां एक ओर ऑपरेटर नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं, वहीं विभाग मानकों की अनदेखी कर उन्हें लाइसेंस/परमिट दे रहा है. अब इसको लेकर उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने प्रतिक्रिया दी है.
यूपी के परिवहन मंत्री ने कहा कि 'आजतक' की रिपोर्ट उन्होंने देखी है. लापरवाही पर इस मामले में कार्रवाई की जाएगी. पहले भी एक्शन लिए गए हैं. चाहे बस सीज करना हो या रायबरली, लखनऊ आदि एआरटीओ को निलंबित करना हो, विभाग लगातार ऐसे लोगों के खिलाफ एक्शन लेता आ रहा है.
दयाशंकर सिंह ने कहा कि अगर कोई बस मानकों का पालन नहीं कर रही है तो हम कुछ दिन में एक जांच करेंगे और फिर खुद मैदान में उतरकर ऐसी बसों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे. किसी को भी किसी की जान से खिलवाड़ करने का हक नहीं है. पूरा मामला 'आजतक' ने दिखाया है उसका संज्ञान लिया गया है. सरकार एक्टिव है.
आपको बता दें कि 'आजतक' की टीम जब सरकारी दावों की पड़ताल करने निकली, तो दिल्ली से राजस्थान तक, मध्य प्रदेश से पंजाब तक, स्लीपर बसों में मौजूद सुरक्षा इंतजामों की हैरान करने वाली हकीकत सामने आई. गौरतलब है कि ये हालात तब हैं जब संसद में सरकार ने माना कि बीते तीन सालों में 64 यात्रियों की मौत स्लीपर बस में जिंदा जलने से हुई.
वहीं, केंद्रीय परिवहन मंत्री 'मौत का गोला' बन रही स्लीपर बसों को लेकर नए नियम बनाने का दावा कर रहे हैं. मामले को लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के परिवहन मंत्रियों से 'आजतक' ने सवाल पूछा है कि आखिर स्लीपर बसों को जान लेने का परमिट कब तक मिलता रहेगा?
टीम ने लखनऊ में स्लीपर बसों में मौजूद सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल की, जिसमें पाया गया कि स्लीपर बसों में सुरक्षा के कायदे-कानूनों का पालन नहीं हो रहा है. ट्रांसपोर्ट नगर से चलने वाली स्लीपर बसों में तमाम खामियां दिखीं.
समर्थ श्रीवास्तव